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331. पृष्ठ
21 · अल-अंबिया
لَا يَسْمَعُونَ حَس۪يسَهَاۚ وَهُمْ ف۪ي مَا اشْتَهَتْ اَنْفُسُهُمْ خَالِدُونَۚ102
वे उसकी आहट भी नहीं सुनेंगे और अपनी मनचाही चीज़ों के मध्य सदैव रहेंगे
لَا يَحْزُنُهُمُ الْفَزَعُ الْاَكْبَرُ وَتَتَلَقّٰيهُمُ الْمَلٰٓئِكَةُۜ هٰذَا يَوْمُكُمُ الَّذ۪ي كُنْتُمْ تُوعَدُونَ103
वह सबसे बड़ी घबराहट उन्हें ग़म में न डालेगी। फ़रिश्ते उनका स्वागत करेगें, "यह तुम्हारा वही दिन है, जिसका तुमसे वादा किया जाता रहा है।"
يَوْمَ نَطْوِي السَّمَٓاءَ كَطَيِّ السِّجِلِّ لِلْكُتُبِۜ كَمَا بَدَاْنَٓا اَوَّلَ خَلْقٍ نُع۪يدُهُۜ وَعْدًا عَلَيْنَاۜ اِنَّا كُنَّا فَاعِل۪ينَ104
जिस दिन हम आकाश को लपेट लेंगे, जैसे पंजी में पन्ने लपेटे जाते हैं, जिस प्रकाऱ पहले हमने सृष्टि का आरम्भ किया था उसी प्रकार हम उसकी पुनरावृत्ति करेंगे। यह हमारे ज़िम्मे एक वादा है। निश्चय ही हमें यह करना है
وَلَقَدْ كَتَبْنَا فِي الزَّبُورِ مِنْ بَعْدِ الذِّكْرِ اَنَّ الْاَرْضَ يَرِثُهَا عِبَادِيَ الصَّالِحُونَ105
और हम ज़बूर में याददिहानी के पश्चात लिए चुके है कि "धरती के वारिस मेरे अच्छे बन्दें होंगे।"
اِنَّ ف۪ي هٰذَا لَبَلَاغًا لِقَوْمٍ عَابِد۪ينَۜ106
इसमें बन्दगी करनेवालों लोगों के लिए एक संदेश है
وَمَٓا اَرْسَلْنَاكَ اِلَّا رَحْمَةً لِلْعَالَم۪ينَ107
हमने तुम्हें सारे संसार के लिए बस एक सर्वथा दयालुता बनाकर भेजा है
قُلْ اِنَّمَا يُوحٰٓى اِلَيَّ اَنَّمَٓا اِلٰهُكُمْ اِلٰهٌ وَاحِدٌۚ فَهَلْ اَنْتُمْ مُسْلِمُونَ108
कहो, "मेरे पास को बस यह प्रकाशना की जाती है कि तुम्हारा पूज्य-प्रभु अकेला पूज्य-प्रभु है। फिर क्या तुम आज्ञाकारी होते हो?"
فَاِنْ تَوَلَّوْا فَقُلْ اٰذَنْتُكُمْ عَلٰى سَوَٓاءٍۜ وَاِنْ اَدْر۪ٓي اَقَر۪يبٌ اَمْ بَع۪يدٌ مَا تُوعَدُونَ109
फिर यदि वे मुँह फेरें तो कह दो, "मैंने तुम्हें सामान्य रूप से सावधान कर दिया है। अब मैं यह नहीं जानता कि जिसका तुमसे वादा किया जा रहा है वह निकट है या दूर।"
اِنَّهُ يَعْلَمُ الْجَهْرَ مِنَ الْقَوْلِ وَيَعْلَمُ مَا تَكْتُمُونَ110
निश्चय ही वह ऊँची आवाज़ में कही हुई बात को जानता है और उसे भी जानता है जो तुम छिपाते हो
وَاِنْ اَدْر۪ي لَعَلَّهُ فِتْنَةٌ لَكُمْ وَمَتَاعٌ اِلٰى ح۪ينٍ111
मुझे नहीं मालूम कि कदाचित यह तुम्हारे लिए एक परीक्षा हो और एक नियत समय तक के लिए जीवन-सुख
قَالَ رَبِّ احْكُمْ بِالْحَقِّۜ وَرَبُّنَا الرَّحْمٰنُ الْمُسْتَعَانُ عَلٰى مَا تَصِفُونَ112
उसने कहा, "ऐ मेरे रब, सत्य का फ़ैसला कर दे! और हमारा रब रहमान है। उसी से सहायता की प्रार्थना है, उन बातों के मुक़ाबले में जो तुम लोग बयान करते हो।"