306. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
19 · मरियम
يَا يَحْيٰى خُذِ الْكِتَابَ بِقُوَّةٍۜ وَاٰتَيْنَاهُ الْحُكْمَ صَبِيًّاۙ12
"ऐ यह्याऔ! किताब को मज़बूत थाम ले।" हमने उसे बचपन ही में निर्णय-शक्ति प्रदान की,
وَحَنَانًا مِنْ لَدُنَّا وَزَكٰوةًۜ وَكَانَ تَقِيًّاۙ13
और अपने पास से नरमी और शौक़ और आत्मविश्वास। और वह बड़ा डरनेवाला था
وَبَرًّا بِوَالِدَيْهِ وَلَمْ يَكُنْ جَبَّارًا عَصِيًّا14
और अपने माँ-बाप का हक़ पहचानेवाला था। और वह सरकश अवज्ञाकारी न था
وَسَلَامٌ عَلَيْهِ يَوْمَ وُلِدَ وَيَوْمَ يَمُوتُ وَيَوْمَ يُبْعَثُ حَيًّا۟15
"सलाम उस पर, जिस दिन वह पैदा हुआ और जिस दिन उसकी मृत्यु हो और जिस दिन वह जीवित करके उठाया जाए!"
وَاذْكُرْ فِي الْكِتَابِ مَرْيَمَۢ اِذِ انْتَبَذَتْ مِنْ اَهْلِهَا مَكَانًا شَرْقِيًّاۙ16
और इस किताब में मरयम की चर्चा करो, जबकि वह अपने घरवालों से अलग होकर एक पूर्वी स्थान पर चली गई
فَاتَّخَذَتْ مِنْ دُونِهِمْ حِجَابًا فَاَرْسَلْنَٓا اِلَيْهَا رُوحَنَا فَتَمَثَّلَ لَهَا بَشَرًا سَوِيًّا17
फिर उसने उनसे परदा कर लिया। तब हमने उसके पास अपनी रूह (फ़रिश्तेप) को भेजा और वह उसके सामने एक पूर्ण मनुष्य के रूप में प्रकट हुआ
قَالَتْ اِنّ۪ٓي اَعُوذُ بِالرَّحْمٰنِ مِنْكَ اِنْ كُنْتَ تَقِيًّا18
वह बोल उठी, "मैं तुझसे बचने के लिए रहमान की पनाह माँगती हूँ; यदि तू (अल्लाह का) डर रखनेवाला है (तो यहाँ से हट जाएगा) ।"
قَالَ اِنَّمَٓا اَنَا۬ رَسُولُ رَبِّكِۗ لِاَهَبَ لَكِ غُلَامًا زَكِيًّا19
उसने कहा, "मैं तो केवल तेरे रब का भेजा हुआ हूँ, ताकि तुझे नेकी और भलाई से बढ़ा हुआ लड़का दूँ।"
قَالَتْ اَنّٰى يَكُونُ ل۪ي غُلَامٌ وَلَمْ يَمْسَسْن۪ي بَشَرٌ وَلَمْ اَكُ بَغِيًّا20
वह बोली, "मेरे कहाँ से लड़का होगा, जबकि मुझे किसी आदमी ने छुआ तक नही और न मैं कोई बदचलन हूँ?"
قَالَ كَذٰلِكِۚ قَالَ رَبُّكِ هُوَ عَلَيَّ هَيِّنٌۚ وَلِنَجْعَلَهُٓ اٰيَةً لِلنَّاسِ وَرَحْمَةً مِنَّاۚ وَكَانَ اَمْرًا مَقْضِيًّا21
उसने कहा, "ऐसा ही होगा। रब ने कहा है कि यह मेरे लिए सहज है। और ऐसा इसलिए होगा (ताकि हम तुझे) और ताकि हम उसे लोगों के लिए एक निशानी बनाएँ और अपनी ओर से एक दयालुता। यह तो ऐसी बात है जिसका निर्णय हो चुका है।"
فَحَمَلَتْهُ فَانْتَبَذَتْ بِه۪ مَكَانًا قَصِيًّا22
फिर उसे उस (बच्चे) का गर्भ रह गया और वह उसे लिए हुए एक दूर के स्थान पर अलग चली गई।
فَاَجَٓاءَهَا الْمَخَاضُ اِلٰى جِذْعِ النَّخْلَةِۚ قَالَتْ يَا لَيْتَن۪ي مِتُّ قَبْلَ هٰذَا وَكُنْتُ نَسْيًا مَنْسِيًّا23
अन्ततः प्रसव पीड़ा उसे एक खजूर के तने के पास ले आई। वह कहने लगी, "क्या ही अच्छा होता कि मैं इससे पहले ही मर जाती और भूली-बिसरी हो गई होती!"
فَنَادٰيهَا مِنْ تَحْتِهَٓا اَلَّا تَحْزَن۪ي قَدْ جَعَلَ رَبُّكِ تَحْتَكِ سَرِيًّا24
उस समय उसे उसके नीचे से पुकारा, "शोकाकुल न हो। तेरे रब ने तेरे नीचे एक स्रोत प्रवाहित कर रखा है।
وَهُزّ۪ٓي اِلَيْكِ بِجِذْعِ النَّخْلَةِ تُسَاقِطْ عَلَيْكِ رُطَبًا جَنِيًّاۘ25
तू खजूर के उस वृक्ष के तने को पकड़कर अपनी ओर हिला। तेरे ऊपर ताज़ा पकी-पकी खजूरें टपक पड़ेगी