337. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
22 · अल-हज
اُذِنَ لِلَّذ۪ينَ يُقَاتَلُونَ بِاَنَّهُمْ ظُلِمُواۜ وَاِنَّ اللّٰهَ عَلٰى نَصْرِهِمْ لَقَد۪يرٌۙ39
अनुमति दी गई उन लोगों को जिनके विरुद्ध युद्ध किया जा रहा है, क्योंकि उनपर ज़ुल्म किया गया - और निश्चय ही अल्लाह उनकी सहायता की पूरी सामर्थ्य रखता है। -
اَلَّذ۪ينَ اُخْرِجُوا مِنْ دِيَارِهِمْ بِغَيْرِ حَقٍّ اِلَّٓا اَنْ يَقُولُوا رَبُّنَا اللّٰهُۜ وَلَوْلَا دَفْعُ اللّٰهِ النَّاسَ بَعْضَهُمْ بِبَعْضٍ لَهُدِّمَتْ صَوَامِعُ وَبِيَعٌ وَصَلَوَاتٌ وَمَسَاجِدُ يُذْكَرُ ف۪يهَا اسْمُ اللّٰهِ كَث۪يرًاۜ وَلَيَنْصُرَنَّ اللّٰهُ مَنْ يَنْصُرُهُۜ اِنَّ اللّٰهَ لَقَوِيٌّ عَز۪يزٌ40
ये वे लोग है जो अपने घरों से नाहक़ निकाले गए, केवल इसलिए कि वे कहते है कि "हमारा रब अल्लाह है।" यदि अल्लाह लोगों को एक-दूसरे के द्वारा हटाता न रहता तो मठ और गिरजा और यहूदी प्रार्थना भवन और मस्जिदें, जिनमें अल्लाह का अधिक नाम लिया जाता है, सब ढा दी जातीं। अल्लाह अवश्य उसकी सहायता करेगा, जो उसकी सहायता करेगा - निश्चय ही अल्लाह बड़ा बलवान, प्रभुत्वशाली है
اَلَّذ۪ينَ اِنْ مَكَّنَّاهُمْ فِي الْاَرْضِ اَقَامُوا الصَّلٰوةَ وَاٰتَوُا الزَّكٰوةَ وَاَمَرُوا بِالْمَعْرُوفِ وَنَهَوْا عَنِ الْمُنْكَرِۜ وَلِلّٰهِ عَاقِبَةُ الْاُمُورِ41
ये वे लोग है कि यदि धरती में हम उन्हें सत्ता प्रदान करें तो वे नमाज़ का आयोजन करेंगे और ज़कात देंगे और भलाई का आदेश करेंगे और बुराई से रोकेंगे। और सब मामलों का अन्तिम परिणाम अल्लाह ही के हाथ में है
وَاِنْ يُكَذِّبُوكَ فَقَدْ كَذَّبَتْ قَبْلَهُمْ قَوْمُ نُوحٍ وَعَادٌ وَثَمُودُۙ42
यदि वे तुम्हें झुठलाते है तो उनसे पहले नूह की क़ौम, आद और समूद
وَقَوْمُ اِبْرٰه۪يمَ وَقَوْمُ لُوطٍۙ43
और इबराहीम की क़ौम और लूत की क़ौम
وَاَصْحَابُ مَدْيَنَۚ وَكُذِّبَ مُوسٰى فَاَمْلَيْتُ لِلْكَافِر۪ينَ ثُمَّ اَخَذْتُهُمْۚ فَكَيْفَ كَانَ نَك۪يرِ44
और मदयनवाले भी झुठला चुके है और मूसा को भी झूठलाया जा चुका है। किन्तु मैंने इनकार करनेवालों को मुहलत दी, फिर उन्हें पकड़ लिया। तो कैसी रही मेरी यंत्रणा!
فَكَاَيِّنْ مِنْ قَرْيَةٍ اَهْلَكْنَاهَا وَهِيَ ظَالِمَةٌ فَهِيَ خَاوِيَةٌ عَلٰى عُرُوشِهَا وَبِئْرٍ مُعَطَّلَةٍ وَقَصْرٍ مَش۪يدٍ45
कितनी ही बस्तियाँ है जिन्हें हमने विनष्ट कर दिया इस दशा में कि वे ज़ालिम थी, तो वे अपनी छतों के बल गिरी पड़ी है। और कितने ही परित्यक्त (उजाड़) कुएँ पड़े है और कितने ही पक्के महल भी!
اَفَلَمْ يَس۪يرُوا فِي الْاَرْضِ فَتَكُونَ لَهُمْ قُلُوبٌ يَعْقِلُونَ بِهَٓا اَوْ اٰذَانٌ يَسْمَعُونَ بِهَاۚ فَاِنَّهَا لَا تَعْمَى الْاَبْصَارُ وَلٰكِنْ تَعْمَى الْقُلُوبُ الَّت۪ي فِي الصُّدُورِ46
क्या वे धरती में चले फिरे नहीं है कि उनके दिल होते जिनसे वे समझते या (कम से कम) कान होते जिनसे वे सुनते? बात यह है कि आँखें अंधी नहीं हो जातीं, बल्कि वे दिल अंधे हो जाते है जो सीनों में होते है