304. पृष्ठ - कुरान पढ़ें

304. पृष्ठ
18 · अल-कहफ
قَالَ هٰذَا رَحْمَةٌ مِنْ رَبّ۪يۚ فَاِذَا جَٓاءَ وَعْدُ رَبّ۪ي جَعَلَهُ دَكَّٓاءَۚ وَكَانَ وَعْدُ رَبّ۪ي حَقًّاۜ98
उसने कहा, "यह मेरे रब की दयालुता है, किन्तु जब मेरे रब के वादे का समय आ जाएगा तो वह उसे ढाकर बराबर कर देगा, और मेरे रब का वादा सच्चा है।"
وَتَرَكْنَا بَعْضَهُمْ يَوْمَئِذٍ يَمُوجُ ف۪ي بَعْضٍ وَنُفِخَ فِي الصُّورِ فَجَمَعْنَاهُمْ جَمْعًاۙ99
उस दिन हम उन्हें छोड़ देंगे कि वे एक-दूसरे से मौज़ों की तरह परस्पर गुत्मथ-गुत्था हो जाएँगे। और "सूर" फूँका जाएगा। फिर हम उन सबको एक साथ इकट्ठा करेंगे
وَعَرَضْنَا جَهَنَّمَ يَوْمَئِذٍ لِلْكَافِر۪ينَ عَرْضًاۙ100
और उस दिन जहन्नम को इनकार करनेवालों के सामने कर देंगे
اَلَّذ۪ينَ كَانَتْ اَعْيُنُهُمْ ف۪ي غِطَٓاءٍ عَنْ ذِكْر۪ي وَكَانُوا لَا يَسْتَط۪يعُونَ سَمْعًا۟101
जिनके नेत्र मेरी अनुस्मृति की ओर से परदे में थे और जो कुछ सुन भी नहीं सकते थे
اَفَحَسِبَ الَّذ۪ينَ كَفَرُٓوا اَنْ يَتَّخِذُوا عِبَاد۪ي مِنْ دُون۪ٓي اَوْلِيَٓاءَۜ اِنَّٓا اَعْتَدْنَا جَهَنَّمَ لِلْكَافِر۪ينَ نُزُلًا102
तो क्या इनकार करनेवाले इस ख़याल में हैं कि मुझसे हटकर मेरे बन्दों को अपना हिमायती बना लें? हमने ऐसे इनकार करनेवालों के आतिथ्य-सत्कार के लिए जहन्नम तैयार कर रखा है
قُلْ هَلْ نُنَبِّئُكُمْ بِالْاَخْسَر۪ينَ اَعْمَالًاۜ103
कहो, "क्या हम तुम्हें उन लोगों की ख़बर दें, जो अपने कर्मों की स्पष्ट से सबसे बढ़कर घाटा उठानेवाले हैं?
اَلَّذ۪ينَ ضَلَّ سَعْيُهُمْ فِي الْحَيٰوةِ الدُّنْيَا وَهُمْ يَحْسَبُونَ اَنَّهُمْ يُحْسِنُونَ صُنْعًا104
यो वे लोग है जिनका प्रयास सांसारिक जीवन में अकारथ गया और वे यही समझते है कि वे बहुत अच्छा कर्म कर रहे है
اُو۬لٰٓئِكَ الَّذ۪ينَ كَفَرُوا بِاٰيَاتِ رَبِّهِمْ وَلِقَٓائِه۪ فَحَبِطَتْ اَعْمَالُهُمْ فَلَا نُق۪يمُ لَهُمْ يَوْمَ الْقِيٰمَةِ وَزْنًا105
यही वे लोग है जिन्होंने अपने रब की आयतों का और उससे मिलन का इनकार किया। अतः उनके कर्म जान को लागू हुए, तो हम क़ियामत के दिन उन्हें कोई वज़न न देंगे
ذٰلِكَ جَزَٓاؤُ۬هُمْ جَهَنَّمُ بِمَا كَفَرُوا وَاتَّخَذُٓوا اٰيَات۪ي وَرُسُل۪ي هُزُوًا106
उनका बदला वही जहन्नम है, इसलिए कि उन्होंने कुफ़्र की नीति अपनाई और मेरी आयतों और मेरे रसूलों का उपहास किया
اِنَّ الَّذ۪ينَ اٰمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ كَانَتْ لَهُمْ جَنَّاتُ الْفِرْدَوْسِ نُزُلًاۙ107
निश्चय ही जो लोग ईमान लाए और उन्होंने अच्छे कर्म किए उनके आतिथ्य के लिए फ़िरदौस के बाग़ होंगे,
خَالِد۪ينَ ف۪يهَا لَا يَبْغُونَ عَنْهَا حِوَلًا108
जिनमें वे सदैव रहेंगे, वहाँ से हटना न चाहेंगे।"
قُلْ لَوْ كَانَ الْبَحْرُ مِدَادًا لِكَلِمَاتِ رَبّ۪ي لَنَفِدَ الْبَحْرُ قَبْلَ اَنْ تَنْفَدَ كَلِمَاتُ رَبّ۪ي وَلَوْ جِئْنَا بِمِثْلِه۪ مَدَدًا109
कहो, "यदि समुद्र मेरे रब के बोल को लिखने के लिए रोशनाई हो जाए तो इससे पहले कि मेरे रब के बोल समाप्त हों, समुद्र ही समाप्त हो जाएगा। यद्यपि हम उसके सदृश्य एक और भी समुद्र उसके साथ ला मिलाएँ।"
قُلْ اِنَّمَٓا اَنَا۬ بَشَرٌ مِثْلُكُمْ يُوحٰٓى اِلَيَّ اَنَّمَٓا اِلٰهُكُمْ اِلٰهٌ وَاحِدٌۚ فَمَنْ كَانَ يَرْجُوا لِقَٓاءَ رَبِّه۪ فَلْيَعْمَلْ عَمَلًا صَالِحًا وَلَا يُشْرِكْ بِعِبَادَةِ رَبِّه۪ٓ اَحَدًا110
कह दो, "मैं तो केवल तुम्हीं जैसा मनुष्य हूँ। मेरी ओर प्रकाशना की जाती है कि तुम्हारा पूज्य-प्रभु बस अकेला पूज्य-प्रभु है। अतः जो कोई अपने रब से मिलन की आशा रखता हो, उसे चाहिए कि अच्छा कर्म करे और अपने रब की बन्दगी में किसी को साझी न बनाए।"