293. पृष्ठ - कुरान पढ़ें

293. पृष्ठ
17 · अल-इसरा
وَبِالْحَقِّ اَنْزَلْنَاهُ وَبِالْحَقِّ نَزَلَۜ وَمَٓا اَرْسَلْنَاكَ اِلَّا مُبَشِّرًا وَنَذ۪يرًاۢ105
सत्य के साथ हमने उसे अवतरित किया और सत्य के साथ वह अवतरित भी हुआ। और तुम्हें तो हमने केवल शुभ सूचना देनेवाला और सावधान करनेवाला बनाकर भेजा है
وَقُرْاٰنًا فَرَقْنَاهُ لِتَقْرَاَهُ۫ عَلَى النَّاسِ عَلٰى مُكْثٍ وَنَزَّلْنَاهُ تَنْز۪يلًا106
और क़ुरआन को हमने थोड़ा-थोड़ा करके इसलिए अवतरित किया, ताकि तुम ठहर-ठहरकर उसे लोगो को सुनाओ, और हमने उसे उत्तम रीति से क्रमशः उतारा है
قُلْ اٰمِنُوا بِه۪ٓ اَوْ لَا تُؤْمِنُواۜ اِنَّ الَّذ۪ينَ اُو۫تُوا الْعِلْمَ مِنْ قَبْلِه۪ٓ اِذَا يُتْلٰى عَلَيْهِمْ يَخِرُّونَ لِلْاَذْقَانِ سُجَّدًاۙ107
कह दो, "तुम उसे मानो या न मानो, जिन लोगों को इससे पहले ज्ञान दिया गया है, उन्हें जब वह पढ़कर सुनाया जाता है, तो वे ठोड़ियों के बल सजदे में गिर पड़ते है
وَيَقُولُونَ سُبْحَانَ رَبِّنَٓا اِنْ كَانَ وَعْدُ رَبِّنَا لَمَفْعُولًا108
और कहते है, "महान और उच्च है हमारा रब! हमारे रब का वादा तो पूरा होकर ही रहता है।"
وَيَخِرُّونَ لِلْاَذْقَانِ يَبْكُونَ وَيَز۪يدُهُمْ خُشُوعًا109
और वे रोते हुए ठोड़ियों के बल गिर जाते है और वह (क़ुरआन) उनकी विनम्रता को और बढ़ा देता है
قُلِ ادْعُوا اللّٰهَ اَوِ ادْعُوا الرَّحْمٰنَۜ اَيًّا مَا تَدْعُوا فَلَهُ الْاَسْمَٓاءُ الْحُسْنٰىۚ وَلَا تَجْهَرْ بِصَلَاتِكَ وَلَا تُخَافِتْ بِهَا وَابْتَغِ بَيْنَ ذٰلِكَ سَب۪يلًا110
कह दो, "तुम अल्लाह को पुकारो या रहमान को पुकारो या जिस नाम से भी पुकारो, उसके लिए सब अच्छे ही नाम है।" और अपनी नमाज़ न बहुत ऊँची आवाज़ से पढ़ो और न उसे बहुत चुपके से पढ़ो, बल्कि इन दोनों के बीच मध्य मार्ग अपनाओ
وَقُلِ الْحَمْدُ لِلّٰهِ الَّذ۪ي لَمْ يَتَّخِذْ وَلَدًا وَلَمْ يَكُنْ لَهُ شَر۪يكٌ فِي الْمُلْكِ وَلَمْ يَكُنْ لَهُ وَلِيٌّ مِنَ الذُّلِّ وَكَبِّرْهُ تَكْب۪يرًا111
और कहो, "प्रशंसा अल्लाह के लिए है, जिसने न तो अपना कोई बेटा बनाया और न बादशाही में उसका कोई सहभागी है और न ऐसा ही है कि वह दीन-हीन हो जिसके कारण बचाव के लिए उसका कोई सहायक मित्र हो।" और बड़ाई बयान करो उसकी, पूर्ण बड़ाई
18 · अल-कहफ
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِيمِ
اَلْحَمْدُ لِلّٰهِ الَّذ۪ٓي اَنْزَلَ عَلٰى عَبْدِهِ الْكِتَابَ وَلَمْ يَجْعَلْ لَهُ عِوَجًا ۜ۔1
प्रशंसा अल्लाह के लिए है जिसने अपने बन्दे पर यह किताब अवतरित की और उसमें (अर्थात उस बन्दे में) कोई टेढ़ नहीं रखी,
قَيِّمًا لِيُنْذِرَ بَاْسًا شَد۪يدًا مِنْ لَدُنْهُ وَيُبَشِّرَ الْمُؤْمِن۪ينَ الَّذ۪ينَ يَعْمَلُونَ الصَّالِحَاتِ اَنَّ لَهُمْ اَجْرًا حَسَنًاۙ2
ठीक और दूरुस्त, ताकि एक कठोर आपदा से सावधान कर दे जो उसकी और से आ पड़ेगी। और मोमिनों को, जो अच्छे कर्म करते है, शुभ सूचना दे दे कि उनके लिए अच्छा बदला है;
مَاكِث۪ينَ ف۪يهِ اَبَدًاۙ3
जिसमें वे सदैव रहेंगे
وَيُنْذِرَ الَّذ۪ينَ قَالُوا اتَّخَذَ اللّٰهُ وَلَدًاۗ4
और उनको सावधान कर दे, जो कहते है, "अल्लाह सन्तानवाला है।"