336. पृष्ठ - कुरान पढ़ें

336. पृष्ठ
22 · अल-हज
حُنَفَٓاءَ لِلّٰهِ غَيْرَ مُشْرِك۪ينَ بِه۪ۜ وَمَنْ يُشْرِكْ بِاللّٰهِ فَكَاَنَّمَا خَرَّ مِنَ السَّمَٓاءِ فَتَخْطَفُهُ الطَّيْرُ اَوْ تَهْو۪ي بِهِ الرّ۪يحُ ف۪ي مَكَانٍ سَح۪يقٍ31
इस तरह कि अल्लाह ही की ओर के होकर रहो। उसके साथ किसी को साझी न ठहराओ, क्योंकि जो कोई अल्लाह के साथ साझी ठहराता है तो मानो वह आकाश से गिर पड़ा। फिर चाहे उसे पक्षी उचक ले जाएँ या वायु उसे किसी दूरवर्ती स्थान पर फेंक दे
ذٰلِكَۗ وَمَنْ يُعَظِّمْ شَعَٓائِرَ اللّٰهِ فَاِنَّهَا مِنْ تَقْوَى الْقُلُوبِ32
इन बातों का ख़याल रखो। और जो कोई अल्लाह के नाम लगी चीज़ों का आदर करे, तो निस्संदेह वे (चीज़ें) दिलों के तक़वा (धर्मपरायणता) से सम्बन्ध रखती है
لَكُمْ ف۪يهَا مَنَافِعُ اِلٰٓى اَجَلٍ مُسَمًّى ثُمَّ مَحِلُّهَٓا اِلَى الْبَيْتِ الْعَت۪يقِ۟33
उनमें एक निश्चित समय तक तुम्हारे लिए फ़ायदे है। फिर उनको उस पुरातन घर तक (क़ुरबानी के लिए) पहुँचना है
وَلِكُلِّ اُمَّةٍ جَعَلْنَا مَنْسَكًا لِيَذْكُرُوا اسْمَ اللّٰهِ عَلٰى مَا رَزَقَهُمْ مِنْ بَه۪يمَةِ الْاَنْعَامِۜ فَاِلٰهُكُمْ اِلٰهٌ وَاحِدٌ فَلَهُٓ اَسْلِمُواۜ وَبَشِّرِ الْمُخْبِت۪ينَۙ34
और प्रत्येक समुदाय के लिए हमने क़ुरबानी का विधान किया, ताकि वे उन जानवरों अर्थात मवेशियों पर अल्लाह का नाम लें, जो उसने उन्हें प्रदान किए हैं। अतः तुम्हारा पूज्य-प्रभु अकेला पूज्य-प्रभु है। तो उसी के आज्ञाकारी बनकर रहो और विनम्रता अपनानेवालों को शुभ सूचना दे दो
اَلَّذ۪ينَ اِذَا ذُكِرَ اللّٰهُ وَجِلَتْ قُلُوبُهُمْ وَالصَّابِر۪ينَ عَلٰى مَٓا اَصَابَهُمْ وَالْمُق۪يمِي الصَّلٰوةِۙ وَمِمَّا رَزَقْنَاهُمْ يُنْفِقُونَ35
ये वे लोग है कि जब अल्लाह को याद किया जाता है तो उनके दिल दहल जाते है और जो मुसीबत उनपर आती है उसपर धैर्य से काम लेते है और नमाज़ को क़ायम करते है, और जो कुछ हमने उन्हें दिया है उसमें से ख़र्च करते है
وَالْبُدْنَ جَعَلْنَاهَا لَكُمْ مِنْ شَعَٓائِرِ اللّٰهِ لَكُمْ ف۪يهَا خَيْرٌۗ فَاذْكُرُوا اسْمَ اللّٰهِ عَلَيْهَا صَوَٓافَّۚ فَاِذَا وَجَبَتْ جُنُوبُهَا فَكُلُوا مِنْهَا وَاَطْعِمُوا الْقَانِعَ وَالْمُعْتَرَّۜ كَذٰلِكَ سَخَّرْنَاهَا لَكُمْ لَعَلَّكُمْ تَشْكُرُونَ36
(क़ुरबानी के) ऊँटों को हमने तुम्हारे लिए अल्लाह की निशानियों में से बनाया है। तुम्हारे लिए उनमें भलाई है। अतः खड़ा करके उनपर अल्लाह का नाम लो। फिर जब उनके पहलू भूमि से आ लगें तो उनमें से स्वयं भी खाओ औऱ संतोष से बैठनेवालों को भी खिलाओ और माँगनेवालों को भी। ऐसी ही करो। हमने उनको तुम्हारे लिए वशीभूत कर दिया है, ताकि तुम कृतज्ञता दिखाओ
لَنْ يَنَالَ اللّٰهَ لُحُومُهَا وَلَا دِمَٓاؤُ۬هَا وَلٰكِنْ يَنَالُهُ التَّقْوٰى مِنْكُمْۜ كَذٰلِكَ سَخَّرَهَا لَكُمْ لِتُكَبِّرُوا اللّٰهَ عَلٰى مَا هَدٰيكُمْۜ وَبَشِّرِ الْمُحْسِن۪ينَ37
न उनके माँस अल्लाह को पहुँचते है और न उनके रक्त। किन्तु उसे तुम्हारा तक़वा (धर्मपरायणता) पहुँचता है। इस प्रकार उसने उन्हें तुम्हारे लिए वशीभूत किया है, ताकि तुम अल्लाह की बड़ाई बयान करो, इसपर कि उसने तुम्हारा मार्गदर्शन किया और सुकर्मियों को शुभ सूचना दे दो
اِنَّ اللّٰهَ يُدَافِعُ عَنِ الَّذ۪ينَ اٰمَنُواۜ اِنَّ اللّٰهَ لَا يُحِبُّ كُلَّ خَوَّانٍ كَفُورٍ۟38
निश्चय ही अल्लाह उन लोगों की ओर से प्रतिरक्षा करता है, जो ईमान लाए। निस्संदेह अल्लाह किसी विश्वासघाती, अकृतज्ञ को पसन्द नहीं करता