277. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
16 · अन-नहल
اَلَّذ۪ينَ كَفَرُوا وَصَدُّوا عَنْ سَب۪يلِ اللّٰهِ زِدْنَاهُمْ عَذَابًا فَوْقَ الْعَذَابِ بِمَا كَانُوا يُفْسِدُونَ88
जिन लोगों ने इनकार किया और अल्लाह के मार्ग से रोका उनके लिए हम यातना पर यातना बढ़ाते रहेंगे, उस बिगाड़ के बदले में जो वे पैदा करते रहे
وَيَوْمَ نَبْعَثُ ف۪ي كُلِّ اُمَّةٍ شَه۪يدًا عَلَيْهِمْ مِنْ اَنْفُسِهِمْ وَجِئْنَا بِكَ شَه۪يدًا عَلٰى هٰٓؤُ۬لَٓاءِۜ وَنَزَّلْنَا عَلَيْكَ الْكِتَابَ تِبْيَانًا لِكُلِّ شَيْءٍ وَهُدًى وَرَحْمَةً وَبُشْرٰى لِلْمُسْلِم۪ينَ۟89
और उस समय को याद करो जब हम हर समुदाय में स्वयं उसके अपने लोगों में से एक गवाह उनपर नियुक्त करके भेज रहे थे और (इसी रीति के अनुसार) तुम्हें इन लोगों पर गवाह नियुक्त करके लाए। हमने तुमपर किताब अवतरित की हर चीज़ को खोलकर बयान करने के लिए और मुस्लिम (आज्ञाकारियों) के लिए मार्गदर्शन, दयालुता और शुभ सूचना के रूप में
اِنَّ اللّٰهَ يَاْمُرُ بِالْعَدْلِ وَالْاِحْسَانِ وَا۪يتَٓائِ ذِي الْقُرْبٰى وَيَنْهٰى عَنِ الْفَحْشَٓاءِ وَالْمُنْكَرِ وَالْبَغْيِۚ يَعِظُكُمْ لَعَلَّكُمْ تَذَكَّرُونَ90
निश्चय ही अल्लाह न्याय का और भलाई का और नातेदारों को (उनके हक़) देने का आदेश देता है और अश्लीलता, बुराई और सरकशी से रोकता है। वह तुम्हें नसीहत करता है, ताकि तुम ध्यान दो
وَاَوْفُوا بِعَهْدِ اللّٰهِ اِذَا عَاهَدْتُمْ وَلَا تَنْقُضُوا الْاَيْمَانَ بَعْدَ تَوْك۪يدِهَا وَقَدْ جَعَلْتُمُ اللّٰهَ عَلَيْكُمْ كَف۪يلًاۜ اِنَّ اللّٰهَ يَعْلَمُ مَا تَفْعَلُونَ91
अल्लाह के साथ की हुई प्रतिज्ञा को पूरा करो, जबकि तुमने प्रतिज्ञा की हो। और अपनी क़समों को उन्हें सुदृढ़ करने के पश्चात मत तोड़ो, जबकि तुम अपने ऊपर अल्लाह को अपना ज़ामिन बना चुके हो। निश्चय ही अल्लाह जानता है जो कुछ तुम करते हो
وَلَا تَكُونُوا كَالَّت۪ي نَقَضَتْ غَزْلَهَا مِنْ بَعْدِ قُوَّةٍ اَنْكَاثًاۜ تَتَّخِذُونَ اَيْمَانَكُمْ دَخَلًا بَيْنَكُمْ اَنْ تَكُونَ اُمَّةٌ هِيَ اَرْبٰى مِنْ اُمَّةٍۜ اِنَّمَا يَبْلُوكُمُ اللّٰهُ بِه۪ۜ وَلَيُبَيِّنَنَّ لَكُمْ يَوْمَ الْقِيٰمَةِ مَا كُنْتُمْ ف۪يهِ تَخْتَلِفُونَ92
तुम उस स्त्री की भाँति न हो जाओ जिसने अपना सूत मेहनत से कातने के पश्चात टुकड़-टुकड़े करके रख दिया। तुम अपनी क़समों को परस्पर हस्तक्षेप करने का बहाना बनाने लगो इस ध्येय से कहीं ऐसा न हो कि एक गिरोह दूसरे गिरोह से बढ़ जाए। बात केवल यह है कि अल्लाह इस प्रतिज्ञा के द्वारा तुम्हारी परीक्षा लेता है और जिस बात में तुम विभेद करते हो उसकी वास्तविकता तो वह क़ियामत के दिन अवश्य ही तुम पर खोल देगा
وَلَوْ شَٓاءَ اللّٰهُ لَجَعَلَكُمْ اُمَّةً وَاحِدَةً وَلٰكِنْ يُضِلُّ مَنْ يَشَٓاءُ وَيَهْد۪ي مَنْ يَشَٓاءُۜ وَلَتُسْـَٔلُنَّ عَمَّا كُنْتُمْ تَعْمَلُونَ93
यदि अल्लाह चाहता तो तुम सबको एक ही समुदाय बना देता, परन्तु वह जिसे चाहता है गुमराही में छोड़ देता है और जिसे चाहता है सीधा मार्ग दिखाता है। तुम जो कुछ भी करते हो उसके विषय में तो तुमसे अवश्य पूछा जाएगा