346. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
23 · अल-मोमिनून
وَالَّذ۪ينَ يُؤْتُونَ مَٓا اٰتَوْا وَقُلُوبُهُمْ وَجِلَةٌ اَنَّهُمْ اِلٰى رَبِّهِمْ رَاجِعُونَۙ60
और जो लोग देते है, जो कुछ देते है और हाल यह होता है कि दिल उनके काँप रहे होते है, इसलिए कि उन्हें अपने रब की ओर पलटना है;
اُو۬لٰٓئِكَ يُسَارِعُونَ فِي الْخَيْرَاتِ وَهُمْ لَهَا سَابِقُونَ61
यही वे लोग है, जो भलाइयों में जल्दी करते है और यही उनके लिए अग्रसर रहनेवाले है।
وَلَا نُكَلِّفُ نَفْسًا اِلَّا وُسْعَهَا وَلَدَيْنَا كِتَابٌ يَنْطِقُ بِالْحَقِّ وَهُمْ لَا يُظْلَمُونَ62
हम किसी व्यक्ति पर उसकी समाई (क्षमता) से बढ़कर ज़िम्मेदारी का बोझ नहीं डालते और हमारे पास एक किताब है, जो ठीक-ठीक बोलती है, और उनपर ज़ुल्म नहीं किया जाएगा
بَلْ قُلُوبُهُمْ ف۪ي غَمْرَةٍ مِنْ هٰذَا وَلَهُمْ اَعْمَالٌ مِنْ دُونِ ذٰلِكَ هُمْ لَهَا عَامِلُونَ63
बल्कि उनके दिल इसकी (सत्य धर्म की) ओर से हटकर (वसवसों और गफ़लतों आदि के) भँवर में पडे हुए है और उससे (ईमानवालों की नीति से) हटकर उनके कुछ और ही काम है। वे उन्हीं को करते रहेंगे;
حَتّٰٓى اِذَٓا اَخَذْنَا مُتْرَف۪يهِمْ بِالْعَذَابِ اِذَا هُمْ يَجْـَٔرُونَۜ64
यहाँ तक कि जब हम उनके खुशहाल लोगों को यातना में पकड़ेगे तो क्या देखते है कि वे विलाप और फ़रियाद कर रहे है
لَا تَجْـَٔرُوا الْيَوْمَ اِنَّكُمْ مِنَّا لَا تُنْصَرُونَ65
(कहा जाएगा,) "आज चिल्लाओ मत, तुम्हें हमारी ओर से कोई सहायता मिलनेवाली नहीं
قَدْ كَانَتْ اٰيَات۪ي تُتْلٰى عَلَيْكُمْ فَكُنْتُمْ عَلٰٓى اَعْقَابِكُمْ تَنْكِصُونَۙ66
तुम्हें मेरी आयतें सुनाई जाती थीं, तो तुम अपनी एड़ियों के बल फिर जाते थे।
مُسْتَكْبِر۪ينَ بِه۪ۗ سَامِرًا تَهْجُرُونَ67
हाल यह था कि इसके कारण स्वयं को बड़ा समझते थे, उसे एक कहानी कहनेवाला ठहराकर छोड़ चलते थे
اَفَلَمْ يَدَّبَّرُوا الْقَوْلَ اَمْ جَٓاءَهُمْ مَا لَمْ يَاْتِ اٰبَٓاءَهُمُ الْاَوَّل۪ينَۘ68
क्या उन्होंने इस वाणी पर विचार नहीं किया या उनके पास वह चीज़ आ गई जो उनके पहले बाप-दादा के पास न आई थी?
اَمْ لَمْ يَعْرِفُوا رَسُولَهُمْ فَهُمْ لَهُ مُنْكِرُونَۘ69
या उन्होंने अपने रसूल को पहचाना नहीं, इसलिए उसका इनकार कर रहे है?
اَمْ يَقُولُونَ بِه۪ جِنَّةٌۜ بَلْ جَٓاءَهُمْ بِالْحَقِّ وَاَكْثَرُهُمْ لِلْحَقِّ كَارِهُونَ70
या वे कहते है, "उसे उन्माद हो गया है।" नहीं, बल्कि वह उनके पास सत्य लेकर आया है। किन्तु उनमें अधिकांश को सत्य अप्रिय है
وَلَوِ اتَّبَعَ الْحَقُّ اَهْوَٓاءَهُمْ لَفَسَدَتِ السَّمٰوَاتُ وَالْاَرْضُ وَمَنْ ف۪يهِنَّۜ بَلْ اَتَيْنَاهُمْ بِذِكْرِهِمْ فَهُمْ عَنْ ذِكْرِهِمْ مُعْرِضُونَۜ71
और यदि सत्य कहीं उनकी इच्छाओं के पीछे चलता तो समस्त आकाश और धरती और जो भी उनमें है, सबमें बिगाड़ पैदा हो जाता। नहीं, बल्कि हम उनके पास उनके हिस्से की अनुस्मृति लाए है। किन्तु वे अपनी अनुस्मृति से कतरा रहे है
اَمْ تَسْـَٔلُهُمْ خَرْجًا فَخَرَاجُ رَبِّكَ خَيْرٌۗ وَهُوَ خَيْرُ الرَّازِق۪ينَ72
या तुम उनसे कुथ शुल्क माँग रहे हो? तुम्हारे रब का दिया ही उत्तम है। और वह सबसे अच्छी रोज़ी देनेवाला है
وَاِنَّكَ لَتَدْعُوهُمْ اِلٰى صِرَاطٍ مُسْتَق۪يمٍ73
और वास्तव में तुम उन्हें सीधे मार्ग की ओर बुला रहे हो
وَاِنَّ الَّذ۪ينَ لَا يُؤْمِنُونَ بِالْاٰخِرَةِ عَنِ الصِّرَاطِ لَنَاكِبُونَ74
किन्तु जो लोग आख़िरत पर ईमान नहीं रखते वे इस मार्ग से हटकर चलना चाहते है