279. पृष्ठ - कुरान पढ़ें

279. पृष्ठ
16 · अन-नहल
وَلَقَدْ نَعْلَمُ اَنَّهُمْ يَقُولُونَ اِنَّمَا يُعَلِّمُهُ بَشَرٌۜ لِسَانُ الَّذ۪ي يُلْحِدُونَ اِلَيْهِ اَعْجَمِيٌّ وَهٰذَا لِسَانٌ عَرَبِيٌّ مُب۪ينٌ103
हमें मालूम है कि वे कहते है, "उसको तो बस एक आदमी सिखाता पढ़ाता है।" हालाँकि जिसकी ओर वे संकेत करते है उसकी भाषा विदेशी है और यह स्पष्ट अरबी भाषा है
اِنَّ الَّذ۪ينَ لَا يُؤْمِنُونَ بِاٰيَاتِ اللّٰهِۙ لَا يَهْد۪يهِمُ اللّٰهُ وَلَهُمْ عَذَابٌ اَل۪يمٌ104
सच्ची बात यह है कि जो लोग अल्लाह की आयतों को नहीं मानते, अल्लाह उनका मार्गदर्शन नहीं करता। उनके लिए तो एक दुखद यातना है
اِنَّمَا يَفْتَرِي الْكَذِبَ الَّذ۪ينَ لَا يُؤْمِنُونَ بِاٰيَاتِ اللّٰهِۚ وَاُو۬لٰٓئِكَ هُمُ الْكَاذِبُونَ105
झूठ तो बस वही लोग घड़ते है जो अल्लाह की आयतों को मानते नहीं और वही है जो झूठे है
مَنْ كَفَرَ بِاللّٰهِ مِنْ بَعْدِ ا۪يمَانِه۪ٓ اِلَّا مَنْ اُكْرِهَ وَقَلْبُهُ مُطْمَئِنٌّ بِالْا۪يمَانِ وَلٰكِنْ مَنْ شَرَحَ بِالْكُفْرِ صَدْرًا فَعَلَيْهِمْ غَضَبٌ مِنَ اللّٰهِۚ وَلَهُمْ عَذَابٌ عَظ۪يمٌ106
जिस किसी ने अपने ईमान के पश्चात अल्लाह के साथ कुफ़्र किया -सिवाय उसके जो इसके लिए विवश कर दिया गया हो और दिल उसका ईमान पर सन्तुष्ट हो - बल्कि वह जिसने सीना कुफ़्र के लिए खोल दिया हो, तो ऐसे लोगो पर अल्लाह का प्रकोप है और उनके लिए बड़ी यातना है
ذٰلِكَ بِاَنَّهُمُ اسْتَحَبُّوا الْحَيٰوةَ الدُّنْيَا عَلَى الْاٰخِرَةِۙ وَاَنَّ اللّٰهَ لَا يَهْدِي الْقَوْمَ الْكَافِر۪ينَ107
यह इसलिए कि उन्होंने आख़िरत की अपेक्षा सांसारिक जीवन को पसन्द किया और यह कि अल्लाह कुफ़्र करनेवालो लोगों का मार्गदर्शन नहीं करता
اُو۬لٰٓئِكَ الَّذ۪ينَ طَبَعَ اللّٰهُ عَلٰى قُلُوبِهِمْ وَسَمْعِهِمْ وَاَبْصَارِهِمْۚ وَاُو۬لٰٓئِكَ هُمُ الْغَافِلُونَ108
वही लोग है जिनके दिलों और जिनके कानों और जिनकी आँखों पर अल्लाह ने मुहर लगा दी है; और वही है जो ग़फ़लत में पड़े हुए है
لَا جَرَمَ اَنَّهُمْ فِي الْاٰخِرَةِ هُمُ الْخَاسِرُونَ109
निश्चय ही आख़िरत में वही घाटे में रहेंगे
ثُمَّ اِنَّ رَبَّكَ لِلَّذ۪ينَ هَاجَرُوا مِنْ بَعْدِ مَا فُتِنُوا ثُمَّ جَاهَدُوا وَصَبَرُٓواۙ اِنَّ رَبَّكَ مِنْ بَعْدِهَا لَغَفُورٌ رَح۪يمٌ۟110
फिर तुम्हारा रब उन लोगों के लिए जिन्होंने इसके उपरान्त कि वे आज़माइश में पड़ चुके थे घर-बार छोड़ा, फिर जिहाद (संघर्ष) किया और जमे रहे तो इन बातों के पश्चात तो निश्चय ही तुम्हारा रब बड़ा क्षमाशील, अत्यन्त दयावान है