273. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
16 · अन-नहल
لِيَكْفُرُوا بِمَٓا اٰتَيْنَاهُمْۜ فَتَمَتَّعُوا۠ فَسَوْفَ تَعْلَمُونَ55
कि परिणामस्वरूप जो कुछ हमने उन्हें दिया है उसके प्रति कृतघ्नता दिखलाएँ। अच्छा, कुछ मज़े ले लो, शीघ्र ही तुम्हें मालूम हो जाएगा
وَيَجْعَلُونَ لِمَا لَا يَعْلَمُونَ نَص۪يبًا مِمَّا رَزَقْنَاهُمْۜ تَاللّٰهِ لَتُسْـَٔلُنَّ عَمَّا كُنْتُمْ تَفْتَرُونَ56
हमने उन्हें जो आजीविका प्रदान की है उसमें वे उसका हिस्सा लगाते है जिन्हें वे जानते भी नहीं। अल्लाह की सौगंध! तुम जो झूठ घड़ते हो उसके विषय में तुमसे अवश्य पूछा जाएगा
وَيَجْعَلُونَ لِلّٰهِ الْبَنَاتِ سُبْحَانَهُۙ وَلَهُمْ مَا يَشْتَهُونَ57
और वे अल्लाह के लिए बेटियाँ ठहराते है - महान और उच्च है वह - और अपने लिए वह, जो वे चाहें
وَاِذَا بُشِّرَ اَحَدُهُمْ بِالْاُنْثٰى ظَلَّ وَجْهُهُ مُسْوَدًّا وَهُوَ كَظ۪يمٌۚ58
और जब उनमें से किसी को बेटी की शुभ सूचना मिलती है तो उसके चहरे पर कलौंस छा जाती है और वह घुटा-घुटा रहता है
يَتَوَارٰى مِنَ الْقَوْمِ مِنْ سُٓوءِ مَا بُشِّرَ بِه۪ۜ اَيُمْسِكُهُ عَلٰى هُونٍ اَمْ يَدُسُّهُ فِي التُّرَابِۜ اَلَا سَٓاءَ مَا يَحْكُمُونَ59
जो शुभ सूचना उसे दी गई वह (उसकी दृष्टि में) ऐसी बुराई की बात हुई जो उसके कारण वह लोगों से छिपता फिरता है कि अपमान सहन करके उसे रहने दे या उसे मिट्टी में दबा दे। देखो, कितना बुरा फ़ैसला है जो वे करते है!
لِلَّذ۪ينَ لَا يُؤْمِنُونَ بِالْاٰخِرَةِ مَثَلُ السَّوْءِۚ وَلِلّٰهِ الْمَثَلُ الْاَعْلٰىۜ وَهُوَ الْعَز۪يزُ الْحَك۪يمُ۟60
जो लोग आख़िरत को नहीं मानते बुरी मिसाल है उनकी। रहा अल्लाह, तो उसकी मिसाल अत्यन्त उच्च है। वह तो प्रभुत्वशाली, तत्वदर्शी है
وَلَوْ يُؤَاخِذُ اللّٰهُ النَّاسَ بِظُلْمِهِمْ مَا تَرَكَ عَلَيْهَا مِنْ دَٓابَّةٍ وَلٰكِنْ يُؤَخِّرُهُمْ اِلٰٓى اَجَلٍ مُسَمًّىۚ فَاِذَا جَٓاءَ اَجَلُهُمْ لَا يَسْتَاْخِرُونَ سَاعَةً وَلَا يَسْتَقْدِمُونَ61
यदि अल्लाह लोगों को उनके अत्याचार पर पकड़ने ही लग जाता तो धरती पर किसी जीवधारी को न छोड़ता, किन्तु वह उन्हें एक निश्चित समय तक टाले जाता है। फिर जब उनका नियत समय आ जाता है तो वे न तो एक घड़ी पीछे हट सकते है और न आगे बढ़ सकते है
وَيَجْعَلُونَ لِلّٰهِ مَا يَكْرَهُونَ وَتَصِفُ اَلْسِنَتُهُمُ الْكَذِبَ اَنَّ لَهُمُ الْحُسْنٰىۜ لَا جَرَمَ اَنَّ لَهُمُ النَّارَ وَاَنَّهُمْ مُفْرَطُونَ62
वे अल्लाह के लिए वह कुछ ठहराते है, जिसे ख़ुद अपने लिए नापसन्द करते है और उनकी ज़बाने झूठ कहती है कि उनके लिए अच्छा परिणाम है। निस्संदेह उनके लिए आग है और वे उसी में पड़े छोड़ दिए जाएँगे
تَاللّٰهِ لَقَدْ اَرْسَلْنَٓا اِلٰٓى اُمَمٍ مِنْ قَبْلِكَ فَزَيَّنَ لَهُمُ الشَّيْطَانُ اَعْمَالَهُمْ فَهُوَ وَلِيُّهُمُ الْيَوْمَ وَلَهُمْ عَذَابٌ اَل۪يمٌ63
अल्लाह की सौगंध! हम तुमसे पहले भी कितने समुदायों की ओर रसूल भेज चुके है, किन्तु शैतान ने उनकी करतूतों को उनके लिए सुहावना बना दिया। तो वही आज भी उनका संरक्षक है। उनके लिए तो एक दुखद यातना है
وَمَٓا اَنْزَلْنَا عَلَيْكَ الْكِتَابَ اِلَّا لِتُبَيِّنَ لَهُمُ الَّذِي اخْتَلَفُوا ف۪يهِۙ وَهُدًى وَرَحْمَةً لِقَوْمٍ يُؤْمِنُونَ64
हमने यह किताब तुमपर इसीलिए अवतरित की है कि जिसमें वे विभेद कर रहे है उसे तुम उनपर स्पष्टा कर दो और यह मार्गदर्शन और दयालुता है उन लोगों के लिए जो ईमान लाएँ