271. पृष्ठ - कुरान पढ़ें

271. पृष्ठ
16 · अन-नहल
وَقَالَ الَّذ۪ينَ اَشْرَكُوا لَوْ شَٓاءَ اللّٰهُ مَا عَبَدْنَا مِنْ دُونِه۪ مِنْ شَيْءٍ نَحْنُ وَلَٓا اٰبَٓاؤُ۬نَا وَلَا حَرَّمْنَا مِنْ دُونِه۪ مِنْ شَيْءٍۜ كَذٰلِكَ فَعَلَ الَّذ۪ينَ مِنْ قَبْلِهِمْۚ فَهَلْ عَلَى الرُّسُلِ اِلَّا الْبَلَاغُ الْمُب۪ينُ35
शिर्क करनेवालों का कहना है, "यदि अल्लाह चाहता तो उससे हटकर किसी चीज़ की न हम बन्दगी करते और न हमारे बाप-दादा ही और न हम उसके बिना किसी चीज़ को अवैध ठहराते।" उनसे पहले के लोगों ने भी ऐसा ही किया। तो क्या साफ़-साफ़ सन्देश पहुँचा देने के सिवा रसूलों पर कोई और भी ज़िम्मेदारी है?
وَلَقَدْ بَعَثْنَا ف۪ي كُلِّ اُمَّةٍ رَسُولًا اَنِ اعْبُدُوا اللّٰهَ وَاجْتَنِبُوا الطَّاغُوتَۚ فَمِنْهُمْ مَنْ هَدَى اللّٰهُ وَمِنْهُمْ مَنْ حَقَّتْ عَلَيْهِ الضَّلَالَةُۜ فَس۪يرُوا فِي الْاَرْضِ فَانْظُرُوا كَيْفَ كَانَ عَاقِبَةُ الْمُكَذِّب۪ينَ36
हमने हर समुदाय में कोई न कोई रसूल भेजा कि "अल्लाह की बन्दगी करो और ताग़ूत से बचो।" फिर उनमें से किसी को तो अल्लाह ने सीधे मार्ग पर लगाया और उनमें से किसी पर पथभ्रष्ट सिद्ध होकर रही। फिर तनिक धरती में चल-फिरकर तो देखो कि झुठलानेवालों का कैसा परिणाम हुआ
اِنْ تَحْرِصْ عَلٰى هُدٰيهُمْ فَاِنَّ اللّٰهَ لَا يَهْد۪ي مَنْ يُضِلُّ وَمَا لَهُمْ مِنْ نَاصِر۪ينَ37
यद्यपि इस बात का कि वे राह पर आ जाएँ तुम्हें लालच ही क्यों न हो, किन्तु अल्लाह जिसे भटका देता है, उसे वह मार्ग नहीं दिखाया करता और ऐसे लोगों का कोई सहायक भी नहीं होता
وَاَقْسَمُوا بِاللّٰهِ جَهْدَ اَيْمَانِهِمْۙ لَا يَبْعَثُ اللّٰهُ مَنْ يَمُوتُۜ بَلٰى وَعْدًا عَلَيْهِ حَقًّا وَلٰكِنَّ اَكْثَرَ النَّاسِ لَا يَعْلَمُونَۙ38
उन्होंने अल्लाह की कड़ी-कड़ी क़समें खाकर कहा, "जो मर जाता है उसे अल्लाह नहीं उठाएगा।" क्यों नहीं? यह तो एक वादा है, जिसे पूरा करना उसके लिए अनिवार्य है - किन्तु अधिकतर लोग जानते नहीं। -
لِيُبَيِّنَ لَهُمُ الَّذ۪ي يَخْتَلِفُونَ ف۪يهِ وَلِيَعْلَمَ الَّذ۪ينَ كَفَرُٓوا اَنَّهُمْ كَانُوا كَاذِب۪ينَ39
ताकि वह उनपर उसको स्पष्ट। कर दे, जिसके विषय में वे विभेद करते है और इसलिए भी कि इनकार करनेवाले जान लें कि वे झूठे थे
اِنَّمَا قَوْلُنَا لِشَيْءٍ اِذَٓا اَرَدْنَاهُ اَنْ نَقُولَ لَهُ كُنْ فَيَكُونُ۟40
किसी चीज़ के लिए जब हम उसका इरादा करते है तो हमारा कहना बस यही होता है कि उससे कहते है, "हो जा!" और वह हो जाती है
وَالَّذ۪ينَ هَاجَرُوا فِي اللّٰهِ مِنْ بَعْدِ مَا ظُلِمُوا لَنُبَوِّئَنَّهُمْ فِي الدُّنْيَا حَسَنَةًۜ وَلَاَجْرُ الْاٰخِرَةِ اَكْبَرُۢ لَوْ كَانُوا يَعْلَمُونَۙ41
और जिन लोगों ने इसके पश्चात कि उनपर ज़ुल्म ढाया गया था अल्लाह के लिए घर-बार छोड़ा उन्हें हम दुनिया में भी अच्छा ठिकाना देंगे और आख़िरत का प्रतिदान तो बहुत बड़ा है। क्या ही अच्छा होता कि वे जानते
اَلَّذ۪ينَ صَبَرُوا وَعَلٰى رَبِّهِمْ يَتَوَكَّلُونَ42
ये वे लोग है जो जमे रहे और वे अपने रब पर भरोसा रखते है