313. पृष्ठ - कुरान पढ़ें

313. पृष्ठ
20 · ता हा
وَاَنَا اخْتَرْتُكَ فَاسْتَمِعْ لِمَا يُوحٰى13
मैंने तुझे चुन लिया है। अतः सुन, जो कुछ प्रकाशना की जाती है
اِنَّن۪ٓي اَنَا اللّٰهُ لَٓا اِلٰهَ اِلَّٓا اَنَا۬ فَاعْبُدْن۪يۙ وَاَقِمِ الصَّلٰوةَ لِذِكْر۪ي14
निस्संदेह मैं ही अल्लाह हूँ। मेरे सिवा कोई पूज्य-प्रभु नहीं। अतः तू मेरी बन्दगी कर और मेरी याद के लिए नमाज़ क़ायम कर
اِنَّ السَّاعَةَ اٰتِيَةٌ اَكَادُ اُخْف۪يهَا لِتُجْزٰى كُلُّ نَفْسٍ بِمَا تَسْعٰى15
निश्चय ही वह (क़ियामत की) घड़ी आनेवाली है - शीघ्र ही उसे लाऊँगा, उसे छिपाए रखता हूँ - ताकि प्रत्येक व्यक्ति जो प्रयास वह करता है, उसका बदला पाए
فَلَا يَصُدَّنَّكَ عَنْهَا مَنْ لَا يُؤْمِنُ بِهَا وَاتَّبَعَ هَوٰيهُ فَتَرْدٰى16
अतः जो कोई उसपर ईमान नहीं लाता और अपनी वासना के पीछे पड़ा है, वह तुझे उससे रोक न दे, अन्यथा तू विनष्ट हो जाएगा
وَمَا تِلْكَ بِيَم۪ينِكَ يَا مُوسٰى17
और ऐ मूसा! यह तेरे दाहिने हाथ में क्या है?"
قَالَ هِيَ عَصَايَۚ اَتَوَكَّؤُ۬ا عَلَيْهَا وَاَهُشُّ بِهَا عَلٰى غَنَم۪ي وَلِيَ ف۪يهَا مَاٰرِبُ اُخْرٰى18
उसने कहा, "यह मेरी लाठी है। मैं इसपर टेक लगाता हूँ और इससे अपनी बकरियों के लिए पत्ते झाड़ता हूँ और इससे मेरी दूसरी ज़रूरतें भी पूरी होती है।"
قَالَ اَلْقِهَا يَا مُوسٰى19
कहा, "डाल दे उसे, ऐ मूसा!"
فَاَلْقٰيهَا فَاِذَا هِيَ حَيَّةٌ تَسْعٰى20
अतः उसने डाल दिया। सहसा क्या देखते है कि वह एक साँप है, जो दौड़ रहा है
قَالَ خُذْهَا وَلَا تَخَفْ۠ سَنُع۪يدُهَا س۪يرَتَهَا الْاُولٰى21
कहा, "इसे पकड़ ले और डर मत। हम इसे इसकी पहली हालत पर लौटा देंगे
وَاضْمُمْ يَدَكَ اِلٰى جَنَاحِكَ تَخْرُجْ بَيْضَٓاءَ مِنْ غَيْرِ سُٓوءٍ اٰيَةً اُخْرٰىۙ22
और अपने हाथ अपने बाज़ू की ओर समेट ले। वह बिना किसी ऐब के रौशन दूसरी निशानी के रूप में निकलेगा
لِنُرِيَكَ مِنْ اٰيَاتِنَا الْكُبْرٰىۚ23
इसलिए कि हम तुझे अपनी बड़ी निशानियाँ दिखाएँ
اِذْهَبْ اِلٰى فِرْعَوْنَ اِنَّهُ طَغٰى۟24
तू फ़िरऔन के पास जा। वह बहुत सरकश हो गया है।"
قَالَ رَبِّ اشْرَحْ ل۪ي صَدْر۪يۙ25
उसने निवेदन किया, "मेरे रब! मेरा सीना मेरे लिए खोल दे
وَيَسِّرْ ل۪ٓي اَمْر۪يۙ26
और मेरे काम को मेरे लिए आसान कर दे
وَاحْلُلْ عُقْدَةً مِنْ لِسَان۪يۙ27
और मेरी ज़बान की गिरह खोल दे।
يَفْقَهُوا قَوْل۪يۖ28
कि वे मेरी बात समझ सकें
وَاجْعَلْ ل۪ي وَز۪يرًا مِنْ اَهْل۪يۙ29
और मेरे लिए अपने घरवालों में से एक सहायक नियुक्त कर दें,
هٰرُونَ اَخ۪يۚ30
हारून को, जो मेरा भाई है
اُشْدُدْ بِه۪ٓ اَزْر۪يۙ31
उसके द्वारा मेरी कमर मज़बूत कर
وَاَشْرِكْهُ ف۪ٓي اَمْر۪يۙ32
और उसे मेरे काम में शरीक कर दें,
كَيْ نُسَبِّحَكَ كَث۪يرًاۙ33
कि हम अधिक से अधिक तेरी तसबीह करें
وَنَذْكُرَكَ كَث۪يرًاۜ34
और तुझे ख़ूब याद करें
اِنَّكَ كُنْتَ بِنَا بَص۪يرًا35
निश्चय ही तू हमें खूब देख रहा है।"
قَالَ قَدْ اُو۫ت۪يتَ سُؤْلَكَ يَا مُوسٰى36
कहा, "दिया गया तुझे जो तूने माँगा, ऐ मूसा!
وَلَقَدْ مَنَنَّا عَلَيْكَ مَرَّةً اُخْرٰىۙ37
हम तो तुझपर एक बार और भी उपकार कर चुके है