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265. पृष्ठ
15 · अल-हिज्र
اِذْ دَخَلُوا عَلَيْهِ فَقَالُوا سَلَامًاۜ قَالَ اِنَّا مِنْكُمْ وَجِلُونَ52
जब वे उसके यहाँ आए और उन्होंने सलाम किया तो उसने कहा, "हमें तो तुमसे डर लग रहा है।"
قَالُوا لَا تَوْجَلْ اِنَّا نُبَشِّرُكَ بِغُلَامٍ عَل۪يمٍ53
वे बोले, "डरो नहीं, हम तुम्हें एक ज्ञानवान पुत्र की शुभ सूचना देते है।"
قَالَ اَبَشَّرْتُمُون۪ي عَلٰٓى اَنْ مَسَّنِيَ الْكِبَرُ فَبِمَ تُبَشِّرُونَ54
उसने कहा, "क्या तुम मुझे शुभ सूचना दे रहे हो, इस अवस्था में कि मेरा बुढापा आ गया है? तो अब मुझे किस बात की शुभ सूचना दे रहे हो?"
قَالُوا بَشَّرْنَاكَ بِالْحَقِّ فَلَا تَكُنْ مِنَ الْقَانِط۪ينَ55
उन्होंने कहा, "हम तुम्हें सच्ची शुभ सूचना दे रहे हैं, तो तुम निराश न हो"
قَالَ وَمَنْ يَقْنَطُ مِنْ رَحْمَةِ رَبِّه۪ٓ اِلَّا الضَّٓالُّونَ56
उसने कहा, "अपने रब की दयालुता से पथभ्रष्टों के सिवा और कौन निराश होगा?"
قَالَ فَمَا خَطْبُكُمْ اَيُّهَا الْمُرْسَلُونَ57
उसने कहा, "ऐ दूतो, तुम किस अभियान पर आए हो?"
قَالُٓوا اِنَّٓا اُرْسِلْنَٓا اِلٰى قَوْمٍ مُجْرِم۪ينَۙ58
वे बोले, "हम तो एक अपराधी क़ौम की ओर भेजे गए है,
اِلَّٓا اٰلَ لُوطٍۜ اِنَّا لَمُنَجُّوهُمْ اَجْمَع۪ينَۙ59
सिवाय लूत के घरवालों के। उन सबको तो हम बचा लेंगे,
اِلَّا امْرَاَتَهُ قَدَّرْنَٓاۙ اِنَّهَا لَمِنَ الْغَابِر۪ينَ۟60
सिवाय उसकी पत्नी के - हमने निश्चित कर दिया है, वह तो पीछे रह जानेवालों में रहेंगी।"
فَلَمَّا جَٓاءَ اٰلَ لُوطٍۨ الْمُرْسَلُونَۙ61
फिर जब ये दूत लूत के यहाँ पहुँचे,
قَالَ اِنَّكُمْ قَوْمٌ مُنْكَرُونَ62
तो उसने कहा, "तुम तो अपरिचित लोग हो।"
قَالُوا بَلْ جِئْنَاكَ بِمَا كَانُوا ف۪يهِ يَمْتَرُونَ63
उन्होंने कहा, "नहीं, बल्कि हम तो तुम्हारे पास वही चीज़ लेकर आए है, जिसके विषय में वे सन्देह कर रहे थे
وَاَتَيْنَاكَ بِالْحَقِّ وَاِنَّا لَصَادِقُونَ64
और हम तुम्हारे पास यक़ीनी चीज़ लेकर आए है, और हम बिलकुल सच कह रहे है
فَاَسْرِ بِاَهْلِكَ بِقِطْعٍ مِنَ الَّيْلِ وَاتَّبِعْ اَدْبَارَهُمْ وَلَا يَلْتَفِتْ مِنْكُمْ اَحَدٌ وَامْضُوا حَيْثُ تُؤْمَرُونَ65
अतएव अब तुम अपने घरवालों को लेकर रात्रि के किसी हिस्से में निकल जाओ, और स्वयं उन सबके पीछे-पीछे चलो। और तुममें से कोई भी पीछे मुड़कर न देखे। बस चले जाओ, जिधर का तुम्हे आदेश है।"
وَقَضَيْنَٓا اِلَيْهِ ذٰلِكَ الْاَمْرَ اَنَّ دَابِرَ هٰٓؤُ۬لَٓاءِ مَقْطُوعٌ مُصْبِح۪ينَ66
हमने उसे अपना यह फ़ैसला पहुँचा दिया कि प्रातः होते-होते उनकी जड़ कट चुकी होगी
وَجَٓاءَ اَهْلُ الْمَد۪ينَةِ يَسْتَبْشِرُونَ67
इतने में नगर के लोग ख़ुश-ख़ुश आ पहुँचे
قَالَ اِنَّ هٰٓؤُ۬لَٓاءِ ضَيْف۪ي فَلَا تَفْضَحُونِۙ68
उसने कहा, "ये मेरे अतिथि है। मेरी फ़ज़ीहत मत करना,
وَاتَّقُوا اللّٰهَ وَلَا تُخْزُونِ69
अल्लाह का डर ऱखो, मुझे रुसवा न करो।"
قَالُٓوا اَوَلَمْ نَنْهَكَ عَنِ الْعَالَم۪ينَ70
उन्होंने कहा, "क्या हमने तुम्हें दुनिया भर के लोगों का ज़िम्मा लेने से रोका नहीं था?"