27. पृष्ठ - कुरान पढ़ें

27. पृष्ठ
2 · अल-बक़रा
لَيْسَ الْبِرَّ اَنْ تُوَلُّوا وُجُوهَكُمْ قِبَلَ الْمَشْرِقِ وَالْمَغْرِبِ وَلٰكِنَّ الْبِرَّ مَنْ اٰمَنَ بِاللّٰهِ وَالْيَوْمِ الْاٰخِرِ وَالْمَلٰٓئِكَةِ وَالْكِتَابِ وَالنَّبِيّ۪نَۚ وَاٰتَى الْمَالَ عَلٰى حُبِّه۪ ذَوِي الْقُرْبٰى وَالْيَتَامٰى وَالْمَسَاك۪ينَ وَابْنَ السَّب۪يلِ وَالسَّٓائِل۪ينَ وَفِي الرِّقَابِۚ وَاَقَامَ الصَّلٰوةَ وَاٰتَى الزَّكٰوةَۚ وَالْمُوفُونَ بِعَهْدِهِمْ اِذَا عَاهَدُواۚ وَالصَّابِر۪ينَ فِي الْبَاْسَٓاءِ وَالضَّرَّٓاءِ وَح۪ينَ الْبَاْسِۜ اُو۬لٰٓئِكَ الَّذ۪ينَ صَدَقُواۜ وَاُو۬لٰٓئِكَ هُمُ الْمُتَّقُونَ177
नेकी केवल यह नहीं है कि तुम अपने मुँह पूरब और पश्चिम की ओर कर लो, बल्कि नेकी तो उसकी नेकी है जो अल्लाह अन्तिम दिन, फ़रिश्तों, किताब और नबियों पर ईमान लाया और माल, उसके प्रति प्रेम के बावजूद नातेदारों, अनाथों, मुहताजों, मुसाफ़िरों और माँगनेवालों को दिया और गर्दनें छुड़ाने में भी, और नमाज़ क़ायम की और ज़कात दी और अपने वचन को ऐसे लोग पूरा करनेवाले है जब वचन दें; और तंगी और विशेष रूप से शारीरिक कष्टों में और लड़ाई के समय में जमनेवाले हैं, तो ऐसे ही लोग है जो सच्चे सिद्ध हुए और वही लोग डर रखनेवाले हैं
يَٓا اَيُّهَا الَّذ۪ينَ اٰمَنُوا كُتِبَ عَلَيْكُمُ الْقِصَاصُ فِي الْقَتْلٰىۜ اَلْحُرُّ بِالْحُرِّ وَالْعَبْدُ بِالْعَبْدِ وَالْاُنْثٰى بِالْاُنْثٰىۜ فَمَنْ عُفِيَ لَهُ مِنْ اَخ۪يهِ شَيْءٌ فَاتِّبَاعٌ بِالْمَعْرُوفِ وَاَدَٓاءٌ اِلَيْهِ بِاِحْسَانٍۜ ذٰلِكَ تَخْف۪يفٌ مِنْ رَبِّكُمْ وَرَحْمَةٌۜ فَمَنِ اعْتَدٰى بَعْدَ ذٰلِكَ فَلَهُ عَذَابٌ اَل۪يمٌ178
ऐ ईमान लानेवालो! मारे जानेवालों के विषय में हत्यादंड (क़िसास) तुमपर अनिवार्य किया गया, स्वतंत्र-स्वतंत्र बराबर है और ग़़ुलाम-ग़ुलाम बराबर है और औरत-औरत बराबर है। फिर यदि किसी को उसके भाई की ओर से कुछ छूट मिल जाए तो सामान्य रीति का पालन करना चाहिए; और भले तरीके से उसे अदा करना चाहिए। यह तुम्हारें रब की ओर से एक छूट और दयालुता है। फिर इसके बाद भो जो ज़्यादती करे तो उसके लिए दुखद यातना है
وَلَكُمْ فِي الْقِصَاصِ حَيٰوةٌ يَٓا اُو۬لِي الْاَلْبَابِ لَعَلَّكُمْ تَتَّقُونَ179
ऐ बुद्धि और समझवालों! तुम्हारे लिए हत्यादंड (क़िसास) में जीवन है, ताकि तुम बचो
كُتِبَ عَلَيْكُمْ اِذَا حَضَرَ اَحَدَكُمُ الْمَوْتُ اِنْ تَرَكَ خَيْرًاۚ اَلْوَصِيَّةُ لِلْوَالِدَيْنِ وَالْاَقْرَب۪ينَ بِالْمَعْرُوفِۚ حَقًّا عَلَى الْمُتَّق۪ينَۜ180
जब तुममें से किसी की मृत्यु का समय आ जाए, यदि वह कुछ माल छोड़ रहा हो, तो माँ-बाप और नातेदारों को भलाई की वसीयत करना तुमपर अनिवार्य किया गया। यह हक़ है डर रखनेवालों पर
فَمَنْ بَدَّلَهُ بَعْدَ مَا سَمِعَهُ فَاِنَّمَٓا اِثْمُهُ عَلَى الَّذ۪ينَ يُبَدِّلُونَهُۜ اِنَّ اللّٰهَ سَم۪يعٌ عَل۪يمٌۜ181
तो जो कोई उसके सुनने के पश्चात उसे बदल डाले तो उसका गुनाह उन्हीं लोगों पर होगा जो इसे बदलेंगे। निस्संदेह अल्लाह सब कुछ सुननेवाला और जाननेवाला है