274. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
16 · अन-नहल
وَاللّٰهُ اَنْزَلَ مِنَ السَّمَٓاءِ مَٓاءً فَاَحْيَا بِهِ الْاَرْضَ بَعْدَ مَوْتِهَاۜ اِنَّ ف۪ي ذٰلِكَ لَاٰيَةً لِقَوْمٍ يَسْمَعُونَ۟65
और अल्लाह ही ने आकाश से पानी बरसाया। फिर उसके द्वारा धरती को उसके मृत हो जाने के पश्चात जीवित किया। निश्चय ही इसमें उन लोगों के लिए बड़ी निशानी है जो सुनते है
وَاِنَّ لَكُمْ فِي الْاَنْعَامِ لَعِبْرَةًۜ نُسْق۪يكُمْ مِمَّا ف۪ي بُطُونِه۪ مِنْ بَيْنِ فَرْثٍ وَدَمٍ لَبَنًا خَالِصًا سَٓائِغًا لِلشَّارِب۪ينَ66
और तुम्हारे लिए चौपायों में से एक बड़ी शिक्षा-सामग्री है, जो कुछ उनके पेटों में है उसमें से गोबर और रक्त से मध्य से हम तुम्हे विशुद्ध दूध पिलाते है, जो पीनेवालों के लिए अत्यन्त प्रिय है,
وَمِنْ ثَمَرَاتِ النَّخ۪يلِ وَالْاَعْنَابِ تَتَّخِذُونَ مِنْهُ سَكَرًا وَرِزْقًا حَسَنًاۜ اِنَّ ف۪ي ذٰلِكَ لَاٰيَةً لِقَوْمٍ يَعْقِلُونَ67
और खजूरों और अंगूरों के फलों से भी, जिससे तुम मादक चीज़ भी तैयार कर लेते हो और अच्छी रोज़ी भी। निश्चय ही इसमें बुद्धि से काम लेनेवाले लोगों के लिए एक बड़ी निशानी है
وَاَوْحٰى رَبُّكَ اِلَى النَّحْلِ اَنِ اتَّخِذ۪ي مِنَ الْجِبَالِ بُيُوتًا وَمِنَ الشَّجَرِ وَمِمَّا يَعْرِشُونَۙ68
और तुम्हारे रब ने मुधमक्खी के जी में यह बात डाल दी कि "पहाड़ों में और वृक्षों में और लोगों के बनाए हुए छत्रों में घर बना
ثُمَّ كُل۪ي مِنْ كُلِّ الثَّمَرَاتِ فَاسْلُك۪ي سُبُلَ رَبِّكِ ذُلُلًاۜ يَخْرُجُ مِنْ بُطُونِهَا شَرَابٌ مُخْتَلِفٌ اَلْوَانُهُ ف۪يهِ شِفَٓاءٌ لِلنَّاسِۜ اِنَّ ف۪ي ذٰلِكَ لَاٰيَةً لِقَوْمٍ يَتَفَكَّرُونَ69
फिर हर प्रकार के फल-फूलों से ख़ुराक ले और अपने रब के समतम मार्गों पर चलती रह।" उसके पेट से विभिन्न रंग का एक पेय निकलता है, जिसमें लोगों के लिए आरोग्य है। निश्चय ही सोच-विचार करनेवाले लोगों के लिए इसमें एक बड़ी निशानी है
وَاللّٰهُ خَلَقَكُمْ ثُمَّ يَتَوَفّٰيكُمْ وَمِنْكُمْ مَنْ يُرَدُّ اِلٰٓى اَرْذَلِ الْعُمُرِ لِكَيْ لَا يَعْلَمَ بَعْدَ عِلْمٍ شَيْـًٔاۜ اِنَّ اللّٰهَ عَل۪يمٌ قَد۪يرٌ۟70
अल्लाह ने तुम्हें पैदा किया। फिर वह तुम्हारी आत्माओं को ग्रस्त कर लेता है और तुममें से कोई (बुढापे की) निकृष्ट तम अवस्था की ओर फिर जाता है, कि (परिणामस्वरूप) जानने के पश्चात फिर वह कुछ न जाने। निस्संदेह अल्लाह सर्वज्ञ, बड़ा सामर्थ्यवान है
وَاللّٰهُ فَضَّلَ بَعْضَكُمْ عَلٰى بَعْضٍ فِي الرِّزْقِۚ فَمَا الَّذ۪ينَ فُضِّلُوا بِرَٓادّ۪ي رِزْقِهِمْ عَلٰى مَا مَلَكَتْ اَيْمَانُهُمْ فَهُمْ ف۪يهِ سَوَٓاءٌۜ اَفَبِنِعْمَةِ اللّٰهِ يَجْحَدُونَ71
और अल्लाह ने तुममें से किसी को किसी पर रोज़ी में बड़ाई दी है। किन्तु जिनको बड़ाई दी गई है वे ऐसे नहीं है कि अपनी रोज़ी उनकी ओर फेर दिया करते हों, जो उनके क़ब्ज़े में है कि वे सब इसमें बराबर हो जाएँ। फिर क्या अल्लाह के अनुग्रह का उन्हें इनकार है?
وَاللّٰهُ جَعَلَ لَكُمْ مِنْ اَنْفُسِكُمْ اَزْوَاجًا وَجَعَلَ لَكُمْ مِنْ اَزْوَاجِكُمْ بَن۪ينَ وَحَفَدَةً وَرَزَقَكُمْ مِنَ الطَّيِّبَاتِۜ اَفَبِالْبَاطِلِ يُؤْمِنُونَ وَبِنِعْمَتِ اللّٰهِ هُمْ يَكْفُرُونَۙ72
और अल्लाह ही ने तुम्हारे लिए तुम्हारी सहजाति पत्नियों बनाई और तुम्हारी पत्नियों से तुम्हारे लिए पुत्र और पौत्र पैदा किए और तुम्हे अच्छी पाक चीज़ों की रोज़ी प्रदान की; तो क्या वे मिथ्या को मानते है और अल्लाह के अनुग्रह ही का उन्हें इनकार है?