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333. पृष्ठ
22 · अल-हज
ذٰلِكَ بِاَنَّ اللّٰهَ هُوَ الْحَقُّ وَاَنَّهُ يُحْيِ الْمَوْتٰى وَاَنَّهُ عَلٰى كُلِّ شَيْءٍ قَد۪يرٌۙ6
यह इसलिए कि अल्लाह ही सत्य है और वह मुर्दों को जीवित करता है और उसे हर चीज़ की सामर्थ्य प्राप्ती है
وَاَنَّ السَّاعَةَ اٰتِيَةٌ لَا رَيْبَ ف۪يهَاۙ وَاَنَّ اللّٰهَ يَبْعَثُ مَنْ فِي الْقُبُورِ7
और यह कि क़ियामत की घड़ी आनेवाली है, इसमें कोई सन्देह नहीं है। और यह कि अल्लाह उन्हें उठाएगा जो क़ब्रों में है
وَمِنَ النَّاسِ مَنْ يُجَادِلُ فِي اللّٰهِ بِغَيْرِ عِلْمٍ وَلَا هُدًى وَلَا كِتَابٍ مُن۪يرٍۙ8
और लोगों मे कोई ऐसा है जो किसी ज्ञान, मार्गदर्शन और प्रकाशमान किताब के बिना अल्लाह के विषय में (घमंड से) अपने पहलू मोड़ते हुए झगड़ता है,
ثَانِيَ عِطْفِه۪ لِيُضِلَّ عَنْ سَب۪يلِ اللّٰهِۜ لَهُ فِي الدُّنْيَا خِزْيٌ وَنُذ۪يقُهُ يَوْمَ الْقِيٰمَةِ عَذَابَ الْحَر۪يقِ9
ताकि अल्लाह के मार्ग से भटका दे। उसके लिए दुनिया में भी रुसवाई है और क़ियामत के दिन हम उसे जलने की यातना का मज़ा चखाएँगे
ذٰلِكَ بِمَا قَدَّمَتْ يَدَاكَ وَاَنَّ اللّٰهَ لَيْسَ بِظَلَّامٍ لِلْعَب۪يدِ۟10
(कहा जाएगा,) यह उसके कारण है जो तेरे हाथों ने आगे भेजा था और इसलिए कि अल्लाह बन्दों पर तनिक भी ज़ुल्म करनेवाला नहीं
وَمِنَ النَّاسِ مَنْ يَعْبُدُ اللّٰهَ عَلٰى حَرْفٍۚ فَاِنْ اَصَابَهُ خَيْرٌۨ اطْمَاَنَّ بِه۪ۚ وَاِنْ اَصَابَتْهُ فِتْنَةٌۨ انْقَلَبَ عَلٰى وَجْهِه۪۠ خَسِرَ الدُّنْيَا وَالْاٰخِرَةَۜ ذٰلِكَ هُوَ الْخُسْرَانُ الْمُب۪ينُ11
और लोगों में कोई ऐसा है, जो एक किनारे पर रहकर अल्लाह की बन्दगी करता है। यदि उसे लाभ पहुँचा तो उससे सन्तुष्ट हो गया और यदि उसे कोई आज़माइश पेश आ गई तो औंधा होकर पलट गया। दुनिया भी खोई और आख़िरत भी। यही है खुला घाटा
يَدْعُوا مِنْ دُونِ اللّٰهِ مَا لَا يَضُرُّهُ وَمَا لَا يَنْفَعُهُۜ ذٰلِكَ هُوَ الضَّلَالُ الْبَع۪يدُ12
वह अल्लाह को छोड़कर उसे पुकारता है, जो न उसे हानि पहुँचा सके और न उसे लाभ पहुँचा सके। यही हैं परले दर्जे की गुमराही
يَدْعُوا لَمَنْ ضَرُّهُٓ اَقْرَبُ مِنْ نَفْعِه۪ۜ لَبِئْسَ الْمَوْلٰى وَلَبِئْسَ الْعَش۪يرُ13
वह उसको पुकारता है जिससे पहुँचनेवाली हानि उससे अपेक्षित लाभ की अपेक्षा अधिक निकट है। बहुत ही बुरा संरक्षक है वह और बहुत ही बुरा साथी!
اِنَّ اللّٰهَ يُدْخِلُ الَّذ۪ينَ اٰمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ جَنَّاتٍ تَجْر۪ي مِنْ تَحْتِهَا الْاَنْهَارُۜ اِنَّ اللّٰهَ يَفْعَلُ مَا يُر۪يدُ14
निश्चय ही अल्लाह उन लोगों को, जो ईमान लाए और उन्होंने अच्छे कर्म किए, ऐसे बाग़ों में दाखिल करेगा, जिनके नीचे नहरें बह रही होंगी। निस्संदेह अल्लाह जो चाहे करे
مَنْ كَانَ يَظُنُّ اَنْ لَنْ يَنْصُرَهُ اللّٰهُ فِي الدُّنْيَا وَالْاٰخِرَةِ فَلْيَمْدُدْ بِسَبَبٍ اِلَى السَّمَٓاءِ ثُمَّ لْيَقْطَعْ فَلْيَنْظُرْ هَلْ يُذْهِبَنَّ كَيْدُهُ مَا يَغ۪يظُ15
जो कोई यह समझता है कि अल्लाह दुनिया औऱ आख़िरत में उसकी (रसूल की) कदापि कोई सहायता न करेगा तो उसे चाहिए कि वह आकाश की ओर एक रस्सी ताने, फिर (अल्लाह की सहायता के सिलसिले को) काट दे। फिर देख ले कि क्या उसका उपाय उस चीज़ को दूर कर सकता है जो उसे क्रोध में डाले हुए है