292. पृष्ठ - कुरान पढ़ें

292. पृष्ठ
17 · अल-इसरा
وَمَنْ يَهْدِ اللّٰهُ فَهُوَ الْمُهْتَدِۚ وَمَنْ يُضْلِلْ فَلَنْ تَجِدَ لَهُمْ اَوْلِيَٓاءَ مِنْ دُونِه۪ۜ وَنَحْشُرُهُمْ يَوْمَ الْقِيٰمَةِ عَلٰى وُجُوهِهِمْ عُمْيًا وَبُكْمًا وَصُمًّاۜ مَاْوٰيهُمْ جَهَنَّمُۜ كُلَّمَا خَبَتْ زِدْنَاهُمْ سَع۪يرًا97
जिसे अल्लाह ही मार्ग दिखाए वही मार्ग पानेवाला है और वह जिसे पथभ्रष्ट होने दे, तो ऐसे लोगों के लिए उससे इतर तुम सहायक न पाओगे। क़ियामत के दिन हम उन्हें औंधे मुँह इस दशा में इकट्ठा करेंगे कि वे अंधे गूँगे और बहरे होंगे। उनका ठिकाना जहन्नम है। जब भी उसकी आग धीमी पड़ने लगेगी तो हम उसे उनके लिए भड़का देंगे
ذٰلِكَ جَزَٓاؤُ۬هُمْ بِاَنَّهُمْ كَفَرُوا بِاٰيَاتِنَا وَقَالُٓوا ءَاِذَا كُنَّا عِظَامًا وَرُفَاتًا ءَاِنَّا لَمَبْعُوثُونَ خَلْقًا جَد۪يدًا98
यही उनका बदला है, इसलिए कि उन्होंने हमारी आयतों का इनकार किया और कहा, "क्या जब हम केवल हड्डियाँ और चूर्ण-विचूर्ण होकर रह जाएँगे, तो क्या हमें नए सिरे से पैदा करके उठा खड़ा किया जाएगा?"
اَوَلَمْ يَرَوْا اَنَّ اللّٰهَ الَّذ۪ي خَلَقَ السَّمٰوَاتِ وَالْاَرْضَ قَادِرٌ عَلٰٓى اَنْ يَخْلُقَ مِثْلَهُمْ وَجَعَلَ لَهُمْ اَجَلًا لَا رَيْبَ ف۪يهِۜ فَاَبَى الظَّالِمُونَ اِلَّا كُفُورًا99
क्या उन्हें यह न सूझा कि जिस अल्लाह ने आकाशों और धरती को पैदा किया है उसे उन जैसों को भी पैदा करने की सामर्थ्य प्राप्त है? उसने तो उनके लिए एक समय निर्धारित कर रखा है, जिसमें कोई सन्देह नहीं है। फिर भी ज़ालिमों के लिए इनकार के सिवा हर चीज़ अस्वीकार्य ही रही
قُلْ لَوْ اَنْتُمْ تَمْلِكُونَ خَزَٓائِنَ رَحْمَةِ رَبّ۪ٓي اِذًا لَاَمْسَكْتُمْ خَشْيَةَ الْاِنْفَاقِۜ وَكَانَ الْاِنْسَانُ قَتُورًا۟100
कहो, "यदि कहीं मेरे रब की दयालुता के ख़ज़ाने तुम्हारे अधिकार में होते हो ख़र्च हो जाने के भय से तुम रोके ही रखते। वास्तव में इनसान तो दिल का बड़ा ही तंग है
وَلَقَدْ اٰتَيْنَا مُوسٰى تِسْعَ اٰيَاتٍ بَيِّنَاتٍ فَسْـَٔلْ بَن۪ٓي اِسْرَٓاء۪يلَ اِذْ جَٓاءَهُمْ فَقَالَ لَهُ فِرْعَوْنُ اِنّ۪ي لَاَظُنُّكَ يَا مُوسٰى مَسْحُورًا101
हमने मूसा को नौ खुली निशानियाँ प्रदान की थी। अब इसराईल की सन्तान से पूछ लो कि जब वह उनके पास आया और फ़िरऔन ने उससे कहा, "ऐ मूसा! मैं तो तुम्हें बड़ा जादूगर समझता हूँ।"
قَالَ لَقَدْ عَلِمْتَ مَٓا اَنْزَلَ هٰٓؤُ۬لَٓاءِ اِلَّا رَبُّ السَّمٰوَاتِ وَالْاَرْضِ بَصَٓائِرَۚ وَاِنّ۪ي لَاَظُنُّكَ يَا فِرْعَوْنُ مَثْبُورًا102
उसने कहा, "तू भली-भाँति जानता हैं कि आकाशों और धऱती के रब के सिवा किसी और ने इन (निशानियों) को स्पष्ट प्रमाण बनाकर नहीं उतारा है। और ऐ फ़िरऔन! मैं तो समझता हूँ कि तू विनष्ट होने को है।"
فَاَرَادَ اَنْ يَسْتَفِزَّهُمْ مِنَ الْاَرْضِ فَاَغْرَقْنَاهُ وَمَنْ مَعَهُ جَم۪يعًاۙ103
अन्ततः उसने चाहा कि उनको उस भूभाग से उखाड़ फेंके, किन्तु हमने उसे और जो उसके साथ थे सभी को डूबो दिया
وَقُلْنَا مِنْ بَعْدِه۪ لِبَن۪ٓي اِسْرَٓاء۪يلَ اسْكُنُوا الْاَرْضَ فَاِذَا جَٓاءَ وَعْدُ الْاٰخِرَةِ جِئْنَا بِكُمْ لَف۪يفًاۜ104
और हमने उसके बाद इसराईल की सन्तान से कहा, "तुम इस भूभाग में बसो। फिर जब आख़िरत का वादा आ पूरा होगा, तो हम तुम सबको इकट्ठा ला उपस्थित करेंगे।"