348. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
23 · अल-मोमिनून
بَلْ اَتَيْنَاهُمْ بِالْحَقِّ وَاِنَّهُمْ لَكَاذِبُونَ90
नहीं, बल्कि हम उनके पास सत्य लेकर आए है और निश्चय ही वे झूठे है
مَا اتَّخَذَ اللّٰهُ مِنْ وَلَدٍ وَمَا كَانَ مَعَهُ مِنْ اِلٰهٍ اِذًا لَذَهَبَ كُلُّ اِلٰهٍ بِمَا خَلَقَ وَلَعَلَا بَعْضُهُمْ عَلٰى بَعْضٍۜ سُبْحَانَ اللّٰهِ عَمَّا يَصِفُونَۙ91
अल्लाह ने अपना कोई बेटा नहीं बनाया और न उसके साथ कोई अन्य पूज्य-प्रभु है। ऐसा होता तो प्रत्येक पूज्य-प्रभु अपनी सृष्टि को लेकर अलग हो जाता और उनमें से एक-दूसरे पर चढ़ाई कर देता। महान और उच्च है अल्लाह उन बातों से, जो वे बयान करते है;
عَالِمِ الْغَيْبِ وَالشَّهَادَةِ فَتَعَالٰى عَمَّا يُشْرِكُونَ۟92
जाननेवाला है छुपे और खुले का। सो वह उच्चतर है वह शिर्क से जो वे करते है!
قُلْ رَبِّ اِمَّا تُرِيَنّ۪ي مَا يُوعَدُونَۙ93
कहो, "ऐ मेरे रब! जिस चीज़ का वादा उनसे किया जा रहा है, वह यदि तू मुझे दिखाए
رَبِّ فَلَا تَجْعَلْن۪ي فِي الْقَوْمِ الظَّالِم۪ينَ94
तो मेरे रब! मुझे उन अत्याचारी लोगों में सम्मिलित न करना।"
وَاِنَّا عَلٰٓى اَنْ نُرِيَكَ مَا نَعِدُهُمْ لَقَادِرُونَ95
निश्चय ही हमें इसकी सामर्थ्य प्राप्त है कि हम उनसे जो वादा कर रहे है, वह तुम्हें दिखा दें।
اِدْفَعْ بِالَّت۪ي هِيَ اَحْسَنُ السَّيِّئَةَۜ نَحْنُ اَعْلَمُ بِمَا يَصِفُونَ96
बुराई को उस ढंग से दूर करो, जो सबसे उत्तम हो। हम भली-भाँति जानते है जो कुछ बातें वे बनाते है
وَقُلْ رَبِّ اَعُوذُ بِكَ مِنْ هَمَزَاتِ الشَّيَاط۪ينِۙ97
और कहो, "ऐ मेरे रब! मैं शैतान की उकसाहटों से तेरी शरण चाहता हूँ
وَاَعُوذُ بِكَ رَبِّ اَنْ يَحْضُرُونِ98
और मेरे रब! मैं इससे भी तेरी शरण चाहता हूँ कि वे मेरे पास आएँ।" -
حَتّٰٓى اِذَا جَٓاءَ اَحَدَهُمُ الْمَوْتُ قَالَ رَبِّ ارْجِعُونِۙ99
यहाँ तक कि जब उनमें से किसी की मृत्यु आ गई तो वह कहेगा, "ऐ मेरे रब! मुझे लौटा दे। - ताकि जिस (संसार) को मैं छोड़ आया हूँ
لَعَلّ۪ٓي اَعْمَلُ صَالِحًا ف۪يمَا تَرَكْتُ كَلَّاۜ اِنَّهَا كَلِمَةٌ هُوَ قَٓائِلُهَاۜ وَمِنْ وَرَٓائِهِمْ بَرْزَخٌ اِلٰى يَوْمِ يُبْعَثُونَ100
उसमें अच्छा कर्म करूँ।" कुछ नहीं, यह तो बस एक (व्यर्थ) बात है जो वह कहेगा और उनके पीछे से लेकर उस दिन तक एक रोक लगी हुई है, जब वे दोबारा उठाए जाएँगे
فَاِذَا نُفِخَ فِي الصُّورِ فَلَٓا اَنْسَابَ بَيْنَهُمْ يَوْمَئِذٍ وَلَا يَتَسَٓاءَلُونَ101
फिर जब सूर (नरसिंघा) में फूँक मारी जाएगी तो उस दिन उनके बीच रिश्ते-नाते शेष न रहेंगे, और न वे एक-दूसरे को पूछेंगे
فَمَنْ ثَقُلَتْ مَوَاز۪ينُهُ فَاُو۬لٰٓئِكَ هُمُ الْمُفْلِحُونَ102
फिर जिनके पलड़े भारी हुए तॊ वही हैं जो सफल।
وَمَنْ خَفَّتْ مَوَاز۪ينُهُ فَاُو۬لٰٓئِكَ الَّذ۪ينَ خَسِرُٓوا اَنْفُسَهُمْ ف۪ي جَهَنَّمَ خَالِدُونَۚ103
रहे वे लोग जिनके पलड़े हल्के हुए, तो वही है जिन्होंने अपने आपको घाटे में डाला। वे सदैव जहन्नम में रहेंगे
تَلْفَحُ وُجُوهَهُمُ النَّارُ وَهُمْ ف۪يهَا كَالِحُونَ104
आग उनके चेहरों को झुलसा देगी और उसमें उनके मुँह विकृत हो रहे होंगे