315. पृष्ठ - कुरान पढ़ें

315. पृष्ठ
20 · ता हा
قَالَ عِلْمُهَا عِنْدَ رَبّ۪ي ف۪ي كِتَابٍۚ لَا يَضِلُّ رَبّ۪ي وَلَا يَنْسٰىۘ52
कहा, "उसका ज्ञान मेरे रब के पास एक किताब में सुरक्षित है। मेरा रब न चूकता है और न भूलता है।"
اَلَّذ۪ي جَعَلَ لَكُمُ الْاَرْضَ مَهْدًا وَسَلَكَ لَكُمْ ف۪يهَا سُبُلًا وَاَنْزَلَ مِنَ السَّمَٓاءِ مَٓاءًۜ فَاَخْرَجْنَا بِه۪ٓ اَزْوَاجًا مِنْ نَبَاتٍ شَتّٰى53
"वही है जिसने तुम्हारे लिए धरती को पालना (बिछौना) बनाया और उसने तुम्हारे लिए रास्ते निकाले और आकाश से पानी उतारा। फिर हमने उसके द्वारा विभिन्न प्रकार के पेड़-पौधे निकाले
كُلُوا وَارْعَوْا اَنْعَامَكُمْۜ اِنَّ ف۪ي ذٰلِكَ لَاٰيَاتٍ لِاُو۬لِي النُّهٰى۟54
खाओ और अपने चौपायों को भी चराओ! निस्संदेह इसमें बुद्धिमानों के लिए बहुत-सी निशानियाँ है
مِنْهَا خَلَقْنَاكُمْ وَف۪يهَا نُع۪يدُكُمْ وَمِنْهَا نُخْرِجُكُمْ تَارَةً اُخْرٰى55
उसी से हमने तुम्हें पैदा किया और उसी में हम तुम्हें लौटाते है और उसी से तुम्हें दूसरी बार निकालेंगे।"
وَلَقَدْ اَرَيْنَاهُ اٰيَاتِنَا كُلَّهَا فَكَذَّبَ وَاَبٰى56
और हमने फ़िरऔन को अपनी सब निशानियाँ दिखाई, किन्तु उसने झुठलाया और इनकार किया।-
قَالَ اَجِئْتَنَا لِتُخْرِجَنَا مِنْ اَرْضِنَا بِسِحْرِكَ يَا مُوسٰى57
उसने कहा, "ऐ मूसा! क्या तू हमारे पास इसलिए आया है कि अपने जादू से हमको हमारे अपने भूभाग से निकाल दे?
فَلَنَاْتِيَنَّكَ بِسِحْرٍ مِثْلِه۪ فَاجْعَلْ بَيْنَنَا وَبَيْنَكَ مَوْعِدًا لَا نُخْلِفُهُ نَحْنُ وَلَٓا اَنْتَ مَكَانًا سُوًى58
अच्छा, हम भी तेरे पास ऐसा ही जादू लाते है। अब हमारे और अपने बीच एक निश्चित स्थान ठहरा ले, कोई बीच की जगह, न हम इसके विरुद्ध जाएँ और न तू।"
قَالَ مَوْعِدُكُمْ يَوْمُ الزّ۪ينَةِ وَاَنْ يُحْشَرَ النَّاسُ ضُحًى59
कहा, "उत्सव का दिन तुम्हारे वादे का है और यह कि लोग दिन चढ़े इकट्ठे हो जाएँ।"
فَتَوَلّٰى فِرْعَوْنُ فَجَمَعَ كَيْدَهُ ثُمَّ اَتٰى60
तब फ़िरऔन ने पलटकर अपने सारे हथकंडे जुटाए। और आ गया
قَالَ لَهُمْ مُوسٰى وَيْلَكُمْ لَا تَفْتَرُوا عَلَى اللّٰهِ كَذِبًا فَيُسْحِتَكُمْ بِعَذَابٍۚ وَقَدْ خَابَ مَنِ افْتَرٰى61
मूसा ने उन लोगों से कहा, "तबाही है तुम्हारी; झूठ घड़कर अल्लाह पर न थोपो कि वह तुम्हें एक यातना से विनष्ट कर दे और झूठ जिस किसी ने भी घड़कर थोपा, वह असफल रहा।"
فَتَنَازَعُٓوا اَمْرَهُمْ بَيْنَهُمْ وَاَسَرُّوا النَّجْوٰى62
इसपर उन्होंने परस्पर बड़ा मतभेद किया औऱ और चुपके-चुपके कानाफूसी की
قَالُٓوا اِنْ هٰذَانِ لَسَاحِرَانِ يُر۪يدَانِ اَنْ يُخْرِجَاكُمْ مِنْ اَرْضِكُمْ بِسِحْرِهِمَا وَيَذْهَبَا بِطَر۪يقَتِكُمُ الْمُثْلٰى63
कहने लगे, "ये दोनों जादूगर है, चाहते है कि अपने जादू से तुम्हें तुम्हारे भूभाग से निकाल बाहर करें। और तुम्हारी उत्तम और उच्च प्रणाली को तहस-नहस करके रख दे।"
فَاَجْمِعُوا كَيْدَكُمْ ثُمَّ ائْتُوا صَفًّاۚ وَقَدْ اَفْلَحَ الْيَوْمَ مَنِ اسْتَعْلٰى64
अतः तुम सब मिलकर अपना उपाय जुटा लो, फिर पंक्तिबद्ध होकर आओ। आज तो प्रभावी रहा, वही सफल है।"