340. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
22 · अल-हज
اَلَمْ تَرَ اَنَّ اللّٰهَ سَخَّرَ لَكُمْ مَا فِي الْاَرْضِ وَالْفُلْكَ تَجْر۪ي فِي الْبَحْرِ بِاَمْرِه۪ۜ وَيُمْسِكُ السَّمَٓاءَ اَنْ تَقَعَ عَلَى الْاَرْضِ اِلَّا بِاِذْنِه۪ۜ اِنَّ اللّٰهَ بِالنَّاسِ لَرَؤُ۫فٌ رَح۪يمٌ65
क्या तुमने देखा नहीं कि धरती में जो कुछ भी है उसे अल्लाह ने तुम्हारे लिए वशीभूत कर रखा है और नौका को भी कि उसके आदेश से दरिया में चलती है, और उसने आकाश को धरती पर गिरने से रोक रखा है। उसकी अनुज्ञा हो तो बात दूसरी है। निस्संदेह अल्लाह लोगों के हक़ में बड़ा करुणाशील, दयावान है
وَهُوَ الَّذ۪ٓي اَحْيَاكُمْۘ ثُمَّ يُم۪يتُكُمْ ثُمَّ يُحْي۪يكُمْۜ اِنَّ الْاِنْسَانَ لَكَفُورٌ66
और वही है जिसने तुम्हें जीवन प्रदान किया। फिर वही तुम्हें मृत्यु देता है और फिर वही तुम्हें जीवित करनेवाला है। निस्संदेह मानव बड़ा ही अकृतज्ञ है
لِكُلِّ اُمَّةٍ جَعَلْنَا مَنْسَكًا هُمْ نَاسِكُوهُ فَلَا يُنَازِعُنَّكَ فِي الْاَمْرِ وَادْعُ اِلٰى رَبِّكَۜ اِنَّكَ لَعَلٰى هُدًى مُسْتَق۪يمٍ67
प्रत्येक समुदाय के लिए हमने बन्दगी की एक रीति निर्धारित कर दी है, जिसका पालन उसके लोग करते है। अतः इस मामले में वे तुमसे झगड़ने की राह न पाएँ। तुम तो अपने रब की ओर बुलाए जाओ। निस्संदेह तुम सीधे मार्ग पर हो
وَاِنْ جَادَلُوكَ فَقُلِ اللّٰهُ اَعْلَمُ بِمَا تَعْمَلُونَ68
और यदि वे तुमसे झगड़ा करें तो कह दो कि "तुम जो कुछ करते हो अल्लाह उसे भली-भाँति जानता है
اَللّٰهُ يَحْكُمُ بَيْنَكُمْ يَوْمَ الْقِيٰمَةِ ف۪يمَا كُنْتُمْ ف۪يهِ تَخْتَلِفُونَ69
अल्लाह क़ियामत के दिन तुम्हारे बीच उस चीज़ का फ़ैसला कर देगा, जिसमें तुम विभेद करते हो।"
اَلَمْ تَعْلَمْ اَنَّ اللّٰهَ يَعْلَمُ مَا فِي السَّمَٓاءِ وَالْاَرْضِۜ اِنَّ ذٰلِكَ ف۪ي كِتَابٍۜ اِنَّ ذٰلِكَ عَلَى اللّٰهِ يَس۪يرٌ70
क्या तुम्हें नहीं मालूम कि अल्लाह जानता है जो कुछ आकाश और धरती मैं हैं? निश्चय ही वह (लोगों का कर्म) एक किताब में अंकित है। निस्संदेह वह (फ़ैसला करना) अल्लाह के लिए अत्यन्त सरल है
وَيَعْبُدُونَ مِنْ دُونِ اللّٰهِ مَا لَمْ يُنَزِّلْ بِه۪ سُلْطَانًا وَمَا لَيْسَ لَهُمْ بِه۪ عِلْمٌۜ وَمَا لِلظَّالِم۪ينَ مِنْ نَص۪يرٍ71
और वे अल्लाह से इतर उनकी बन्दगी करते है जिनके लिए न तो उसने कोई प्रमाण उतारा और न उन्हें उनके विषय में कोई ज्ञान ही है। और इन ज़ालिमों को कोई सहायक नहीं
وَاِذَا تُتْلٰى عَلَيْهِمْ اٰيَاتُنَا بَيِّنَاتٍ تَعْرِفُ ف۪ي وُجُوهِ الَّذ۪ينَ كَفَرُوا الْمُنْكَرَۜ يَكَادُونَ يَسْطُونَ بِالَّذ۪ينَ يَتْلُونَ عَلَيْهِمْ اٰيَاتِنَاۜ قُلْ اَفَاُنَبِّئُكُمْ بِشَرٍّ مِنْ ذٰلِكُمْۜ اَلنَّارُۜ وَعَدَهَا اللّٰهُ الَّذ۪ينَ كَفَرُواۜ وَبِئْسَ الْمَص۪يرُ۟72
और जब उन्हें हमारी स्पष्ट आयतें सुनाई जाती है, तो इनकार करनेवालों के चेहरों पर तुम्हें नागवारी प्रतीत होती है। लगता है कि अभी वे उन लोगों पर टूट पड़ेगे जो उन्हें हमारी आयतें सुनाते है। कह दो, "क्या मैं तुम्हे इससे बुरी चीज़ की ख़बर दूँ? आग है वह - अल्लाह ने इनकार करनेवालों से उसी का वादा कर रखा है - और वह बहुत ही बुरा ठिकाना है।"