281. पृष्ठ - कुरान पढ़ें

281. पृष्ठ
16 · अन-नहल
ثُمَّ اِنَّ رَبَّكَ لِلَّذ۪ينَ عَمِلُوا السُّٓوءَ بِجَهَالَةٍ ثُمَّ تَابُوا مِنْ بَعْدِ ذٰلِكَ وَاَصْلَحُٓواۙ اِنَّ رَبَّكَ مِنْ بَعْدِهَا لَغَفُورٌ رَح۪يمٌ۟119
फिर तुम्हारा रब उनके लिए जिन्होंने अज्ञानवश बुरा कर्म किया, फिर इसके बाद तौबा करके सुधार कर लिया, तो निश्चय ही तुम्हारा रब इसके पश्चात बड़ा क्षमाशील, अत्यन्त दयावान है
اِنَّ اِبْرٰه۪يمَ كَانَ اُمَّةً قَانِتًا لِلّٰهِ حَن۪يفًاۜ وَلَمْ يَكُ مِنَ الْمُشْرِك۪ينَۙ120
निश्चय ही इबराहीम की स्थिति एक समुदाय की थी। वह अल्लाह का आज्ञाकारी और उसकी ओर एकाग्र था। वह कोई बहुदेववादी न था
شَاكِرًا لِاَنْعُمِهِۜ اِجْتَبٰيهُ وَهَدٰيهُ اِلٰى صِرَاطٍ مُسْتَق۪يمٍ121
वह उसके (अल्लाह के) उदार अनुग्रहों के प्रति कृतज्ञता दिखलानेवाला था। अल्लाह ने उसे चुन लिया और उसे सीधे मार्ग पर चलाया
وَاٰتَيْنَاهُ فِي الدُّنْيَا حَسَنَةًۜ وَاِنَّهُ فِي الْاٰخِرَةِ لَمِنَ الصَّالِح۪ينَۜ122
और हमने उसे दुनिया में भी भलाई दी और आख़िरत में भी वह अच्छे पूर्णकाम लोगों मे से होगा
ثُمَّ اَوْحَيْنَٓا اِلَيْكَ اَنِ اتَّبِعْ مِلَّةَ اِبْرٰه۪يمَ حَن۪يفًاۜ وَمَا كَانَ مِنَ الْمُشْرِك۪ينَ123
फिर अब हमने तुम्हारी ओर प्रकाशना की, "इबराहीम के तरीक़े पर चलो, जो बिलकुल एक ओर का हो गया था और बहुदेववादियों में से न था।"
اِنَّمَا جُعِلَ السَّبْتُ عَلَى الَّذ۪ينَ اخْتَلَفُوا ف۪يهِۜ وَاِنَّ رَبَّكَ لَيَحْكُمُ بَيْنَهُمْ يَوْمَ الْقِيٰمَةِ ف۪يمَا كَانُوا ف۪يهِ يَخْتَلِفُونَ124
'सब्त' तो केवल उन लोगों पर लागू हुआ था जिन्होंने उसके विषय में विभेद किया था। निश्चय ही तुम्हारा रब उनके बीच क़ियामत के दिन उसका फ़ैसला कर देगा, जिसमें वे विभेद करते रहे है
اُدْعُ اِلٰى سَب۪يلِ رَبِّكَ بِالْحِكْمَةِ وَالْمَوْعِظَةِ الْحَسَنَةِ وَجَادِلْهُمْ بِالَّت۪ي هِيَ اَحْسَنُۜ اِنَّ رَبَّكَ هُوَ اَعْلَمُ بِمَنْ ضَلَّ عَنْ سَب۪يلِه۪ وَهُوَ اَعْلَمُ بِالْمُهْتَد۪ينَ125
अपने रब के मार्ग की ओर तत्वदर्शिता और सदुपदेश के साथ बुलाओ और उनसे ऐसे ढंग से वाद विवाद करो जो उत्तम हो। तुम्हारा रब उसे भली-भाँति जानता है जो उसके मार्ग से भटक गया और वह उन्हें भी भली-भाँति जानता है जो मार्ग पर है
وَاِنْ عَاقَبْتُمْ فَعَاقِبُوا بِمِثْلِ مَا عُوقِبْتُمْ بِه۪ۜ وَلَئِنْ صَبَرْتُمْ لَهُوَ خَيْرٌ لِلصَّابِر۪ينَ126
और यदि तुम बदला लो तो उतना ही जितना तुम्हें कष्ट पहुँचा हो, किन्तु यदि तुम सब्र करो तो निश्चय ही यह सब्र करनेवालों के लिए ज़्यादा अच्छा है
وَاصْبِرْ وَمَا صَبْرُكَ اِلَّا بِاللّٰهِ وَلَا تَحْزَنْ عَلَيْهِمْ وَلَا تَكُ ف۪ي ضَيْقٍ مِمَّا يَمْكُرُونَ127
सब्र से काम लो - और तुम्हारा सब्र अल्लाह ही से सम्बद्ध है - और उन पर दुखी न हो और न उससे दिल तंग हो जो चालें वे चलते है
اِنَّ اللّٰهَ مَعَ الَّذ۪ينَ اتَّقَوْا وَالَّذ۪ينَ هُمْ مُحْسِنُونَ128
निश्चय ही, अल्लाह उनके साथ है जो डर रखते है और जो उत्तमकार है