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305. पृष्ठ
19 · मरियम
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِيمِ
كٓهٰيٰعٓصٓۜ1
काफ॰ हा॰ या॰ ऐन॰ साद॰
ذِكْرُ رَحْمَتِ رَبِّكَ عَبْدَهُ زَكَرِيَّاۚ2
वर्णन है तेरे रब की दयालुता का, जो उसने अपने बन्दे ज़करीया पर दर्शाई,
اِذْ نَادٰى رَبَّهُ نِدَٓاءً خَفِيًّا3
जबकि उसने अपने रब को चुपके से पुकारा
قَالَ رَبِّ اِنّ۪ي وَهَنَ الْعَظْمُ مِنّ۪ي وَاشْتَعَلَ الرَّاْسُ شَيْبًا وَلَمْ اَكُنْ بِدُعَٓائِكَ رَبِّ شَقِيًّا4
उसने कहा, "मेरे रब! मेरी हड्डियाँ कमज़ोर हो गई और सिर बुढापे से भड़क उठा। और मेरे रब! तुझे पुकारकर मैं कभी बेनसीब नहीं रहा
وَاِنّ۪ي خِفْتُ الْمَوَالِيَ مِنْ وَرَٓاء۪ي وَكَانَتِ امْرَاَت۪ي عَاقِرًا فَهَبْ ل۪ي مِنْ لَدُنْكَ وَلِيًّاۚ5
मुझे अपने पीछे अपने भाई-बन्धुओं की ओर से भय है और मेरी पत्नी बाँझ है। अतः तू मुझे अपने पास से एक उत्ताराधिकारी प्रदान कर,
يَرِثُن۪ي وَيَرِثُ مِنْ اٰلِ يَعْقُوبَۗ وَاجْعَلْهُ رَبِّ رَضِيًّا6
जो मेरा भी उत्तराधिकारी हो और याक़ूब के वशंज का भी उत्तराधिकारी हो। और उसे मेरे रब! वांछनीय बना।"
يَا زَكَرِيَّٓا اِنَّا نُبَشِّرُكَ بِغُلَامٍۨ اسْمُهُ يَحْيٰىۙ لَمْ نَجْعَلْ لَهُ مِنْ قَبْلُ سَمِيًّا7
(उत्तर मिला,) "ऐ ज़करीया! हम तुझे एक लड़के की शुभ सूचना देते है, जिसका नाम यह्यार होगा। हमने उससे पहले किसी को उसके जैसा नहीं बनाया।"
قَالَ رَبِّ اَنّٰى يَكُونُ ل۪ي غُلَامٌ وَكَانَتِ امْرَاَت۪ي عَاقِرًا وَقَدْ بَلَغْتُ مِنَ الْكِبَرِ عِتِيًّا8
उसने कहा, "मेरे रब! मेरे लड़का कहाँ से होगा, जबकि मेरी पत्नी बाँझ है और मैं बुढ़ापे की अन्तिम अवस्था को पहुँच चुका हूँ?"
قَالَ كَذٰلِكَۚ قَالَ رَبُّكَ هُوَ عَلَيَّ هَيِّنٌ وَقَدْ خَلَقْتُكَ مِنْ قَبْلُ وَلَمْ تَكُ شَيْـًٔا9
कहा, "ऐसा ही होगा। तेरे रब ने कहा कि यह मेरे लिए सरल है। इससे पहले मैं तुझे पैदा कर चुका हूँ, जबकि तू कुछ भी न था।"
قَالَ رَبِّ اجْعَلْ ل۪ٓي اٰيَةًۜ قَالَ اٰيَتُكَ اَلَّا تُكَلِّمَ النَّاسَ ثَلٰثَ لَيَالٍ سَوِيًّا10
उसने कहा, "मेरे रब! मेरे लिए कोई निशानी निश्चित कर दे।" कहा, "तेरी निशानी यह है कि तू भला-चंगा रहकर भी तीन रात (और दिन) लोगों से बात न करे।"
فَخَرَجَ عَلٰى قَوْمِه۪ مِنَ الْمِحْرَابِ فَاَوْحٰٓى اِلَيْهِمْ اَنْ سَبِّحُوا بُكْرَةً وَعَشِيًّا11
अतः वह मेहराब से निकलकर अपने लोगों के पास आया और उनसे संकेतों में कहा, "प्रातः काल और सन्ध्या समय तसबीह करते रहो।"