284. पृष्ठ - कुरान पढ़ें

284. पृष्ठ
17 · अल-इसरा
مَنْ كَانَ يُر۪يدُ الْعَاجِلَةَ عَجَّلْنَا لَهُ ف۪يهَا مَا نَشَٓاءُ لِمَنْ نُر۪يدُ ثُمَّ جَعَلْنَا لَهُ جَهَنَّمَۚ يَصْلٰيهَا مَذْمُومًا مَدْحُورًا18
जो कोई शीघ्र प्राप्त, होनेवाली को चाहता है उसके लिए हम उसी में जो कुछ किसी के लिए चाहते है शीघ्र प्रदान कर देते है। फिर उसके लिए हमने जहन्नम तैयार कर रखा है जिसमें वह अपयशग्रस्त और ठुकराया हुआ प्रवेश करेगा
وَمَنْ اَرَادَ الْاٰخِرَةَ وَسَعٰى لَهَا سَعْيَهَا وَهُوَ مُؤْمِنٌ فَاُو۬لٰٓئِكَ كَانَ سَعْيُهُمْ مَشْكُورًا19
और जो आख़िरत चाहता हो और उसके लिए ऐसा प्रयास भी करे जैसा कि उसके लिए प्रयास करना चाहिए और वह हो मोमिन, तो ऐसे ही लोग है जिनके प्रयास की क़द्र की जाएगी
كُلًّا نُمِدُّ هٰٓؤُ۬لَٓاءِ وَهٰٓؤُ۬لَٓاءِ مِنْ عَطَٓاءِ رَبِّكَۜ وَمَا كَانَ عَطَٓاءُ رَبِّكَ مَحْظُورًا20
इन्हें भी और इनको भी, प्रत्येक को हम तुम्हारे रब की देन में से सहायता पहुँचाए जा रहे है, और तुम्हारे रब की देन बन्द नहीं है
اُنْظُرْ كَيْفَ فَضَّلْنَا بَعْضَهُمْ عَلٰى بَعْضٍۜ وَلَلْاٰخِرَةُ اَكْبَرُ دَرَجَاتٍ وَاَكْبَرُ تَفْض۪يلًا21
देखो, कैसे हमने उनके कुछ लोगों को कुछ के मुक़ाबले में आगे रखा है! और आख़िरत दर्जों की दृष्टि से सबसे बढ़कर है और श्रेष्ठ़ता की दृष्टि से भी वह सबसे बढ़-चढ़कर है
لَا تَجْعَلْ مَعَ اللّٰهِ اِلٰهًا اٰخَرَ فَتَقْعُدَ مَذْمُومًا مَخْذُولًا۟22
अल्लाह के साथ कोई दूसरा पूज्य-प्रभु न बनाओ अन्यथा निन्दित और असहाय होकर बैठे रह जाओगे
وَقَضٰى رَبُّكَ اَلَّا تَعْبُدُٓوا اِلَّٓا اِيَّاهُ وَبِالْوَالِدَيْنِ اِحْسَانًاۜ اِمَّا يَبْلُغَنَّ عِنْدَكَ الْكِبَرَ اَحَدُهُمَٓا اَوْ كِلَاهُمَا فَلَا تَقُلْ لَهُمَٓا اُفٍّ وَلَا تَنْهَرْهُمَا وَقُلْ لَهُمَا قَوْلًا كَر۪يمًا23
तुम्हारे रब ने फ़ैसला कर दिया है कि उसके सिवा किसी की बन्दगी न करो और माँ-बाप के साथ अच्छा व्यवहार करो। यदि उनमें से कोई एक या दोनों ही तुम्हारे सामने बुढ़ापे को पहुँच जाएँ तो उन्हें 'उँह' तक न कहो और न उन्हें झिझको, बल्कि उनसे शिष्टतापूर्वक बात करो
وَاخْفِضْ لَهُمَا جَنَاحَ الذُّلِّ مِنَ الرَّحْمَةِ وَقُلْ رَبِّ ارْحَمْهُمَا كَمَا رَبَّيَان۪ي صَغ۪يرًاۜ24
और उनके आगे दयालुता से नम्रता की भुजाएँ बिछाए रखो और कहो, "मेरे रब! जिस प्रकार उन्होंने बालकाल में मुझे पाला है, तू भी उनपर दया कर।"
رَبُّكُمْ اَعْلَمُ بِمَا ف۪ي نُفُوسِكُمْۜ اِنْ تَكُونُوا صَالِح۪ينَ فَاِنَّهُ كَانَ لِلْاَوَّاب۪ينَ غَفُورًا25
जो कुछ तुम्हारे जी में है उसे तुम्हारा रब भली-भाँति जानता है। यदि तुम सुयोग्य और अच्छे हुए तो निश्चय ही वह भी ऐसे रुजू करनेवालों के लिए बड़ा क्षमाशील है
وَاٰتِ ذَا الْقُرْبٰى حَقَّهُ وَالْمِسْك۪ينَ وَابْنَ السَّب۪يلِ وَلَا تُبَذِّرْ تَبْذ۪يرًا26
और नातेदार को उसका हक़ दो मुहताज और मुसाफ़िर को भी - और फुज़ूलख़र्ची न करो
اِنَّ الْمُبَذِّر۪ينَ كَانُٓوا اِخْوَانَ الشَّيَاط۪ينِۜ وَكَانَ الشَّيْطَانُ لِرَبِّه۪ كَفُورًا27
निश्चय ही फ़ु़ज़ूलख़र्ची करनेवाले शैतान के भाई है और शैतान अपने रब का बड़ा ही कृतघ्न है। -