344. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
23 · अल-मोमिनून
فَاِذَا اسْتَوَيْتَ اَنْتَ وَمَنْ مَعَكَ عَلَى الْفُلْكِ فَقُلِ الْحَمْدُ لِلّٰهِ الَّذ۪ي نَجّٰينَا مِنَ الْقَوْمِ الظَّالِم۪ينَ28
फिर जब तू नौका पर सवार हो जाए और तेरे साथी भी तो कह, प्रशंसा है अल्लाह की, जिसने हमें ज़ालिम लोगों से छुटकारा दिया
وَقُلْ رَبِّ اَنْزِلْن۪ي مُنْزَلًا مُبَارَكًا وَاَنْتَ خَيْرُ الْمُنْزِل۪ينَ29
और कह, ऐ मेरे रब! मुझे बरकतवाली जगह उतार। और तू सबसे अच्छा मेज़बान है।"
اِنَّ ف۪ي ذٰلِكَ لَاٰيَاتٍ وَاِنْ كُنَّا لَمُبْتَل۪ينَ30
निस्संदेह इसमें कितनी ही निशानियाँ हैं और परीक्षा तो हम करते ही है
ثُمَّ اَنْشَاْنَا مِنْ بَعْدِهِمْ قَرْنًا اٰخَر۪ينَۚ31
फिर उनके पश्चात हमने एक दूसरी नस्ल को उठाया;
فَاَرْسَلْنَا ف۪يهِمْ رَسُولًا مِنْهُمْ اَنِ اعْبُدُوا اللّٰهَ مَا لَكُمْ مِنْ اِلٰهٍ غَيْرُهُۜ اَفَلَا تَتَّقُونَ۟32
और उनमें हमने स्वयं उन्हीं में से एक रसूल भेजा कि "अल्लाह की बन्दगी करो। उसके सिवा तुम्हारा कोई इष्ट-पूज्य नहीं। तो क्या तुम डर नहीं रखते?"
وَقَالَ الْمَلَاُ مِنْ قَوْمِهِ الَّذ۪ينَ كَفَرُوا وَكَذَّبُوا بِلِقَٓاءِ الْاٰخِرَةِ وَاَتْرَفْنَاهُمْ فِي الْحَيٰوةِ الدُّنْيَاۙ مَا هٰذَٓا اِلَّا بَشَرٌ مِثْلُكُمْۙ يَاْكُلُ مِمَّا تَاْكُلُونَ مِنْهُ وَيَشْرَبُ مِمَّا تَشْرَبُونَ33
उसकी क़ौम के सरदार, जिन्होंने इनकार किया और आख़िरत के मिलन को झूठलाया और जिन्हें हमने सांसारिक जीवन में सुख प्रदान किया था, कहने लगे, "यह तो बस तुम्हीं जैसा एक मनुष्य है। जो कुछ तुम खाते हो, वही यह भी खाता है और जो कुछ तुम पीते हो, वही यह भी पीता है
وَلَئِنْ اَطَعْتُمْ بَشَرًا مِثْلَكُمْ اِنَّكُمْ اِذًا لَخَاسِرُونَ34
यदि तुम अपने ही जैसे एक मनुष्य के आज्ञाकारी हुए तो निश्चय ही तुम घाटे में पड़ गए
اَيَعِدُكُمْ اَنَّكُمْ اِذَا مِتُّمْ وَكُنْتُمْ تُرَابًا وَعِظَامًا اَنَّكُمْ مُخْرَجُونَۖ35
क्या यह तुमसे वादा करता है कि जब तुम मरकर मिट्टी और हड़्डियाँ होकर रह जाओगे तो तुम निकाले जाओगे?
هَيْهَاتَ هَيْهَاتَ لِمَا تُوعَدُونَۖ36
दूर की बात है, बहुत दूर की, जिसका तुमसे वादा किया जा रहा है!
اِنْ هِيَ اِلَّا حَيَاتُنَا الدُّنْيَا نَمُوتُ وَنَحْيَا وَمَا نَحْنُ بِمَبْعُوث۪ينَۖ37
वह तो बस हमारा सांसारिक जीवन ही है। (यहीं) हम मरते और जीते है। हम कोई दोबारा उठाए जानेवाले नहीं है
اِنْ هُوَ اِلَّا رَجُلٌۨ افْتَرٰى عَلَى اللّٰهِ كَذِبًا وَمَا نَحْنُ لَهُ بِمُؤْمِن۪ينَ38
वह तो बस एक ऐसा व्यक्ति है जिसने अल्लाह पर झूठ घड़ा है। हम उसे कदापि माननेवाले नहीं।"
قَالَ رَبِّ انْصُرْن۪ي بِمَا كَذَّبُونِ39
उसने कहा, "ऐ मेरे रब! उन्होंने जो मुझे झुठलाया, उसपर तू मेरी सहायता कर।"
قَالَ عَمَّا قَل۪يلٍ لَيُصْبِحُنَّ نَادِم۪ينَۚ40
कहा, "शीघ्र ही वे पछताकर रहेंगे।"
فَاَخَذَتْهُمُ الصَّيْحَةُ بِالْحَقِّ فَجَعَلْنَاهُمْ غُثَٓاءًۚ فَبُعْدًا لِلْقَوْمِ الظَّالِم۪ينَ41
फिर घटित होनेवाली बात के अनुसार उन्हें एक प्रचंड आवाज़ ने आ लिया और हमने उन्हें कूड़ा-कर्कट बनाकर रख दिया। अतः फिटकार है, ऐसे अत्याचारी लोगों पर!
ثُمَّ اَنْشَاْنَا مِنْ بَعْدِهِمْ قُرُونًا اٰخَر۪ينَۜ42
फिर हमने उनके पश्चात दूसरी नस्लों को उठाया