317. पृष्ठ - कुरान पढ़ें

317. पृष्ठ
20 · ता हा
وَلَقَدْ اَوْحَيْنَٓا اِلٰى مُوسٰٓى اَنْ اَسْرِ بِعِبَاد۪ي فَاضْرِبْ لَهُمْ طَر۪يقًا فِي الْبَحْرِ يَبَسًاۚ لَا تَخَافُ دَرَكًا وَلَا تَخْشٰى77
और हमने मूसा की ओर प्रकाशना की, "रातों रात मेरे बन्दों को लेकर निकल पड़, और उनके लिए दरिया में सूखा मार्ग निकाल ले। न तो तुझे पीछा किए जाने औऱ न पकड़े जाने का भय हो और न किसी अन्य चीज़ से तुझे डर लगे।"
فَاَتْبَعَهُمْ فِرْعَوْنُ بِجُنُودِه۪ فَغَشِيَهُمْ مِنَ الْيَمِّ مَا غَشِيَهُمْۜ78
फ़िरऔन ने अपनी सेना के साथ उनका पीछा किया। अन्ततः पानी उनपर छा गया, जैसाकि उसे उनपर छा जाना था
وَاَضَلَّ فِرْعَوْنُ قَوْمَهُ وَمَا هَدٰى79
फ़िरऔन ने अपनी क़ौम को पथभ्रष्ट किया और मार्ग न दिखाया
يَا بَن۪ٓي اِسْرَٓاء۪يلَ قَدْ اَنْجَيْنَاكُمْ مِنْ عَدُوِّكُمْ وَوٰعَدْنَاكُمْ جَانِبَ الطُّورِ الْاَيْمَنَ وَنَزَّلْنَا عَلَيْكُمُ الْمَنَّ وَالسَّلْوٰى80
ऐ ईसराईल की सन्तान! हमने तुम्हें तुम्हारे शत्रु से छुटकारा दिया और तुमसे तूर के दाहिने छोर का वादा किया और तुमपर मग्न और सलवा उतारा,
كُلُوا مِنْ طَيِّبَاتِ مَا رَزَقْنَاكُمْ وَلَا تَطْغَوْا ف۪يهِ فَيَحِلَّ عَلَيْكُمْ غَضَب۪يۚ وَمَنْ يَحْلِلْ عَلَيْهِ غَضَب۪ي فَقَدْ هَوٰى81
"खाओ, जो कुछ पाक अच्छी चीज़े हमने तुम्हें प्रदान की है, किन्तु इसमें हद से आगे न बढ़ो कि तुमपर मेरा प्रकोप टूट पड़े और जिस किसी पर मेरा प्रकोप टूटा, वह तो गिरकर ही रहा
وَاِنّ۪ي لَغَفَّارٌ لِمَنْ تَابَ وَاٰمَنَ وَعَمِلَ صَالِحًا ثُمَّ اهْتَدٰى82
और जो तौबा कर ले और ईमान लाए और अच्छा कर्म करे, फिर सीधे मार्ग पर चलता रहे, उसके लिए निश्चय ही मैं अत्यन्त क्षमाशील हूँ।" -
وَمَٓا اَعْجَلَكَ عَنْ قَوْمِكَ يَا مُوسٰى83
"और अपनी क़ौम को छोड़कर तुझे शीघ्र आने पर किस चीज़ ने उभारा, ऐ मूसा?"
قَالَ هُمْ اُو۬لَٓاءِ عَلٰٓى اَثَر۪ي وَعَجِلْتُ اِلَيْكَ رَبِّ لِتَرْضٰى84
उसने कहा, "वे मेरे पीछे ही और मैं जल्दी बढ़कर आया तेरी ओर, ऐ रब! ताकि तू राज़ी हो जाए।"
قَالَ فَاِنَّا قَدْ فَتَنَّا قَوْمَكَ مِنْ بَعْدِكَ وَاَضَلَّهُمُ السَّامِرِيُّ85
कहा, "अच्छा, तो हमने तेरे पीछे तेरी क़ौम के लोगों को आज़माइश में डाल दिया है। और सामरी ने उन्हें पथभ्रष्ट कर डाला।"
فَرَجَعَ مُوسٰٓى اِلٰى قَوْمِه۪ غَضْبَانَ اَسِفًاۚ قَالَ يَا قَوْمِ اَلَمْ يَعِدْكُمْ رَبُّكُمْ وَعْدًا حَسَنًاۜ اَفَطَالَ عَلَيْكُمُ الْعَهْدُ اَمْ اَرَدْتُمْ اَنْ يَحِلَّ عَلَيْكُمْ غَضَبٌ مِنْ رَبِّكُمْ فَاَخْلَفْتُمْ مَوْعِد۪ي86
तब मूसा अत्यन्त क्रोध और खेद में डूबा हुआ अपनी क़ौम के लोगों की ओर पलटा। कहा, "ऐ मेरी क़ौम के लोगों! क्या तुमसे तुम्हारे रब ने अच्छा वादा नहीं किया था? क्या तुमपर लम्बी मुद्दत गुज़र गई या तुमने यही चाहा कि तुमपर तुम्हारे रब का प्रकोप ही टूटे कि तुमने मेरे वादे के विरुद्ध आचरण किया?"
قَالُوا مَٓا اَخْلَفْنَا مَوْعِدَكَ بِمَلْكِنَا وَلٰكِنَّا حُمِّلْنَٓا اَوْزَارًا مِنْ ز۪ينَةِ الْقَوْمِ فَقَذَفْنَاهَا فَكَذٰلِكَ اَلْقَى السَّامِرِيُّۙ87
उन्होंने कहा, "हमने आपसे किए हुए वादे के विरुद्ध अपने अधिकार से कुछ नहीं किया, बल्कि लोगों के ज़ेवरों के बोझ हम उठाए हुए थे, फिर हमने उनको (आग में) फेंक दिया, सामरी ने इसी तरह प्रेरित किया था।"