326. पृष्ठ - कुरान पढ़ें

326. पृष्ठ
21 · अल-अंबिया
قُلْ اِنَّمَٓا اُنْذِرُكُمْ بِالْوَحْيِۘ وَلَا يَسْمَعُ الصُّمُّ الدُّعَٓاءَ اِذَا مَا يُنْذَرُونَ45
कह दो, "मैं तो बस प्रकाशना के आधार पर तुम्हें सावधान करता हूँ।" किन्तु बहरे पुकार को नहीं सुनते, जबकि उन्हें सावधान किया जाए
وَلَئِنْ مَسَّتْهُمْ نَفْحَةٌ مِنْ عَذَابِ رَبِّكَ لَيَقُولُنَّ يَا وَيْلَنَٓا اِنَّا كُنَّا ظَالِم۪ينَ46
और यदि तुम्हारे रब की यातना का कोई झोंका भी उन्हें छू जाए तो वे कहन लगे, "हाय, हमारा दुर्भाग्य! निस्संदेह हम ज़ालिम थे।"
وَنَضَعُ الْمَوَاز۪ينَ الْقِسْطَ لِيَوْمِ الْقِيٰمَةِ فَلَا تُظْلَمُ نَفْسٌ شَيْـًٔاۜ وَاِنْ كَانَ مِثْقَالَ حَبَّةٍ مِنْ خَرْدَلٍ اَتَيْنَا بِهَاۜ وَكَفٰى بِنَا حَاسِب۪ينَ47
और हम बज़नी, अच्छे न्यायपूर्ण कामों को क़ियामत के दिन के लिए रख रहे है। फिर किसी व्यक्ति पर कुछ भी ज़ुल्म न होगा, यद्यपि वह (कर्म) राई के दाने के बराबर हो, हम उसे ला उपस्थित करेंगे। और हिसाब करने के लिए हम काफ़ी है
وَلَقَدْ اٰتَيْنَا مُوسٰى وَهٰرُونَ الْفُرْقَانَ وَضِيَٓاءً وَذِكْرًا لِلْمُتَّق۪ينَۙ48
और हम मूसा और हारून को कसौटी और रौशनी और याददिहानी प्रदान कर चुके हैं, उन डर रखनेवालों के लिए
اَلَّذ۪ينَ يَخْشَوْنَ رَبَّهُمْ بِالْغَيْبِ وَهُمْ مِنَ السَّاعَةِ مُشْفِقُونَ49
जो परोक्ष में रहते हुए अपने रब से डरते है और उन्हें क़ियामत की घड़ी का भय लगा रहता है
وَهٰذَا ذِكْرٌ مُبَارَكٌ اَنْزَلْنَاهُۜ اَفَاَنْتُمْ لَهُ مُنْكِرُونَ۟50
और वह बरकतवाली अनुस्मृति है, जिसको हमने अवतरित किया है। तो क्या तुम्हें इससे इनकार है
وَلَقَدْ اٰتَيْنَٓا اِبْرٰه۪يمَ رُشْدَهُ مِنْ قَبْلُ وَكُنَّا بِه۪ عَالِم۪ينَۚ51
और इससे पहले हमने इबराहीम को उसकी हिदायत और समझ दी थी - और हम उसे भली-भाँति जानते थे। -
اِذْ قَالَ لِاَب۪يهِ وَقَوْمِه۪ مَا هٰذِهِ التَّمَاث۪يلُ الَّت۪ٓي اَنْتُمْ لَهَا عَاكِفُونَ52
जब उसने अपने बाप और अपनी क़ौम से कहा, "ये मूर्तियाँ क्या है, जिनसे तुम लगे बैठे हो?"
قَالُوا وَجَدْنَٓا اٰبَٓاءَنَا لَهَا عَابِد۪ينَ53
वे बोले, "हमने अपने बाप-दादा को इन्हीं की पूजा करते पाया है।"
قَالَ لَقَدْ كُنْتُمْ اَنْتُمْ وَاٰبَٓاؤُ۬كُمْ ف۪ي ضَلَالٍ مُب۪ينٍ54
उसने कहा, "तुम भी और तुम्हारे बाप-दादा भी खुली गुमराही में हो।"
قَالُٓوا اَجِئْتَنَا بِالْحَقِّ اَمْ اَنْتَ مِنَ اللَّاعِب۪ينَ55
उन्होंने कहा, "क्या तू हमारे पास सत्य लेकर आया है या यूँ ही खेल कर रहा है?"
قَالَ بَلْ رَبُّكُمْ رَبُّ السَّمٰوَاتِ وَالْاَرْضِ الَّذ۪ي فَطَرَهُنَّۘ وَاَنَا۬ عَلٰى ذٰلِكُمْ مِنَ الشَّاهِد۪ينَ56
उसने कहा, "नहीं, बल्कि बात यह है कि तुम्हारा रब आकाशों और धरती का रब है, जिसने उनको पैदा किया है और मैं इसपर तुम्हारे सामने गवाही देता हूँ
وَتَاللّٰهِ لَاَك۪يدَنَّ اَصْنَامَكُمْ بَعْدَ اَنْ تُوَلُّوا مُدْبِر۪ينَ57
और अल्लाह की क़सम! इसके पश्चात कि तुम पीठ फेरकर लौटो, मैं तुम्हारी मूर्तियों के साथ अवश्य् एक चाल चलूँगा।"