294. पृष्ठ - कुरान पढ़ें

294. पृष्ठ
18 · अल-कहफ
مَا لَهُمْ بِه۪ مِنْ عِلْمٍ وَلَا لِاٰبَٓائِهِمْۜ كَبُرَتْ كَلِمَةً تَخْرُجُ مِنْ اَفْوَاهِهِمْۜ اِنْ يَقُولُونَ اِلَّا كَذِبًا5
इसका न उन्हें कोई ज्ञान है और न उनके बाप-दादा ही को था। बड़ी बात है जो उनके मुँह से निकलती है। वे केवल झूठ बोलते है
فَلَعَلَّكَ بَاخِعٌ نَفْسَكَ عَلٰٓى اٰثَارِهِمْ اِنْ لَمْ يُؤْمِنُوا بِهٰذَا الْحَد۪يثِ اَسَفًا6
अच्छा, शायद उनके पीछे, यदि उन्होंने यह बात न मानी तो तुम अफ़सोस के मारे अपने प्राण ही खो दोगे!
اِنَّا جَعَلْنَا مَا عَلَى الْاَرْضِ ز۪ينَةً لَهَا لِنَبْلُوَهُمْ اَيُّهُمْ اَحْسَنُ عَمَلًا7
धरती पर जो कुछ है उसे तो हमने उसकी शोभा बनाई है, ताकि हम उनकी परीक्षा लें कि उनमें कर्म की दृष्टि से कौन उत्तम है
وَاِنَّا لَجَاعِلُونَ مَا عَلَيْهَا صَع۪يدًا جُرُزًاۜ8
और जो कुछ उसपर है उसे तो हम एक चटियल मैदान बना देनेवाले है
اَمْ حَسِبْتَ اَنَّ اَصْحَابَ الْكَهْفِ وَالرَّق۪يمِ كَانُوا مِنْ اٰيَاتِنَا عَجَبًا9
क्या तुम समझते हो कि गुफा और रक़ीमवाले हमारी अद्भु त निशानियों में से थे?
اِذْ اَوَى الْفِتْيَةُ اِلَى الْكَهْفِ فَقَالُوا رَبَّنَٓا اٰتِنَا مِنْ لَدُنْكَ رَحْمَةً وَهَيِّئْ لَنَا مِنْ اَمْرِنَا رَشَدًا10
जब उन नवयुवकों ने गुफ़ा में जाकर शरण ली तो कहा, "हमारे रब! हमें अपने यहाँ से दयालुता प्रदान कर और हमारे लिए हमारे अपने मामले को ठीक कर दे।"
فَضَرَبْنَا عَلٰٓى اٰذَانِهِمْ فِي الْكَهْفِ سِن۪ينَ عَدَدًاۙ11
फिर हमने उस गुफा में कई वर्षो के लिए उनके कानों पर परदा डाल दिया
ثُمَّ بَعَثْنَاهُمْ لِنَعْلَمَ اَيُّ الْحِزْبَيْنِ اَحْصٰى لِمَا لَبِثُٓوا اَمَدًا۟12
फिर हमने उन्हें भेजा, ताकि मालूम करें कि दोनों गिरोहों में से किसने याद रखा है कि कितनी अवधि तक वे रहे
نَحْنُ نَقُصُّ عَلَيْكَ نَبَاَهُمْ بِالْحَقِّۜ اِنَّهُمْ فِتْيَةٌ اٰمَنُوا بِرَبِّهِمْ وَزِدْنَاهُمْ هُدًىۗ13
हम तुन्हें ठीक-ठीक उनका वृत्तान्त सुनाते है। वे कुछ नवयुवक थे जो अपने रब पर ईमान लाए थे, और हमने उन्हें मार्गदर्शन में बढ़ोत्तरी प्रदान की
وَرَبَطْنَا عَلٰى قُلُوبِهِمْ اِذْ قَامُوا فَقَالُوا رَبُّنَا رَبُّ السَّمٰوَاتِ وَالْاَرْضِ لَنْ نَدْعُوَ۬ا مِنْ دُونِه۪ٓ اِلٰهًا لَقَدْ قُلْنَٓا اِذًا شَطَطًا14
और हमने उनके दिलों को सुदृढ़ कर दिया। जब वे उठे तो उन्होंने कहा, "हमारा रब तो वही है जो आकाशों और धरती का रब है। हम उससे इतर किसी अन्य पूज्य को कदापि न पुकारेंगे। यदि हमने ऐसा किया तब तो हमारी बात हक़ से बहुत हटी हुई होगी
هٰٓؤُ۬لَٓاءِ قَوْمُنَا اتَّخَذُوا مِنْ دُونِه۪ٓ اٰلِهَةًۜ لَوْلَا يَاْتُونَ عَلَيْهِمْ بِسُلْطَانٍ بَيِّنٍۜ فَمَنْ اَظْلَمُ مِمَّنِ افْتَرٰى عَلَى اللّٰهِ كَذِبًاۜ15
ये हमारी क़ौम के लोग है, जिन्होंने उससे इतर कुछ अन्य पूज्य-प्रभु बना लिए है। आख़िर ये उनके हक़ में कोई स्पष्ट, प्रमाण क्यों नहीं लाते! भला उससे बढ़कर ज़ालिम कौन होगा जो झूठ घड़कर अल्लाह पर थोपे?