307. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
19 · मरियम
فَكُل۪ي وَاشْرَب۪ي وَقَرّ۪ي عَيْنًاۚ فَاِمَّا تَرَيِنَّ مِنَ الْبَشَرِ اَحَدًاۙ فَقُول۪ٓي اِنّ۪ي نَذَرْتُ لِلرَّحْمٰنِ صَوْمًا فَلَنْ اُكَلِّمَ الْيَوْمَ اِنْسِيًّاۚ26
अतः तू उसे खा और पी और आँखें ठंडी कर। फिर यदि तू किसी आदमी को देखे तो कह देना, मैंने तो रहमान के लिए रोज़े की मन्नत मानी है। इसलिए मैं आज किसी मनुष्य से न बोलूँगी।"
فَاَتَتْ بِه۪ قَوْمَهَا تَحْمِلُهُۜ قَالُوا يَا مَرْيَمُ لَقَدْ جِئْتِ شَيْـًٔا فَرِيًّا27
फिर वह उस बच्चे को लिए हुए अपनी क़ौम के लोगों के पास आई। वे बोले, "ऐ मरयम, तूने तो बड़ा ही आश्चर्य का काम कर डाला!
يَٓا اُخْتَ هٰرُونَ مَا كَانَ اَبُوكِ امْرَاَ سَوْءٍ وَمَا كَانَتْ اُمُّكِ بَغِيًّاۚ28
हे हारून की बहन! न तो तेरा बाप ही कोई बुरा आदमी था और न तेरी माँ ही बदचलन थी।"
فَاَشَارَتْ اِلَيْهِ۠ قَالُوا كَيْفَ نُكَلِّمُ مَنْ كَانَ فِي الْمَهْدِ صَبِيًّا29
तब उसने उस (बच्चे) की ओर संकेत किया। वे कहने लगे, "हम उससे कैसे बात करें जो पालने में पड़ा हुआ एक बच्चा है?"
قَالَ اِنّ۪ي عَبْدُ اللّٰهِ۠ اٰتَانِيَ الْكِتَابَ وَجَعَلَن۪ي نَبِيًّاۙ30
उसने कहा, "मैं अल्लाह का बन्दा हूँ। उसने मुझे किताब दी और मुझे नबी बनाया
وَجَعَلَن۪ي مُبَارَكًا اَيْنَ مَا كُنْتُۖ وَاَوْصَان۪ي بِالصَّلٰوةِ وَالزَّكٰوةِ مَا دُمْتُ حَيًّاۖ31
और मुझे बरकतवाला किया जहाँ भी मैं रहूँ, और मुझे नमाज़ और ज़कात की ताकीद की, जब तक कि मैं जीवित रहूँ
وَبَرًّا بِوَالِدَت۪يۘ وَلَمْ يَجْعَلْن۪ي جَبَّارًا شَقِيًّا32
और अपनी माँ का हक़ अदा करनेवाला बनाया। और उसने मुझे सरकश और बेनसीब नहीं बनाया
وَالسَّلَامُ عَلَيَّ يَوْمَ وُلِدْتُ وَيَوْمَ اَمُوتُ وَيَوْمَ اُبْعَثُ حَيًّا33
सलाम है मुझपर जिस दिन कि मैं पैदा हुआ और जिस दिन कि मैं मरूँ और जिस दिन कि जीवित करके उठाया जाऊँ!"
ذٰلِكَ ع۪يسَى ابْنُ مَرْيَمَۚ قَوْلَ الْحَقِّ الَّذ۪ي ف۪يهِ يَمْتَرُونَ34
सच्ची और पक्की बात की स्पष्ट से यह है कि मरयम का बेटा ईसा, जिसके विषय में वे सन्देह में पड़े हुए है
مَا كَانَ لِلّٰهِ اَنْ يَتَّخِذَ مِنْ وَلَدٍۙ سُبْحَانَهُۜ اِذَا قَضٰٓى اَمْرًا فَاِنَّمَا يَقُولُ لَهُ كُنْ فَيَكُونُۜ35
अल्लाह ऐसा नहीं कि वह किसी को अपना बेटा बनाए। महान और उच्च है, वह! जब वह किसी चीज़ का फ़ैसला करता है तो बस उसे कह देता है, "हो जा!" तो वह हो जाती है। -
وَاِنَّ اللّٰهَ رَبّ۪ي وَرَبُّكُمْ فَاعْبُدُوهُۜ هٰذَا صِرَاطٌ مُسْتَق۪يمٌ36
"और निस्संदेह अल्लाह मेरा रब भी है और तुम्हारा रब भी। अतः तुम उसी की बन्दगी करो यही सीधा मार्ग है।"
فَاخْتَلَفَ الْاَحْزَابُ مِنْ بَيْنِهِمْۚ فَوَيْلٌ لِلَّذ۪ينَ كَفَرُوا مِنْ مَشْهَدِ يَوْمٍ عَظ۪يمٍ37
किन्तु उनमें कितने ही गिरोहों ने पारस्परिक वैमनस्य के कारण विभेद किया, तो जिन लोगों ने इनकार किया उनके लिए बड़ी तबाही है एक बड़े दिन की उपस्थिति से
اَسْمِعْ بِهِمْ وَاَبْصِرْۙ يَوْمَ يَاْتُونَنَاۚ لٰكِنِ الظَّالِمُونَ الْيَوْمَ ف۪ي ضَلَالٍ مُب۪ينٍ38
भली-भाँति सुननेवाले और भली-भाँति देखनेवाले होंगे, जिस दिन वे हमारे समाने आएँगे! किन्तु आज ये ज़ालिम खुली गुमराही में पड़े हुए है