286. पृष्ठ - कुरान पढ़ें

286. पृष्ठ
17 · अल-इसरा
ذٰلِكَ مِمَّٓا اَوْحٰٓى اِلَيْكَ رَبُّكَ مِنَ الْحِكْمَةِۜ وَلَا تَجْعَلْ مَعَ اللّٰهِ اِلٰهًا اٰخَرَ فَتُلْقٰى ف۪ي جَهَنَّمَ مَلُومًا مَدْحُورًا39
ये तत्वदर्शिता की वे बातें है, जिनकी प्रकाशना तुम्हारे रब ने तुम्हारी ओर की है। और देखो, अल्लाह के साथ कोई दूसरा पूज्य-प्रभु न घड़ना, अन्यथा जहन्नम में डाल दिए जाओगे निन्दित, ठुकराए हुए!
اَفَاَصْفٰيكُمْ رَبُّكُمْ بِالْبَن۪ينَ وَاتَّخَذَ مِنَ الْمَلٰٓئِكَةِ اِنَاثًاۜ اِنَّكُمْ لَتَقُولُونَ قَوْلًا عَظ۪يمًا۟40
क्या तुम्हारे रब ने तुम्हें तो बेटों के लिए ख़ास किया और स्वयं अपने लिए फ़रिश्तों को बेटियाँ बनाया? बहुत भारी बात है जो तुम कह रहे हो!
وَلَقَدْ صَرَّفْنَا ف۪ي هٰذَا الْقُرْاٰنِ لِيَذَّكَّرُواۜ وَمَا يَز۪يدُهُمْ اِلَّا نُفُورًا41
हमने इस क़ुरआन में विभिन्न ढंग से बात का स्पष्टीकरण किया कि वे चेतें, किन्तु इसमें उनकी नफ़रत ही बढ़ती है
قُلْ لَوْ كَانَ مَعَهُٓ اٰلِهَةٌ كَمَا يَقُولُونَ اِذًا لَابْتَغَوْا اِلٰى ذِي الْعَرْشِ سَب۪يلًا42
कह दो, "यदि उसके साथ अन्य भी पूज्य-प्रभु होते, जैसा कि ये कहते हैं, तब तो वे सिंहासनवाले (के पद) तक पहुँचने का कोई मार्ग अवश्य तलाश करते"
سُبْحَانَهُ وَتَعَالٰى عَمَّا يَقُولُونَ عُلُوًّا كَب۪يرًا43
महिमावान है वह! और बहुत उच्च है उन बातों से जो वे कहते है!
تُسَبِّحُ لَهُ السَّمٰوَاتُ السَّبْعُ وَالْاَرْضُ وَمَنْ ف۪يهِنَّۜ وَاِنْ مِنْ شَيْءٍ اِلَّا يُسَبِّحُ بِحَمْدِه۪ وَلٰكِنْ لَا تَفْقَهُونَ تَسْب۪يحَهُمْۜ اِنَّهُ كَانَ حَل۪يمًا غَفُورًا44
सातों आकाश और धरती और जो कोई भी उनमें है सब उसकी तसबीह (महिमागान) करते है और ऐसी कोई चीज़ नहीं जो उसका गुणगान न करती हो। किन्तु तुम उनकी तसबीह को समझते नहीं। निश्चय ही वह अत्यन्त सहनशील, क्षमावान है
وَاِذَا قَرَاْتَ الْقُرْاٰنَ جَعَلْنَا بَيْنَكَ وَبَيْنَ الَّذ۪ينَ لَا يُؤْمِنُونَ بِالْاٰخِرَةِ حِجَابًا مَسْتُورًاۙ45
जब तुम क़ुरआन पढ़ते हो तो हम तुम्हारे और उन लोगों के बीच, जो आख़िरत को नहीं मानते एक अदृश्य पर्दे की आड़ कर देते है
وَجَعَلْنَا عَلٰى قُلُوبِهِمْ اَكِنَّةً اَنْ يَفْقَهُوهُ وَف۪ٓي اٰذَانِهِمْ وَقْرًاۜ وَاِذَا ذَكَرْتَ رَبَّكَ فِي الْقُرْاٰنِ وَحْدَهُ وَلَّوْا عَلٰٓى اَدْبَارِهِمْ نُفُورًا46
और उनके दिलों पर भी परदे डाल देते है कि वे समझ न सकें। और उनके कानों में बोझ (कि वे सुन न सकें) । और जब तुम क़ुरआन के माध्यम से अपने रब का वर्णन उसे अकेला बताते हुए करते हो तो वे नफ़रत से अपनी पीठ फेरकर चल देते है
نَحْنُ اَعْلَمُ بِمَا يَسْتَمِعُونَ بِه۪ٓ اِذْ يَسْتَمِعُونَ اِلَيْكَ وَاِذْ هُمْ نَجْوٰٓى اِذْ يَقُولُ الظَّالِمُونَ اِنْ تَتَّبِعُونَ اِلَّا رَجُلًا مَسْحُورًا47
जब वे तुम्हारी ओर कान लगाते हैं तो हम भली-भाँति जानते है कि उनके कान लगाने का प्रयोजन क्या है और उसे भी जब वे आपस में कानाफूसियाँ करते है, जब वे ज़ालिम कहते है, "तुम लोग तो बस उस आदमी के पीछे चलते हो जो पक्का जादूगर है।"
اُنْظُرْ كَيْفَ ضَرَبُوا لَكَ الْاَمْثَالَ فَضَلُّوا فَلَا يَسْتَط۪يعُونَ سَب۪يلًا48
देखो, वे कैसी मिसालें तुमपर चस्पाँ करते है! वे तो भटक गए है, अब कोई मार्ग नहीं पा सकते!
وَقَالُٓوا ءَاِذَا كُنَّا عِظَامًا وَرُفَاتًا ءَاِنَّا لَمَبْعُوثُونَ خَلْقًا جَد۪يدًا49
वे कहते है, "क्या जब हम हड्डियाँ और चूर्ण-विचूर्ण होकर रह जाएँगे, तो क्या हम फिर नए बनकर उठेंगे?"