34. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
2 · अल-बक़रा
كُتِبَ عَلَيْكُمُ الْقِتَالُ وَهُوَ كُرْهٌ لَكُمْۚ وَعَسٰٓى اَنْ تَكْرَهُوا شَيْـًٔا وَهُوَ خَيْرٌ لَكُمْۚ وَعَسٰٓى اَنْ تُحِبُّوا شَيْـًٔا وَهُوَ شَرٌّ لَكُمْۜ وَاللّٰهُ يَعْلَمُ وَاَنْتُمْ لَا تَعْلَمُونَ۟216
तुम पर युद्ध अनिवार्य किया गया और वह तुम्हें अप्रिय है, और बहुत सम्भव है कि कोई चीज़ तुम्हें अप्रिय हो और वह तुम्हारे लिए अच्छी हो। और बहुत सम्भव है कि कोई चीज़ तुम्हें प्रिय हो और वह तुम्हारे लिए बुरी हो। और जानता अल्लाह है, और तुम नहीं जानते।"
يَسْـَٔلُونَكَ عَنِ الشَّهْرِ الْحَرَامِ قِتَالٍ ف۪يهِۜ قُلْ قِتَالٌ ف۪يهِ كَب۪يرٌۜ وَصَدٌّ عَنْ سَب۪يلِ اللّٰهِ وَكُفْرٌ بِه۪ وَالْمَسْجِدِ الْحَرَامِ وَاِخْرَاجُ اَهْلِه۪ مِنْهُ اَكْبَرُ عِنْدَ اللّٰهِۚ وَالْفِتْنَةُ اَكْبَرُ مِنَ الْقَتْلِۜ وَلَا يَزَالُونَ يُقَاتِلُونَكُمْ حَتّٰى يَرُدُّوكُمْ عَنْ د۪ينِكُمْ اِنِ اسْتَطَاعُواۜ وَمَنْ يَرْتَدِدْ مِنْكُمْ عَنْ د۪ينِه۪ فَيَمُتْ وَهُوَ كَافِرٌ فَاُو۬لٰٓئِكَ حَبِطَتْ اَعْمَالُهُمْ فِي الدُّنْيَا وَالْاٰخِرَةِۚ وَاُو۬لٰٓئِكَ اَصْحَابُ النَّارِۚ هُمْ ف۪يهَا خَالِدُونَ217
वे तुमसे आदरणीय महीने में युद्ध के विषय में पूछते है। कहो, "उसमें लड़ना बड़ी गम्भीर बात है, परन्तु अल्लाह के मार्ग से रोकना, उसके साथ अविश्वास करना, मस्जिदे हराम (काबा) से रोकना और उसके लोगों को उससे निकालना, अल्लाह की स्पष्ट में इससे भी अधिक गम्भीर है और फ़ितना (उत्पीड़न), रक्तपात से भी बुरा है।" और उसका बस चले तो वे तो तुमसे बराबर लड़ते रहे, ताकि तुम्हें तुम्हारे दीन (धर्म) से फेर दें। और तुममे से जो कोई अपने दीन से फिर जाए और अविश्वासी होकर मरे, तो ऐसे ही लोग है जिनके कर्म दुनिया और आख़िरत में नष्ट हो गए, और वही आग (जहन्नम) में पड़नेवाले है, वे उसी में सदैव रहेंगे
اِنَّ الَّذ۪ينَ اٰمَنُوا وَالَّذ۪ينَ هَاجَرُوا وَجَاهَدُوا ف۪ي سَب۪يلِ اللّٰهِۙ اُو۬لٰٓئِكَ يَرْجُونَ رَحْمَةَ اللّٰهِۜ وَاللّٰهُ غَفُورٌ رَح۪يمٌ218
रहे वे लोग जो ईमान लाए और जिन्होंने अल्लाह के मार्ग में घर-बार छोड़ा और जिहाद किया, वहीं अल्लाह की दयालुता की आशा रखते है। निस्संदेह अल्लाह अत्यन्त क्षमाशील, दयावान है
يَسْـَٔلُونَكَ عَنِ الْخَمْرِ وَالْمَيْسِرِۜ قُلْ ف۪يهِمَٓا اِثْمٌ كَب۪يرٌ وَمَنَافِعُ لِلنَّاسِۘ وَاِثْمُهُمَٓا اَكْبَرُ مِنْ نَفْعِهِمَاۜ وَيَسْـَٔلُونَكَ مَاذَا يُنْفِقُونَۜ قُلِ الْعَفْوَۜ كَذٰلِكَ يُبَيِّنُ اللّٰهُ لَكُمُ الْاٰيَاتِ لَعَلَّكُمْ تَتَفَكَّرُونَۙ219
तुमसे शराब और जुए के विषय में पूछते है। कहो, "उन दोनों चीज़ों में बड़ा गुनाह है, यद्यपि लोगों के लिए कुछ फ़ायदे भी है, परन्तु उनका गुनाह उनके फ़ायदे से कहीं बढकर है।" और वे तुमसे पूछते है, "कितना ख़र्च करें?" कहो, "जो आवश्यकता से अधिक हो।" इस प्रकार अल्लाह दुनिया और आख़िरत के विषय में तुम्हारे लिए अपनी आयते खोल-खोलकर बयान करता है, ताकि तुम सोच-विचार करो।