289. पृष्ठ - कुरान पढ़ें

289. पृष्ठ
17 · अल-इसरा
وَاِذَا مَسَّكُمُ الضُّرُّ فِي الْبَحْرِ ضَلَّ مَنْ تَدْعُونَ اِلَّٓا اِيَّاهُۚ فَلَمَّا نَجّٰيكُمْ اِلَى الْبَرِّ اَعْرَضْتُمْۜ وَكَانَ الْاِنْسَانُ كَفُورًا67
जब समुद्र में तुम पर कोई आपदा आती है तो उसके सिवा वे सब जिन्हें तुम पुकारते हो, गुम होकर रह जाते है, किन्तु फिर जब वह तुम्हें बचाकर थल पर पहुँचा देता है तो तुम उससे मुँह मोड़ जाते हो। मानव बड़ा ही अकृतज्ञ है
اَفَاَمِنْتُمْ اَنْ يَخْسِفَ بِكُمْ جَانِبَ الْبَرِّ اَوْ يُرْسِلَ عَلَيْكُمْ حَاصِبًا ثُمَّ لَا تَجِدُوا لَكُمْ وَك۪يلًاۙ68
क्या तुम इससे निश्चिन्त हो कि वह कभी थल की ओर ले जाकर तुम्हें धँसा दे या तुमपर पथराव करनेवाली आँधी भेज दे; फिर अपना कोई कार्यसाधक न पाओ?
اَمْ اَمِنْتُمْ اَنْ يُع۪يدَكُمْ ف۪يهِ تَارَةً اُخْرٰى فَيُرْسِلَ عَلَيْكُمْ قَاصِفًا مِنَ الرّ۪يحِ فَيُغْرِقَكُمْ بِمَا كَفَرْتُمْۙ ثُمَّ لَا تَجِدُوا لَكُمْ عَلَيْنَا بِه۪ تَب۪يعًا69
या तुम इससे निश्चिन्त हो कि वह फिर तुम्हें उसमें दोबारा ले जाए और तुमपर प्रचंड तूफ़ानी हवा भेज दे और तुम्हें तुम्हारे इनकार के बदले में डूबो दे। फिर तुम किसी को ऐसा न पाओ जो तुम्हारे लिए इसपर हमारा पीछा करनेवाला हो?
وَلَقَدْ كَرَّمْنَا بَن۪ٓي اٰدَمَ وَحَمَلْنَاهُمْ فِي الْبَرِّ وَالْبَحْرِ وَرَزَقْنَاهُمْ مِنَ الطَّيِّبَاتِ وَفَضَّلْنَاهُمْ عَلٰى كَث۪يرٍ مِمَّنْ خَلَقْنَا تَفْض۪يلًا۟70
हमने आदम की सन्तान को श्रेष्ठता प्रदान की और उन्हें थल औऱ जल में सवारी दी और अच्छी-पाक चीज़ों की उन्हें रोज़ी दी और अपने पैदा किए हुए बहुत-से प्राणियों की अपेक्षा उन्हें श्रेष्ठता प्रदान की
يَوْمَ نَدْعُوا كُلَّ اُنَاسٍ بِاِمَامِهِمْۚ فَمَنْ اُو۫تِيَ كِتَابَهُ بِيَم۪ينِه۪ فَاُو۬لٰٓئِكَ يَقْرَؤُ۫نَ كِتَابَهُمْ وَلَا يُظْلَمُونَ فَت۪يلًا71
(उस दिन से डरो) जिस दिन हम मानव के प्रत्येक गिरोह को उसके अपने नायक के साथ बुलाएँगे। फिर जिसे उसका कर्मपत्र उसके दाहिने हाथ में दिया गया, तो ऐसे लोग अपना कर्मपत्र पढ़ेंगे और उनके साथ तनिक भी अन्याय न होगा
وَمَنْ كَانَ ف۪ي هٰذِه۪ٓ اَعْمٰى فَهُوَ فِي الْاٰخِرَةِ اَعْمٰى وَاَضَلُّ سَب۪يلًا72
और जो यहाँ अंधा होकर रहा वह आख़िरत में भी अंधा ही रहेगा, बल्कि वह मार्ग से और भी अधिक दूर पड़ा होगा
وَاِنْ كَادُوا لَيَفْتِنُونَكَ عَنِ الَّذ۪ٓي اَوْحَيْنَٓا اِلَيْكَ لِتَفْتَرِيَ عَلَيْنَا غَيْرَهُۗ وَاِذًا لَاتَّخَذُوكَ خَل۪يلًا73
और वे लगते थे कि तुम्हें फ़िले में डालकर उस चीज़ से हटा देने को है जिसकी प्रकाशना हमने तुम्हारी ओर की है, ताकि तुम उससे भिन्न चीज़ घड़कर हमपर थोपो, और तब वे तुम्हें अपना घनिष्ठ मित्र बना लेते
وَلَوْلَٓا اَنْ ثَبَّتْنَاكَ لَقَدْ كِدْتَ تَرْكَنُ اِلَيْهِمْ شَيْـًٔا قَل۪يلًاۗ74
यदि हम तुम्हें जमाव प्रदान न करते तो तुम उनकी ओर थोड़ा झुकने के निकट जा पहुँचते
اِذًا لَاَذَقْنَاكَ ضِعْفَ الْحَيٰوةِ وَضِعْفَ الْمَمَاتِ ثُمَّ لَا تَجِدُ لَكَ عَلَيْنَا نَص۪يرًا75
उस समय हम तुम्हें जीवन में भी दोहरा मज़ा चखाते और मृत्यु के पश्चात भी दोहरा मज़ा चखाते। फिर तुम हमारे मुक़ाबले में अपना कोई सहायक न पाते