301. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
18 · अल-कहफ
فَلَمَّا جَاوَزَا قَالَ لِفَتٰيهُ اٰتِنَا غَدَٓاءَنَاۘ لَقَدْ لَق۪ينَا مِنْ سَفَرِنَا هٰذَا نَصَبًا62
फिर जब वे वहाँ से आगे बढ़ गए तो उसने अपने सेवक से कहा, "लाओ, हमारा नाश्ता। अपने इस सफ़र में तो हमें बड़ी थकान पहुँची है।"
قَالَ اَرَاَيْتَ اِذْ اَوَيْنَٓا اِلَى الصَّخْرَةِ فَاِنّ۪ي نَس۪يتُ الْحُوتَۘ وَمَٓا اَنْسَان۪يهُ اِلَّا الشَّيْطَانُ اَنْ اَذْكُرَهُۚ وَاتَّخَذَ سَب۪يلَهُ فِي الْبَحْرِۗ عَجَبًا63
उसने कहा, "ज़रा देखिए तो सही, जब हम उस चट्टान के पास ठहरे हुए थे तो मैं मछली को भूल ही गया - और शैतान ही ने उसको याद रखने से मुझे ग़ाफ़िल कर दिया - और उसने आश्चर्य रूप से दरिया में अपनी राह ली।"
قَالَ ذٰلِكَ مَا كُنَّا نَبْغِۗ فَارْتَدَّا عَلٰٓى اٰثَارِهِمَا قَصَصًاۙ64
(मूसा ने) कहा, "यही तो है जिसे हम तलाश कर रहे थे।" फिर वे दोनों अपने पदचिन्हों को देखते हुए वापस हुए
فَوَجَدَا عَبْدًا مِنْ عِبَادِنَٓا اٰتَيْنَاهُ رَحْمَةً مِنْ عِنْدِنَا وَعَلَّمْنَاهُ مِنْ لَدُنَّا عِلْمًا65
फिर उन्होंने हमारे बन्दों में से एक बन्दे को पाया, जिसे हमने अपने पास से दयालुता प्रदान की थी और जिसे अपने पास से ज्ञान प्रदान किया था
قَالَ لَهُ مُوسٰى هَلْ اَتَّبِعُكَ عَلٰٓى اَنْ تُعَلِّمَنِ مِمَّا عُلِّمْتَ رُشْدًا66
मूसा ने उससे कहा, "क्या मैं आपके पीछे चलूँ, ताकि आप मुझे उस ज्ञान औऱ विवेक की शिक्षा दें, जो आपको दी गई है?"
قَالَ اِنَّكَ لَنْ تَسْتَط۪يعَ مَعِيَ صَبْرًا67
उसने कहा, "तुम मेरे साथ धैर्य न रख सकोगे,
وَكَيْفَ تَصْبِرُ عَلٰى مَا لَمْ تُحِطْ بِه۪ خُبْرًا68
और जो चीज़ तुम्हारे ज्ञान-परिधि से बाहर हो, उस पर तुम धैर्य कैसे रख सकते हो?"
قَالَ سَتَجِدُن۪ٓي اِنْ شَٓاءَ اللّٰهُ صَابِرًا وَلَٓا اَعْص۪ي لَكَ اَمْرًا69
(मूसा ने) कहा, "यदि अल्लाह ने चाहा तो आप मुझे धैर्यवान पाएँगे। और मैं किसी मामले में भी आपकी अवज्ञा नहीं करूँगा।"
قَالَ فَاِنِ اتَّبَعْتَن۪ي فَلَا تَسْـَٔلْن۪ي عَنْ شَيْءٍ حَتّٰٓى اُحْدِثَ لَكَ مِنْهُ ذِكْرًا۟70
उसने कहा, "अच्छा, यदि तुम मेरे साथ चलते हो तो मुझसे किसी चीज़ के विषय में न पूछना, यहाँ तक कि मैं स्वयं ही तुमसे उसकी चर्चा करूँ।"
فَانْطَلَقَا۠ حَتّٰٓى اِذَا رَكِبَا فِي السَّف۪ينَةِ خَرَقَهَاۜ قَالَ اَخَرَقْتَهَا لِتُغْرِقَ اَهْلَهَاۚ لَقَدْ جِئْتَ شَيْـًٔا اِمْرًا71
अन्ततः दोनों चले, यहाँ तक कि जब नौका में सवार हुए तो उसने उसमें दरार डाल दी। (मूसा ने) कहा, "आपने इसमें दरार डाल दी, ताकि उसके सवारों को डुबो दें? आपने तो एक अनोखी हरकत कर डाली।"
قَالَ اَلَمْ اَقُلْ اِنَّكَ لَنْ تَسْتَط۪يعَ مَعِيَ صَبْرًا72
उसने कहा, "क्या मैंने कहा नहीं था कि तुम मेरे साथ धैर्य न रख सकोंगे?"
قَالَ لَا تُؤَاخِذْن۪ي بِمَا نَس۪يتُ وَلَا تُرْهِقْن۪ي مِنْ اَمْر۪ي عُسْرًا73
कहा, "जो भूल-चूक मुझसे हो गई उसपर मुझे न पकड़िए और मेरे मामलें में मुझे तंगी में न डालिए।"
فَانْطَلَقَا۠ حَتّٰٓى اِذَا لَقِيَا غُلَامًا فَقَتَلَهُۙ قَالَ اَقَتَلْتَ نَفْسًا زَكِيَّةً بِغَيْرِ نَفْسٍۜ لَقَدْ جِئْتَ شَيْـًٔا نُكْرًا74
फिर वे दोनों चले, यहाँ तक कि जब वे एक लड़के से मिले तो उसने उसे मार डाला। कहा, "क्या आपने एक अच्छी-भली जान की हत्या कर दी, बिना इसके कि किसी की हत्या का बदला लेना अभीष्ट हो? यह तो आपने बहुत ही बुरा किया!"