314. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
20 · ता हा
اِذْ اَوْحَيْنَٓا اِلٰٓى اُمِّكَ مَا يُوحٰىۙ38
जब हमने तेरी माँ के दिल में यह बात डाली थी, जो अब प्रकाशना की जा रही है,
اَنِ اقْذِف۪يهِ فِي التَّابُوتِ فَاقْذِف۪يهِ فِي الْيَمِّ فَلْيُلْقِهِ الْيَمُّ بِالسَّاحِلِ يَاْخُذْهُ عَدُوٌّ ل۪ي وَعَدُوٌّ لَهُۜ وَاَلْقَيْتُ عَلَيْكَ مَحَبَّةً مِنّ۪يۚ وَلِتُصْنَعَ عَلٰى عَيْن۪يۢ39
कि उसको सन्दूक में रख दे; फिर उसे दरिया में डाल दे; फिर दरिया उसे तट पर डाल दे कि उसे मेरा शत्रु और उसका शत्रु उठा ले। मैंने अपनी ओर से तुझपर अपना प्रेम डाला। (ताकि तू सुरक्षित रहे) और ताकि मेरी आँख के सामने तेरा पालन-पोषण हो
اِذْ تَمْش۪ٓي اُخْتُكَ فَتَقُولُ هَلْ اَدُلُّكُمْ عَلٰى مَنْ يَكْفُلُهُۜ فَرَجَعْنَاكَ اِلٰٓى اُمِّكَ كَيْ تَقَرَّ عَيْنُهَا وَلَا تَحْزَنَۜ وَقَتَلْتَ نَفْسًا فَنَجَّيْنَاكَ مِنَ الْغَمِّ وَفَتَنَّاكَ فُتُونًا۠ فَلَبِثْتَ سِن۪ينَ ف۪ٓي اَهْلِ مَدْيَنَ ثُمَّ جِئْتَ عَلٰى قَدَرٍ يَا مُوسٰى40
याद कर जबकि तेरी बहन जाती और कहती थी, क्या मैं तुम्हें उसका पता बता दूँ जो इसका पालन-पोषण अपने ज़िम्मे ले ले? इस प्रकार हमने फिर तुझे तेरी माँ के पास पहुँचा दिया, ताकि उसकी आँख ठंड़ी हो और वह शोकाकुल न हो। और हमने तुझे भली-भाँति परखा। फिर तू कई वर्ष मदयन के लोगों में ठहरा रहा। फिर ऐ मूसा! तू ख़ास समय पर आ गया है
وَاصْطَنَعْتُكَ لِنَفْس۪يۚ41
हमने तुझे अपने लिए तैयार किया है
اِذْهَبْ اَنْتَ وَاَخُوكَ بِاٰيَات۪ي وَلَا تَنِيَا ف۪ي ذِكْر۪يۚ42
जो, तू और तेरी भाई मेरी निशानियो के साथ; और मेरी याद में ढ़ीले मत पड़ना
اِذْهَبَٓا اِلٰى فِرْعَوْنَ اِنَّهُ طَغٰىۚ43
जाओ दोनों, फ़िरऔन के पास, वह सरकश हो गया है
فَقُولَا لَهُ قَوْلًا لَيِّنًا لَعَلَّهُ يَتَذَكَّرُ اَوْ يَخْشٰى44
उससे नर्म बात करना, कदाचित वह ध्यान दे या डरे।"
قَالَا رَبَّنَٓا اِنَّنَا نَخَافُ اَنْ يَفْرُطَ عَلَيْنَٓا اَوْ اَنْ يَطْغٰى45
दोनों ने कहा, "ऐ हमारे रब! हमें इसका भय है कि वह हमपर ज़्यादती करे या सरकशी करने लग जाए।"
قَالَ لَا تَخَافَٓا اِنَّن۪ي مَعَكُمَٓا اَسْمَعُ وَاَرٰى46
कहा, "डरो नहीं, मै तुम्हारे साथ हूँ। सुनता और देखता हूँ
فَاْتِيَاهُ فَقُولَٓا اِنَّا رَسُولَا رَبِّكَ فَاَرْسِلْ مَعَنَا بَن۪ٓي اِسْرَٓاء۪يلَ وَلَا تُعَذِّبْهُمْۜ قَدْ جِئْنَاكَ بِاٰيَةٍ مِنْ رَبِّكَۜ وَالسَّلَامُ عَلٰى مَنِ اتَّبَعَ الْهُدٰى47
अतः जाओ, उसके पास और कहो, हम तेरे रब के रसूल है। इसराईल की सन्तान को हमारे साथ भेज दे। और उन्हें यातना न दे। हम तेरे पास तेरे रब की निशानी लेकर आए है। और सलामती है उसके लिए जो संमार्ग का अनुसरण करे!
اِنَّا قَدْ اُوحِيَ اِلَيْنَٓا اَنَّ الْعَذَابَ عَلٰى مَنْ كَذَّبَ وَتَوَلّٰى48
निस्संदेह हमारी ओर प्रकाशना हुई है कि यातना उसके लिए है, जो झुठलाए और मुँह फेरे।"
قَالَ فَمَنْ رَبُّكُمَا يَا مُوسٰى49
उसने कहा, "अच्छा, तुम दोनों का रब कौन है, मूसा?"
قَالَ رَبُّنَا الَّذ۪ٓي اَعْطٰى كُلَّ شَيْءٍ خَلْقَهُ ثُمَّ هَدٰى50
कहा, "हमारा रब वह है जिसने हर चीज़ को उसकी आकृति दी, फिर तदनुकूव निर्देशन किया।"
قَالَ فَمَا بَالُ الْقُرُونِ الْاُولٰى51
उसने कहा, "अच्छा तो उन नस्लों का क्या हाल है, जो पहले थी?"