33. पृष्ठ - कुरान पढ़ें

33. पृष्ठ
2 · अल-बक़रा
سَلْ بَن۪ٓي اِسْرَٓاء۪يلَ كَمْ اٰتَيْنَاهُمْ مِنْ اٰيَةٍ بَيِّنَةٍۜ وَمَنْ يُبَدِّلْ نِعْمَةَ اللّٰهِ مِنْ بَعْدِ مَا جَٓاءَتْهُ فَاِنَّ اللّٰهَ شَد۪يدُ الْعِقَابِ211
इसराईल की सन्तान से पूछो, हमने उन्हें कितनी खुली-खुली निशानियाँ प्रदान की। और जो अल्लाह की नेमत को इसके बाद कि वह उसे पहुँच चुकी हो बदल डाले, तो निस्संदेह अल्लाह भी कठोर दंड देनेवाला है
زُيِّنَ لِلَّذ۪ينَ كَفَرُوا الْحَيٰوةُ الدُّنْيَا وَيَسْخَرُونَ مِنَ الَّذ۪ينَ اٰمَنُواۢ وَالَّذ۪ينَ اتَّقَوْا فَوْقَهُمْ يَوْمَ الْقِيٰمَةِۜ وَاللّٰهُ يَرْزُقُ مَنْ يَشَٓاءُ بِغَيْرِ حِسَابٍ212
इनकार करनेवाले सांसारिक जीवन पर रीझे हुए है और ईमानवालों का उपहास करते है, जबकि जो लोग अल्लाह का डर रखते है, वे क़ियामत के दिन उनसे ऊपर होंगे। अल्लाह जिस चाहता है बेहिसाब देता है
كَانَ النَّاسُ اُمَّةً وَاحِدَةً فَبَعَثَ اللّٰهُ النَّبِيّ۪نَ مُبَشِّر۪ينَ وَمُنْذِر۪ينَۖ وَاَنْزَلَ مَعَهُمُ الْكِتَابَ بِالْحَقِّ لِيَحْكُمَ بَيْنَ النَّاسِ ف۪يمَا اخْتَلَفُوا ف۪يهِۜ وَمَا اخْتَلَفَ ف۪يهِ اِلَّا الَّذ۪ينَ اُو۫تُوهُ مِنْ بَعْدِ مَا جَٓاءَتْهُمُ الْبَيِّنَاتُ بَغْيًا بَيْنَهُمْۚ فَهَدَى اللّٰهُ الَّذ۪ينَ اٰمَنُوا لِمَا اخْتَلَفُوا ف۪يهِ مِنَ الْحَقِّ بِاِذْنِه۪ۜ وَاللّٰهُ يَهْد۪ي مَنْ يَشَٓاءُ اِلٰى صِرَاطٍ مُسْتَق۪يمٍ213
सारे मनुष्य एक ही समुदाय थे (उन्होंने विभेद किया) तो अल्लाह ने नबियों को भेजा, जो शुभ-सूचना देनेवाले और डरानवाले थे; और उनके साथ हक़ पर आधारित किताब उतारी, ताकि लोगों में उन बातों का जिनमें वे विभेद कर रहे है, फ़ैसला कर दे। इसमें विभेद तो बस उन्हीं लोगों ने, जिन्हें वह मिली थी, परस्पर ज़्यादती करने के लिए इसके पश्चात किया, जबकि खुली निशानियाँ उनके पास आ चुकी थी। अतः ईमानवालों को अल्लाह ने अपनी अनूज्ञा से उस सत्य के विषय में मार्गदर्शन किया, जिसमें उन्होंने विभेद किया था। अल्लाह जिसे चाहता है, सीधे मार्ग पर चलाता है
اَمْ حَسِبْتُمْ اَنْ تَدْخُلُوا الْجَنَّةَ وَلَمَّا يَاْتِكُمْ مَثَلُ الَّذ۪ينَ خَلَوْا مِنْ قَبْلِكُمْۜ مَسَّتْهُمُ الْبَاْسَٓاءُ وَالضَّرَّٓاءُ وَزُلْزِلُوا حَتّٰى يَقُولَ الرَّسُولُ وَالَّذ۪ينَ اٰمَنُوا مَعَهُ مَتٰى نَصْرُ اللّٰهِۜ اَلَٓا اِنَّ نَصْرَ اللّٰهِ قَر۪يبٌ214
क्या तुमने यह समझ रखा है कि जन्नत में प्रवेश पा जाओगे, जबकि अभी तुम पर वह सब कुछ नहीं बीता है जो तुमसे पहले के लोगों पर बीत चुका? उनपर तंगियाँ और तकलीफ़े आई और उन्हें हिला मारा गया यहाँ तक कि रसूल बोल उठे और उनके साथ ईमानवाले भी कि अल्लाह की सहायता कब आएगी? जान लो! अल्लाह की सहायता निकट है
يَسْـَٔلُونَكَ مَاذَا يُنْفِقُونَۜ قُلْ مَٓا اَنْفَقْتُمْ مِنْ خَيْرٍ فَلِلْوَالِدَيْنِ وَالْاَقْرَب۪ينَ وَالْيَتَامٰى وَالْمَسَاك۪ينِ وَابْنِ السَّب۪يلِۜ وَمَا تَفْعَلُوا مِنْ خَيْرٍ فَاِنَّ اللّٰهَ بِه۪ عَل۪يمٌ215
वे तुमसे पूछते है, "कितना ख़र्च करें?" कहो, "(पहले यह समझ लो कि) जो माल भी तुमने ख़र्च किया है, वह तो माँ-बाप, नातेदारों और अनाथों, और मुहताजों और मुसाफ़िरों के लिए ख़र्च हुआ है। और जो भलाई भी तुम करो, निस्संदेह अल्लाह उसे भली-भाँति जान लेगा।