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324. पृष्ठ
21 · अल-अंबिया
وَمَٓا اَرْسَلْنَا مِنْ قَبْلِكَ مِنْ رَسُولٍ اِلَّا نُوح۪ٓي اِلَيْهِ اَنَّهُ لَٓا اِلٰهَ اِلَّٓا اَنَا۬ فَاعْبُدُونِ25
हमने तुमसे पहले जो रसूल भी भेजा, उसकी ओर यही प्रकाशना की कि " "मेरे सिवा कोई पूज्य-प्रभु नहीं। अतः तुम मेरी ही बन्दगी करो।"
وَقَالُوا اتَّخَذَ الرَّحْمٰنُ وَلَدًا سُبْحَانَهُۜ بَلْ عِبَادٌ مُكْرَمُونَۙ26
और वे कहते है कि "रहमान सन्तान रखता है।" महान हो वह! बल्कि वे तो प्रतिष्ठित बन्दे हैं
لَا يَسْبِقُونَهُ بِالْقَوْلِ وَهُمْ بِاَمْرِه۪ يَعْمَلُونَ27
उससे आगे बढ़कर नहीं बोलते और उनके आदेश का पालन करते है
يَعْلَمُ مَا بَيْنَ اَيْد۪يهِمْ وَمَا خَلْفَهُمْ وَلَا يَشْفَعُونَۙ اِلَّا لِمَنِ ارْتَضٰى وَهُمْ مِنْ خَشْيَتِه۪ مُشْفِقُونَ28
वह जानता है जो कुछ उनके आगे है और जो कुछ उनके पीछे है, और वे किसी की सिफ़ारिश नहीं करते सिवाय उसके जिसके लिए अल्लाह पसन्द करे। और वे उसके भय से डरते रहते है
وَمَنْ يَقُلْ مِنْهُمْ اِنّ۪ٓي اِلٰهٌ مِنْ دُونِه۪ فَذٰلِكَ نَجْز۪يهِ جَهَنَّمَۜ كَذٰلِكَ نَجْزِي الظَّالِم۪ينَ۟29
और जो उनमें से यह कहे कि "उनके सिवा मैं भी एक इष्ट -पूज्य हूँ।" तो हम उसे बदले में जहन्नम देंगे। ज़ालिमों को हम ऐसा ही बदला दिया करते है
اَوَلَمْ يَرَ الَّذ۪ينَ كَفَرُٓوا اَنَّ السَّمٰوَاتِ وَالْاَرْضَ كَانَتَا رَتْقًا فَفَتَقْنَاهُمَاۜ وَجَعَلْنَا مِنَ الْمَٓاءِ كُلَّ شَيْءٍ حَيٍّۜ اَفَلَا يُؤْمِنُونَ30
क्या उन लोगों ने जिन्होंने इनकार किया, देखा नहीं कि ये आकाश और धरती बन्द थे। फिर हमने उन्हें खोल दिया। और हमने पानी से हर जीवित चीज़ बनाई, तो क्या वे मानते नहीं?
وَجَعَلْنَا فِي الْاَرْضِ رَوَاسِيَ اَنْ تَم۪يدَ بِهِمْ وَجَعَلْنَا ف۪يهَا فِجَاجًا سُبُلًا لَعَلَّهُمْ يَهْتَدُونَ31
और हमने धरती में अटल पहाड़ रख दिए, ताकि कहीं ऐसा न हो कि वह उन्हें लेकर ढुलक जाए और हमने उसमें ऐसे दर्रे बनाए कि रास्तों का काम देते है, ताकि वे मार्ग पाएँ
وَجَعَلْنَا السَّمَٓاءَ سَقْفًا مَحْفُوظًاۚ وَهُمْ عَنْ اٰيَاتِهَا مُعْرِضُونَ32
और हमने आकाश को एक सुरक्षित छत बनाया, किन्तु वे है कि उसकी निशानियों से कतरा जाते है
وَهُوَ الَّذ۪ي خَلَقَ الَّيْلَ وَالنَّهَارَ وَالشَّمْسَ وَالْقَمَرَۜ كُلٌّ ف۪ي فَلَكٍ يَسْبَحُونَ33
वही है जिसने रात और दिन बनाए और सूर्य और चन्द्र भी। प्रत्येक अपने-अपने कक्ष में तैर रहा है
وَمَا جَعَلْنَا لِبَشَرٍ مِنْ قَبْلِكَ الْخُلْدَۜ اَفَا۬ئِنْ مِتَّ فَهُمُ الْخَالِدُونَ34
हमने तुमसे पहले भी किसी आदमी के लिए अमरता नहीं रखी। फिर क्या यदि तुम मर गए तो वे सदैव रहनेवाले है?
كُلُّ نَفْسٍ ذَٓائِقَةُ الْمَوْتِۜ وَنَبْلُوكُمْ بِالشَّرِّ وَالْخَيْرِ فِتْنَةًۜ وَاِلَيْنَا تُرْجَعُونَ35
हर जीव को मौत का मज़ा चखना है और हम अच्छी और बुरी परिस्थितियों में डालकर तुम सबकी परीक्षा करते है। अन्ततः तुम्हें हमारी ही ओर पलटकर आना है