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322. पृष्ठ
21 · अल-अंबिया
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِيمِ
اِقْتَرَبَ لِلنَّاسِ حِسَابُهُمْ وَهُمْ ف۪ي غَفْلَةٍ مُعْرِضُونَۚ1
निकट आ गया लोगों का हिसाब और वे है कि असावधान कतराते जा रहे है
مَا يَاْت۪يهِمْ مِنْ ذِكْرٍ مِنْ رَبِّهِمْ مُحْدَثٍ اِلَّا اسْتَمَعُوهُ وَهُمْ يَلْعَبُونَۙ2
उनके पास जो ताज़ा अनुस्मृति भी उनके रब की ओर से आती है, उसे वे हँसी-खेल करते हुए ही सुनते है
لَاهِيَةً قُلُوبُهُمْۜ وَاَسَرُّوا النَّجْوٰىۗ اَلَّذ۪ينَ ظَلَمُواۗ هَلْ هٰذَٓا اِلَّا بَشَرٌ مِثْلُكُمْۚ اَفَتَاْتُونَ السِّحْرَ وَاَنْتُمْ تُبْصِرُونَ3
उनके दिल दिलचस्पियों में खोए हुए होते है। उन्होंने चुपके-चुपके कानाफूसी की - अर्थात अत्याचार की नीति अपनानेवालों ने कि "यह तो बस तुम जैसा ही एक मनुष्य है। फिर क्या तुम देखते-बूझते जादू में फँस जाओगे?"
قَالَ رَبّ۪ي يَعْلَمُ الْقَوْلَ فِي السَّمَٓاءِ وَالْاَرْضِۘ وَهُوَ السَّم۪يعُ الْعَل۪يمُ4
उसने कहा, "मेरा रब जानता है उस बात को जो आकाश और धरती में हो। और वह भली-भाँति सब कुछ सुनने, जाननेवाला है।"
بَلْ قَالُٓوا اَضْغَاثُ اَحْلَامٍ بَلِ افْتَرٰيهُ بَلْ هُوَ شَاعِرٌۚ فَلْيَاْتِنَا بِاٰيَةٍ كَمَٓا اُرْسِلَ الْاَوَّلُونَ5
नहीं, बल्कि वे कहते है, "ये तो संभ्रमित स्वप्नं है, बल्कि उसने इसे स्वयं ही घड़ लिया है, बल्कि वह एक कवि है! उसे तो हमारे पास कोई निशानी लानी चाहिए, जैसे कि (निशानियाँ लेकर) पहले के रसूल भेजे गए थे।"
مَٓا اٰمَنَتْ قَبْلَهُمْ مِنْ قَرْيَةٍ اَهْلَكْنَاهَاۚ اَفَهُمْ يُؤْمِنُونَ6
इनसे पहले कोई बस्ती भी, जिसको हमने विनष्ट किया, ईमान न लाई। फिर क्या ये ईमान लाएँगे?
وَمَٓا اَرْسَلْنَا قَبْلَكَ اِلَّا رِجَالًا نُوح۪ٓي اِلَيْهِمْ فَسْـَٔلُٓوا اَهْلَ الذِّكْرِ اِنْ كُنْتُمْ لَا تَعْلَمُونَ7
और तुमसे पहले भी हमने पुरुषों ही को रसूल बनाकर भेजा, जिनकी ओर हम प्रकाशना करते थे। - यदि तुम्हें मालूम न हो तो ज़िक्रवालों (किताबवालों) से पूछ लो। -
وَمَا جَعَلْنَاهُمْ جَسَدًا لَا يَاْكُلُونَ الطَّعَامَ وَمَا كَانُوا خَالِد۪ينَ8
उनको हमने कोई ऐसा शरीर नहीं दिया था कि वे भोजन न करते हों और न वे सदैव रहनेवाले ही थे
ثُمَّ صَدَقْنَاهُمُ الْوَعْدَ فَاَنْجَيْنَاهُمْ وَمَنْ نَشَٓاءُ وَاَهْلَكْنَا الْمُسْرِف۪ينَ9
फिर हमने उनके साथ वादे को सच्चा कर दिखाया और उन्हें हमने छुटकारा दिया, और जिसे हम चाहें उसे छुटकारा मिलता है। और मर्यादाहीनों को हमने विनष्ट कर दिया
لَقَدْ اَنْزَلْنَٓا اِلَيْكُمْ كِتَابًا ف۪يهِ ذِكْرُكُمْۜ اَفَلَا تَعْقِلُونَ۟10
लो, हमने तुम्हारी ओर एक किताब अवतरित कर दी है, जिसमें तुम्हारे लिए याददिहानी है। तो क्या तुम बुद्धि से काम नहीं लेते?