268. पृष्ठ - कुरान पढ़ें

268. पृष्ठ
16 · अन-नहल
وَتَحْمِلُ اَثْقَالَكُمْ اِلٰى بَلَدٍ لَمْ تَكُونُوا بَالِغ۪يهِ اِلَّا بِشِقِّ الْاَنْفُسِۜ اِنَّ رَبَّكُمْ لَرَؤُ۫فٌ رَح۪يمٌۙ7
वे तुम्हारे बोझ ढोकर ऐसे भूभाग तक ले जाते हैं, जहाँ तुम जी-तोड़ परिश्रम के बिना नहीं पहुँच सकते थे। निस्संदेह तुम्हारा रब बड़ा ही करुणामय, दयावान है
وَالْخَيْلَ وَالْبِغَالَ وَالْحَم۪يرَ لِتَرْكَبُوهَا وَز۪ينَةًۜ وَيَخْلُقُ مَا لَا تَعْلَمُونَ8
और घोड़े और खच्चर और गधे भी पैदा किए, ताकि तुम उनपर सवार हो और शोभा का कारण भी। और वह उसे भी पैदा करता है, जिसे तुम नहीं जानते
وَعَلَى اللّٰهِ قَصْدُ السَّب۪يلِ وَمِنْهَا جَٓائِرٌۜ وَلَوْ شَٓاءَ لَهَدٰيكُمْ اَجْمَع۪ينَ۟9
अल्लाह के लिए ज़रूरी है उचित एवं अनुकूल मार्ग दिखाना और कुछ मार्ग टेढ़े भी है। यदि वह चाहता तो तुम सबको अवश्य सीधा मार्ग दिखा देता
هُوَ الَّذ۪ٓي اَنْزَلَ مِنَ السَّمَٓاءِ مَٓاءً لَكُمْ مِنْهُ شَرَابٌ وَمِنْهُ شَجَرٌ ف۪يهِ تُس۪يمُونَ10
वही है जिसने आकाश से तुम्हारे लिए पानी उतारा, जिसे तुम पीते हो और उसी से पेड़ और वनस्पतियाँ भी उगती है, जिनमें तुम जानवरों को चराते हो
يُنْبِتُ لَكُمْ بِهِ الزَّرْعَ وَالزَّيْتُونَ وَالنَّخ۪يلَ وَالْاَعْنَابَ وَمِنْ كُلِّ الثَّمَرَاتِۜ اِنَّ ف۪ي ذٰلِكَ لَاٰيَةً لِقَوْمٍ يَتَفَكَّرُونَ11
और उसी से वह तुम्हारे लिए खेतियाँ उगाता है और ज़ैतून, खजूर, अंगूर और हर प्रकार के फल पैदा करता है। निश्चय ही सोच-विचार करनेवालों के लिए इसमें एक निशानी है
وَسَخَّرَ لَكُمُ الَّيْلَ وَالنَّهَارَۙ وَالشَّمْسَ وَالْقَمَرَۜ وَالنُّجُومُ مُسَخَّرَاتٌ بِاَمْرِه۪ۜ اِنَّ ف۪ي ذٰلِكَ لَاٰيَاتٍ لِقَوْمٍ يَعْقِلُونَۙ12
और उसने तुम्हारे लिए रात और दिन को और सूर्य और चन्द्रमा को कार्यरत कर रखा है। और तारे भी उसी की आज्ञा से कार्यरत है - निश्चय ही इसमें उन लोगों के लिए निशानियाँ है जो बुद्धि से काम लेते है-
وَمَا ذَرَاَ لَكُمْ فِي الْاَرْضِ مُخْتَلِفًا اَلْوَانُهُۜ اِنَّ ف۪ي ذٰلِكَ لَاٰيَةً لِقَوْمٍ يَذَّكَّرُونَ13
और धरती में तुम्हारे लिए जो रंग-बिरंग की चीज़े बिखेर रखी है, उसमें भी उन लोगों के लिए बड़ी निशानी है जो शिक्षा लेनेवाले है
وَهُوَ الَّذ۪ي سَخَّرَ الْبَحْرَ لِتَاْكُلُوا مِنْهُ لَحْمًا طَرِيًّا وَتَسْتَخْرِجُوا مِنْهُ حِلْيَةً تَلْبَسُونَهَاۚ وَتَرَى الْفُلْكَ مَوَاخِرَ ف۪يهِ وَلِتَبْتَغُوا مِنْ فَضْلِه۪ وَلَعَلَّكُمْ تَشْكُرُونَ14
वही तो है जिसने समुद्र को वश में किया है, ताकि तुम उससे ताज़ा मांस लेकर खाओ और उससे आभूषण निकालो, जिसे तुम पहनते हो। तुम देखते ही हो कि नौकाएँ उसको चीरती हुई चलती हैं (ताकि तुम सफ़र कर सको) और ताकि तुम उसका अनुग्रह तलाश करो और ताकि तुम कृतज्ञता दिखलाओ