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282. पृष्ठ
17 · अल-इसरा
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِيمِ
سُبْحَانَ الَّذ۪ٓي اَسْرٰى بِعَبْدِه۪ لَيْلًا مِنَ الْمَسْجِدِ الْحَرَامِ اِلَى الْمَسْجِدِ الْاَقْصَا الَّذ۪ي بَارَكْنَا حَوْلَهُ لِنُرِيَهُ مِنْ اٰيَاتِنَاۜ اِنَّهُ هُوَ السَّم۪يعُ الْبَص۪يرُ1
क्या ही महिमावान है वह जो रातों-रात अपने बन्दे (मुहम्मद) को प्रतिष्ठित मस्जिद (काबा) से दूरवर्ती मस्जिद (अक़्सा) तक ले गया, जिसके चतुर्दिक को हमने बरकत दी, ताकि हम उसे अपनी कुछ निशानियाँ दिखाएँ। निस्संदेह वही सब कुछ सुनता, देखता है
وَاٰتَيْنَا مُوسَى الْكِتَابَ وَجَعَلْنَاهُ هُدًى لِبَن۪ٓي اِسْرَٓاء۪يلَ اَلَّا تَتَّخِذُوا مِنْ دُون۪ي وَك۪يلًاۜ2
हमने मूसा को किताब दी थी और उसे इसराईल की सन्तान के लिए मार्गदर्शन बनाया था कि "हमारे सिवा किसी को कार्य-साधक न ठहराना।"
ذُرِّيَّةَ مَنْ حَمَلْنَا مَعَ نُوحٍۜ اِنَّهُ كَانَ عَبْدًا شَكُورًا3
ऐ उनकी सन्तान, जिन्हें हमने नूह के साथ (नौका में) सवार किया था! निश्चय ही वह एक कृतज्ञ बन्दा था
وَقَضَيْنَٓا اِلٰى بَن۪ٓي اِسْرَٓاء۪يلَ فِي الْكِتَابِ لَتُفْسِدُنَّ فِي الْاَرْضِ مَرَّتَيْنِ وَلَتَعْلُنَّ عُلُوًّا كَب۪يرًا4
और हमने किताब में इसराईल की सन्तान को इस फ़ैसले की ख़बर दे दी थी, "तुम धरती में अवश्य दो बार बड़ा फ़साद मचाओगे और बड़ी सरकशी दिखाओगे।"
فَاِذَا جَٓاءَ وَعْدُ اُو۫لٰيهُمَا بَعَثْنَا عَلَيْكُمْ عِبَادًا لَنَٓا اُو۬ل۪ي بَاْسٍ شَد۪يدٍ فَجَاسُوا خِلَالَ الدِّيَارِۜ وَكَانَ وَعْدًا مَفْعُولًا5
फिर जब उन दोनों में से पहले वादे का मौक़ा आ गया तो हमने तुम्हारे मुक़ाबले में अपने ऐसे बन्दों को उठाया जो युद्ध में बड़े बलशाली थे। तो वे बस्तियों में घुसकर हर ओर फैल गए और यह वादा पूरा होना ही था
ثُمَّ رَدَدْنَا لَكُمُ الْكَرَّةَ عَلَيْهِمْ وَاَمْدَدْنَاكُمْ بِاَمْوَالٍ وَبَن۪ينَ وَجَعَلْنَاكُمْ اَكْثَرَ نَف۪يرًا6
फिर हमने तुम्हारी बारी उनपर लौटाई कि उनपर प्रभावी हो सको। और धनों और पुत्रों से तुम्हारी सहायता की और तुम्हें बहुसंख्यक लोगों का एक जत्था बनाया
اِنْ اَحْسَنْتُمْ اَحْسَنْتُمْ لِاَنْفُسِكُمْ وَاِنْ اَسَاْتُمْ فَلَهَاۜ فَاِذَا جَٓاءَ وَعْدُ الْاٰخِرَةِ لِيَسُٓؤُ۫ا وُجُوهَكُمْ وَلِيَدْخُلُوا الْمَسْجِدَ كَمَا دَخَلُوهُ اَوَّلَ مَرَّةٍ وَلِيُتَبِّرُوا مَا عَلَوْا تَتْب۪يرًا7
"यदि तुमने भलाई की तो अपने ही लिए भलाई की और यदि तुमने बुराई की तो अपने ही लिए की।" फिर जब दूसरे वादे का मौक़ा आ गया (तो हमने तुम्हारे मुक़ाबले में ऐसे प्रबल को उठाया) कि वे तुम्हारे चेहरे बिगाड़ दें और मस्जिद (बैतुलमक़दिस) में घुसे थे और ताकि जिस चीज़ पर भी उनका ज़ोर चले विनष्टि कर डालें