266. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
15 · अल-हिज्र
قَالَ هٰٓؤُ۬لَٓاءِ بَنَات۪ٓي اِنْ كُنْتُمْ فَاعِل۪ينَۜ71
उसने कहा, "तुमको यदि कुछ करना है, तो ये मेरी (क़ौम की) बेटियाँ (विधितः विवाह के लिए) मौजूद है।"
لَعَمْرُكَ اِنَّهُمْ لَف۪ي سَكْرَتِهِمْ يَعْمَهُونَ72
तुम्हारे जीवन की सौगन्ध, वे अपनी मस्ती में खोए हुए थे,
فَاَخَذَتْهُمُ الصَّيْحَةُ مُشْرِق۪ينَۙ73
अन्ततः पौ फटते-फटते एक भयंकर आवाज़ ने उन्हें आ लिया,
فَجَعَلْنَا عَالِيَهَا سَافِلَهَا وَاَمْطَرْنَا عَلَيْهِمْ حِجَارَةً مِنْ سِجّ۪يلٍۜ74
और हमने उस बस्ती को तलपट कर दिया, और उनपर कंकरीले पत्थर बरसाए
اِنَّ ف۪ي ذٰلِكَ لَاٰيَاتٍ لِلْمُتَوَسِّم۪ينَ75
निश्चय ही इसमें भापनेवालों के लिए निशानियाँ है
وَاِنَّهَا لَبِسَب۪يلٍ مُق۪يمٍ76
और वह (बस्ती) सार्वजनिक मार्ग पर है
اِنَّ ف۪ي ذٰلِكَ لَاٰيَةً لِلْمُؤْمِن۪ينَۜ77
निश्चय ही इसमें मोमिनों के लिए एक बड़ी निशानी है
وَاِنْ كَانَ اَصْحَابُ الْاَيْكَةِ لَظَالِم۪ينَۙ78
और निश्चय ही ऐसा वाले भी अत्याचारी थे,
فَانْتَقَمْنَا مِنْهُمْۢ وَاِنَّهُمَا لَبِاِمَامٍ مُب۪ينٍۜ۟79
फिर हमने उनसे भी बदला लिया, और ये दोनों (भू-भाग) खुले मार्ग पर स्थित है
وَلَقَدْ كَذَّبَ اَصْحَابُ الْحِجْرِ الْمُرْسَل۪ينَۙ80
हिज्रवाले भी रसूलों को झुठला चुके है
وَاٰتَيْنَاهُمْ اٰيَاتِنَا فَكَانُوا عَنْهَا مُعْرِض۪ينَۙ81
हमने तो उन्हें अपनी निशानियाँ प्रदान की थी, परन्तु वे उनकी उपेक्षा ही करते रहे
وَكَانُوا يَنْحِتُونَ مِنَ الْجِبَالِ بُيُوتًا اٰمِن۪ينَ82
वे बड़ी बेफ़िक्री से पहाड़ो को काट-काटकर घर बनाते थे
فَاَخَذَتْهُمُ الصَّيْحَةُ مُصْبِح۪ينَۙ83
अन्ततः एक भयानक आवाज़ ने प्रातः होते- होते उन्हें आ लिया
فَمَٓا اَغْنٰى عَنْهُمْ مَا كَانُوا يَكْسِبُونَۜ84
फिर जो कुछ वे कमाते रहे, वह उनके कुछ काम न आ सका
وَمَا خَلَقْنَا السَّمٰوَاتِ وَالْاَرْضَ وَمَا بَيْنَهُمَٓا اِلَّا بِالْحَقِّۜ وَاِنَّ السَّاعَةَ لَاٰتِيَةٌ فَاصْفَحِ الصَّفْحَ الْجَم۪يلَ85
हमने तो आकाशों और धरती को और जो कुछ उनके मध्य है, सोद्देश्य पैदा किया है, और वह क़ियामत की घड़ी तो अनिवार्यतः आनेवाली है। अतः तुम भली प्रकार दरगुज़र (क्षमा) से काम लो
اِنَّ رَبَّكَ هُوَ الْخَلَّاقُ الْعَل۪يمُ86
निश्चय ही तुम्हारा रब ही बड़ा पैदा करनेवाला, सब कुछ जाननेवाला है
وَلَقَدْ اٰتَيْنَاكَ سَبْعًا مِنَ الْمَثَان۪ي وَالْقُرْاٰنَ الْعَظ۪يمَ87
हमने तुम्हें सात 'मसानी' का समूह यानी महान क़ुरआन दिया-
لَا تَمُدَّنَّ عَيْنَيْكَ اِلٰى مَا مَتَّعْنَا بِه۪ٓ اَزْوَاجًا مِنْهُمْ وَلَا تَحْزَنْ عَلَيْهِمْ وَاخْفِضْ جَنَاحَكَ لِلْمُؤْمِن۪ينَ88
जो कुछ सुख-सामग्री हमने उनमें से विभिन्न प्रकार के लोगों को दी है, तुम उसपर अपनी आँखें न पसारो और न उनपर दुखी हो, तुम तो अपनी भुजाएँ मोमिनों के लिए झुकाए रखो,
وَقُلْ اِنّ۪ٓي اَنَا۬ النَّذ۪يرُ الْمُب۪ينُۚ89
और कह दो, "मैं तो साफ़-साफ़ चेतावनी देनेवाला हूँ।"
كَمَٓا اَنْزَلْنَا عَلَى الْمُقْتَسِم۪ينَۙ90
जिस प्रकार हमने हिस्सा-बख़रा करनेवालों पर उतारा था,