321. पृष्ठ - कुरान पढ़ें

321. पृष्ठ
20 · ता हा
قَالَ كَذٰلِكَ اَتَتْكَ اٰيَاتُنَا فَنَس۪يتَهَاۚ وَكَذٰلِكَ الْيَوْمَ تُنْسٰى126
वह कहेगा, "इसी प्रकार (तू संसार में अंधा रहा था) । तेरे पास मेरी आयतें आई थी, तो तूने उन्हें भूला दिया था। उसी प्रकार आज तुझे भुलाया जा रहा है।"
وَكَذٰلِكَ نَجْز۪ي مَنْ اَسْرَفَ وَلَمْ يُؤْمِنْ بِاٰيَاتِ رَبِّه۪ۜ وَلَعَذَابُ الْاٰخِرَةِ اَشَدُّ وَاَبْقٰى127
इसी प्रकार हम उसे बदला देते है जो मर्यादा का उल्लंघन करे और अपने रब की आयतों पर ईमान न लाए। और आख़िरत की यातना तो अत्यन्त कठोर और अधिक स्थायी है
اَفَلَمْ يَهْدِ لَهُمْ كَمْ اَهْلَكْنَا قَبْلَهُمْ مِنَ الْقُرُونِ يَمْشُونَ ف۪ي مَسَاكِنِهِمْۜ اِنَّ ف۪ي ذٰلِكَ لَاٰيَاتٍ لِاُو۬لِي النُّهٰى۟128
फिर क्या उनको इससे भी मार्ग न मिला कि हम उनसे पहले कितनी ही नस्लों को विनष्ट कर चुके है, जिनकी बस्तियों में वे चलते-फिरते है? निस्संदेह बुद्धिमानों के लिए इसमें बहुत-सी निशानियाँ है
وَلَوْلَا كَلِمَةٌ سَبَقَتْ مِنْ رَبِّكَ لَكَانَ لِزَامًا وَاَجَلٌ مُسَمًّىۜ129
यदि तेरे रब की ओर से पहले ही एक बात निश्चित न हो गई होती और एक अवधि नियत न की जा चुकी होती, तो अवश्य ही उन्हें यातना आ पकड़ती
فَاصْبِرْ عَلٰى مَا يَقُولُونَ وَسَبِّحْ بِحَمْدِ رَبِّكَ قَبْلَ طُلُوعِ الشَّمْسِ وَقَبْلَ غُرُوبِهَاۚ وَمِنْ اٰنَٓائِ الَّيْلِ فَسَبِّحْ وَاَطْرَافَ النَّهَارِ لَعَلَّكَ تَرْضٰى130
अतः जो कुछ वे कहते है उसपर धैर्य से काम लो और अपने रब का गुणगान करो, सूर्योदय से पहले और उसके डूबने से पहले, और रात की घड़ियों में भी तसबीह करो, और दिन के किनारों पर भी, ताकि तुम राज़ी हो जाओ
وَلَا تَمُدَّنَّ عَيْنَيْكَ اِلٰى مَا مَتَّعْنَا بِه۪ٓ اَزْوَاجًا مِنْهُمْ زَهْرَةَ الْحَيٰوةِ الدُّنْيَا لِنَفْتِنَهُمْ ف۪يهِۜ وَرِزْقُ رَبِّكَ خَيْرٌ وَاَبْقٰى131
और उसकी ओर आँख उठाकर न देखो, जो कुछ हमने उनमें से विभिन्न लोगों को उपभोग के लिए दे रखा है, ताकि हम उसके द्वारा उन्हें आज़माएँ। वह तो बस सांसारिक जीवन की शोभा है। तुम्हारे रब की रोज़ी उत्तम भी है और स्थायी भी
وَاْمُرْ اَهْلَكَ بِالصَّلٰوةِ وَاصْطَبِرْ عَلَيْهَاۜ لَا نَسْـَٔلُكَ رِزْقًاۜ نَحْنُ نَرْزُقُكَۜ وَالْعَاقِبَةُ لِلتَّقْوٰى132
और अपने लोगों को नमाज़ का आदेश करो और स्वयं भी उसपर जमे रहो। हम तुमसे कोई रोज़ी नहीं माँगते। रोज़ी हम ही तुम्हें देते है, और अच्छा परिणाम तो धर्मपरायणता ही के लिए निश्चित है
وَقَالُوا لَوْلَا يَاْت۪ينَا بِاٰيَةٍ مِنْ رَبِّه۪ۜ اَوَلَمْ تَاْتِهِمْ بَيِّنَةُ مَا فِي الصُّحُفِ الْاُولٰى133
और वे कहते है कि "यह अपने रब की ओर से हमारे पास कोई निशानी क्यों नहीं लाता?" क्या उनके पास उसका स्पष्ट प्रमाण नहीं आ गया, जो कुछ कि पहले की पुस्तकों में उल्लिखित है?
وَلَوْ اَنَّٓا اَهْلَكْنَاهُمْ بِعَذَابٍ مِنْ قَبْلِه۪ لَقَالُوا رَبَّنَا لَوْلَٓا اَرْسَلْتَ اِلَيْنَا رَسُولًا فَنَتَّبِعَ اٰيَاتِكَ مِنْ قَبْلِ اَنْ نَذِلَّ وَنَخْزٰى134
यदि हम उसके पहले इन्हें किसी यातना से विनष्ट कर देते तो ये कहते कि "ऐ हमारे रब, तूने हमारे पास कोई रसूल क्यों न भेजा कि इससे पहले कि हम अपमानित और रुसवा होते, तेरी आयतों का अनुपालन करने लगते?"
قُلْ كُلٌّ مُتَرَبِّصٌ فَتَرَبَّصُواۚ فَسَتَعْلَمُونَ مَنْ اَصْحَابُ الصِّرَاطِ السَّوِيِّ وَمَنِ اهْتَدٰى135
कह दो, "हर एक प्रतीक्षा में है। अतः अब तुम भी प्रतीक्षा करो। शीघ्र ही तुम जान लोगे कि कौन सीधे मार्गवाला है और किनको मार्गदर्शन प्राप्त है।"