29. पृष्ठ - कुरान पढ़ें

29. पृष्ठ
2 · अल-बक़रा
اُحِلَّ لَكُمْ لَيْلَةَ الصِّيَامِ الرَّفَثُ اِلٰى نِسَٓائِكُمْۜ هُنَّ لِبَاسٌ لَكُمْ وَاَنْتُمْ لِبَاسٌ لَهُنَّۜ عَلِمَ اللّٰهُ اَنَّكُمْ كُنْتُمْ تَخْتَانُونَ اَنْفُسَكُمْ فَتَابَ عَلَيْكُمْ وَعَفَا عَنْكُمْۚ فَالْـٰٔنَ بَاشِرُوهُنَّ وَابْتَغُوا مَا كَتَبَ اللّٰهُ لَكُمْۖ وَكُلُوا وَاشْرَبُوا حَتّٰى يَتَبَيَّنَ لَكُمُ الْخَيْطُ الْاَبْيَضُ مِنَ الْخَيْطِ الْاَسْوَدِ مِنَ الْفَجْرِۖ ثُمَّ اَتِمُّوا الصِّيَامَ اِلَى الَّيْلِۚ وَلَا تُبَاشِرُوهُنَّ وَاَنْتُمْ عَاكِفُونَۙ فِي الْمَسَاجِدِۜ تِلْكَ حُدُودُ اللّٰهِ فَلَا تَقْرَبُوهَاۜ كَذٰلِكَ يُبَيِّنُ اللّٰهُ اٰيَاتِه۪ لِلنَّاسِ لَعَلَّهُمْ يَتَّقُونَ187
तुम्हारे लिए रोज़ो की रातों में अपनी औरतों के पास जाना जायज़ (वैध) हुआ। वे तुम्हारे परिधान (लिबास) हैं और तुम उनका परिधान हो। अल्लाह को मालूम हो गया कि तुम लोग अपने-आपसे कपट कर रहे थे, तो उसने तुमपर कृपा की और तुम्हें क्षमा कर दिया। तो अब तुम उनसे मिलो-जुलो और अल्लाह ने जो कुछ तुम्हारे लिए लिख रखा है, उसे तलब करो। और खाओ और पियो यहाँ तक कि तुम्हें उषाकाल की सफ़ेद धारी (रात की) काली धारी से स्पष्टा दिखाई दे जाए। फिर रात तक रोज़ा पूरा करो और जब तुम मस्जिदों में 'एतकाफ़' की हालत में हो, तो तुम उनसे न मिलो। ये अल्लाह की सीमाएँ हैं। अतः इनके निकट न जाना। इस प्रकार अल्लाह अपनी आयतें लोगों के लिए खोल-खोलकर बयान करता है, ताकि वे डर रखनेवाले बनें
وَلَا تَاْكُلُٓوا اَمْوَالَكُمْ بَيْنَكُمْ بِالْبَاطِلِ وَتُدْلُوا بِهَٓا اِلَى الْحُكَّامِ لِتَاْكُلُوا فَر۪يقًا مِنْ اَمْوَالِ النَّاسِ بِالْاِثْمِ وَاَنْتُمْ تَعْلَمُونَ۟188
और आपस में तुम एक-दूसरे के माल को अवैध रूप से न खाओ, और न उन्हें हाकिमों के आगे ले जाओ कि (हक़ मारकर) लोगों के कुछ माल जानते-बूझते हड़प सको
يَسْـَٔلُونَكَ عَنِ الْاَهِلَّةِۜ قُلْ هِيَ مَوَاق۪يتُ لِلنَّاسِ وَالْحَجِّۜ وَلَيْسَ الْبِرُّ بِاَنْ تَاْتُوا الْبُيُوتَ مِنْ ظُهُورِهَا وَلٰكِنَّ الْبِرَّ مَنِ اتَّقٰىۚ وَاْتُوا الْبُيُوتَ مِنْ اَبْوَابِهَاۖ وَاتَّقُوا اللّٰهَ لَعَلَّكُمْ تُفْلِحُونَ189
वे तुमसे (प्रतिष्ठित) महीनों के विषय में पूछते है। कहो, "वे तो लोगों के लिए और हज के लिए नियत है। और यह कोई ख़ूबी और नेकी नहीं हैं कि तुम घरों में उनके पीछे से आओ, बल्कि नेकी तो उसकी है जो (अल्लाह का) डर रखे। तुम घरों में उनके दरवाड़ों से आओ और अल्लाह से डरते रहो, ताकि तुम्हें सफलता प्राप्त हो
وَقَاتِلُوا ف۪ي سَب۪يلِ اللّٰهِ الَّذ۪ينَ يُقَاتِلُونَكُمْ وَلَا تَعْتَدُواۜ اِنَّ اللّٰهَ لَا يُحِبُّ الْمُعْتَد۪ينَ190
और अल्लाह के मार्ग में उन लोगों से लड़ो जो तुमसे लड़े, किन्तु ज़्यादती न करो। निस्संदेह अल्लाह ज़्यादती करनेवालों को पसन्द नहीं करता