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327. पृष्ठ
21 · अल-अंबिया
فَجَعَلَهُمْ جُذَاذًا اِلَّا كَب۪يرًا لَهُمْ لَعَلَّهُمْ اِلَيْهِ يَرْجِعُونَ58
अतएव उसने उन्हें खंड-खंड कर दिया सिवाय उनकी एक बड़ी के, कदाचित वे उसकी ओर रुजू करें
قَالُوا مَنْ فَعَلَ هٰذَا بِاٰلِهَتِنَٓا اِنَّهُ لَمِنَ الظَّالِم۪ينَ59
वे कहने लगे, "किसने हमारे देवताओं के साथ यह हरकत की है? निश्चय ही वह कोई ज़ालिम है।"
قَالُوا سَمِعْنَا فَتًى يَذْكُرُهُمْ يُقَالُ لَهُٓ اِبْرٰه۪يمُۜ60
(कुछ लोग) बोले, "हमने एक नवयुवक को, जिसे इबराहीम कहते है, उसके विषय में कुछ कहते सुना है।"
قَالُوا فَاْتُوا بِه۪ عَلٰٓى اَعْيُنِ النَّاسِ لَعَلَّهُمْ يَشْهَدُونَ61
उन्होंने कहा, "तो उसे ले आओ लोगों की आँखों के सामने कि वे भी गवाह रहें।"
قَالُٓوا ءَاَنْتَ فَعَلْتَ هٰذَا بِاٰلِهَتِنَا يَٓا اِبْرٰه۪يمُۜ62
उन्होंने कहा, "क्या तूने हमारे देवों के साथ यह हरकत की है, ऐ इबराहीम!"
قَالَ بَلْ فَعَلَهُۗ كَب۪يرُهُمْ هٰذَا فَسْـَٔلُوهُمْ اِنْ كَانُوا يَنْطِقُونَ63
उसने कहा, "नहीं, बल्कि उनके इस बड़े ने की होगी, उन्हीं से पूछ लो, यदि वे बोलते हों।"
فَرَجَعُٓوا اِلٰٓى اَنْفُسِهِمْ فَقَالُٓوا اِنَّكُمْ اَنْتُمُ الظَّالِمُونَۙ64
तब वे उसकी ओर पलटे और कहने लगे, "वास्तव में, ज़ालिम तो तुम्हीं लोग हो।"
ثُمَّ نُكِسُوا عَلٰى رُؤُ۫سِهِمْۚ لَقَدْ عَلِمْتَ مَا هٰٓؤُ۬لَٓاءِ يَنْطِقُونَ65
किन्तु फिर वे बिल्कुल औंधे हो रहे। (फिर बोले,) "तुझे तो मालूम है कि ये बोलते नहीं।"
قَالَ اَفَتَعْبُدُونَ مِنْ دُونِ اللّٰهِ مَا لَا يَنْفَعُكُمْ شَيْـًٔا وَلَا يَضُرُّكُمْۜ66
उसने कहा, "फिर क्या तुम अल्लाह से इतर उसे पूजते हो, जो न तुम्हें कुछ लाभ पहुँचा सके और न तुम्हें कोई हानि पहुँचा सके?
اُفٍّ لَكُمْ وَلِمَا تَعْبُدُونَ مِنْ دُونِ اللّٰهِۜ اَفَلَا تَعْقِلُونَ67
धिक्कार है तुमपर, और उनपर भी, जिनको तुम अल्लाह को छोड़कर पूजते हो! तो क्या तुम बुद्धि से काम नहीं लेते?"
قَالُوا حَرِّقُوهُ وَانْصُرُٓوا اٰلِهَتَكُمْ اِنْ كُنْتُمْ فَاعِل۪ينَ68
उन्होंने कहा, "जला दो उसे, और सहायक हो अपने देवताओं के, यदि तुम्हें कुछ करना है।"
قُلْنَا يَا نَارُ كُون۪ي بَرْدًا وَسَلَامًا عَلٰٓى اِبْرٰه۪يمَۙ69
हमने कहा, "ऐ आग! ठंड़ी हो जा और सलामती बन जा इबराहीम पर!"
وَاَرَادُوا بِه۪ كَيْدًا فَجَعَلْنَاهُمُ الْاَخْسَر۪ينَۚ70
उन्होंने उसके साथ एक चाल चलनी चाही, किन्तु हमने उन्हीं को घाटे में डाल दिया
وَنَجَّيْنَاهُ وَلُوطًا اِلَى الْاَرْضِ الَّت۪ي بَارَكْنَا ف۪يهَا لِلْعَالَم۪ينَ71
और हम उसे और लूत को बचाकर उस भूभाग की ओर निकाल ले गए, जिसमें हमने दुनियावालों के लिए बरकतें रखी थीं
وَوَهَبْنَا لَهُٓ اِسْحٰقَۜ وَيَعْقُوبَ نَافِلَةًۜ وَكُلًّا جَعَلْنَا صَالِح۪ينَ72
और हमने उसे इसहाक़ प्रदान किया और तदधिक याक़ूब भी। और प्रत्येक को हमने नेक बनाया