350. पृष्ठ - कुरान पढ़ें

350. पृष्ठ
24 · अन-नूर
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِيمِ
سُورَةٌ اَنْزَلْنَاهَا وَفَرَضْنَاهَا وَاَنْزَلْنَا ف۪يهَٓا اٰيَاتٍ بَيِّنَاتٍ لَعَلَّكُمْ تَذَكَّرُونَ1
यह एक (महत्वपूर्ण) सूरा है, जिसे हमने उतारा है। और इसे हमने अनिवार्य किया है, और इसमें हमने स्पष्ट आयतें (आदेश) अवतरित की है। कदाचित तुम शिक्षा ग्रहण करो
اَلزَّانِيَةُ وَالزَّان۪ي فَاجْلِدُوا كُلَّ وَاحِدٍ مِنْهُمَا مِائَةَ جَلْدَةٍۖ وَلَا تَاْخُذْكُمْ بِهِمَا رَاْفَةٌ ف۪ي د۪ينِ اللّٰهِ اِنْ كُنْتُمْ تُؤْمِنُونَ بِاللّٰهِ وَالْيَوْمِ الْاٰخِرِۚ وَلْيَشْهَدْ عَذَابَهُمَا طَٓائِفَةٌ مِنَ الْمُؤْمِن۪ينَ2
व्यभिचारिणी और व्यभिचारी - इन दोनों में से प्रत्येक को सौ कोड़े मारो और अल्लाह के धर्म (क़ानून) के विषय में तुम्हें उनपर तरस न आए, यदि तुम अल्लाह औऱ अन्तिम दिन को मानते हो। और उन्हें दंड देते समय मोमिनों में से कुछ लोगों को उपस्थित रहना चाहिए
اَلزَّان۪ي لَا يَنْكِحُ اِلَّا زَانِيَةً اَوْ مُشْرِكَةًۘ وَالزَّانِيَةُ لَا يَنْكِحُهَٓا اِلَّا زَانٍ اَوْ مُشْرِكٌۚ وَحُرِّمَ ذٰلِكَ عَلَى الْمُؤْمِن۪ينَ3
व्यभिचारी किसी व्यभिचारिणी या बहुदेववादी स्त्री से ही निकाह करता है। और (इसी प्रकार) व्यभिचारिणी, किसी व्यभिचारी या बहुदेववादी से ही निकाह करते है। और यह मोमिनों पर हराम है
وَالَّذ۪ينَ يَرْمُونَ الْمُحْصَنَاتِ ثُمَّ لَمْ يَاْتُوا بِاَرْبَعَةِ شُهَدَٓاءَ فَاجْلِدُوهُمْ ثَمَان۪ينَ جَلْدَةً وَلَا تَقْبَلُوا لَهُمْ شَهَادَةً اَبَدًاۚ وَاُو۬لٰٓئِكَ هُمُ الْفَاسِقُونَۙ4
और जो लोग शरीफ़ और पाकदामन स्त्री पर तोहमत लगाएँ, फिर चार गवाह न लाएँ, उन्हें अस्सी कोड़े मारो और उनकी गवाही कभी भी स्वीकार न करो - वही है जो अवज्ञाकारी है। -
اِلَّا الَّذ۪ينَ تَابُوا مِنْ بَعْدِ ذٰلِكَ وَاَصْلَحُواۚ فَاِنَّ اللّٰهَ غَفُورٌ رَح۪يمٌ5
सिवाय उन लोगों के जो इसके पश्चात तौबा कर लें और सुधार कर लें। तो निश्चय ही अल्लाह बहुत क्षमाशील, अत्यन्त दयावान है
وَالَّذ۪ينَ يَرْمُونَ اَزْوَاجَهُمْ وَلَمْ يَكُنْ لَهُمْ شُهَدَٓاءُ اِلَّٓا اَنْفُسُهُمْ فَشَهَادَةُ اَحَدِهِمْ اَرْبَعُ شَهَادَاتٍ بِاللّٰهِۙ اِنَّهُ لَمِنَ الصَّادِق۪ينَ6
औऱ जो लोग अपनी पत्नियों पर दोषारोपण करें औऱ उनके पास स्वयं के सिवा गवाह मौजूद न हों, तो उनमें से एक (अर्थात पति) चार बार अल्लाह की क़सम खाकर यह गवाही दे कि वह बिलकुल सच्चा है
وَالْخَامِسَةُ اَنَّ لَعْنَتَ اللّٰهِ عَلَيْهِ اِنْ كَانَ مِنَ الْكَاذِب۪ينَ7
और पाँचवी बार यह गवाही दे कि यदि वह झूठा हो तो उसपर अल्लाह की फिटकार हो
وَيَدْرَؤُ۬ا عَنْهَا الْعَذَابَ اَنْ تَشْهَدَ اَرْبَعَ شَهَادَاتٍ بِاللّٰهِۙ اِنَّهُ لَمِنَ الْكَاذِب۪ينَۙ8
पत्ऩी से भी सज़ा को यह बात टाल सकती है कि वह चार बार अल्लाह की क़सम खाकर गवाही दे कि वह बिलकुल झूठा है
وَالْخَامِسَةَ اَنَّ غَضَبَ اللّٰهِ عَلَيْهَٓا اِنْ كَانَ مِنَ الصَّادِق۪ينَ9
और पाँचवी बार यह कहें कि उसपर (उस स्त्री पर) अल्लाह का प्रकोप हो, यदि वह सच्चा हो
وَلَوْلَا فَضْلُ اللّٰهِ عَلَيْكُمْ وَرَحْمَتُهُ وَاَنَّ اللّٰهَ تَوَّابٌ حَك۪يمٌ۟10
यदि तुम अल्लाह की उदार कृपा और उसकी दया न होती (तो तुम संकट में पड़े जाते), और यह कि अल्लाह बड़ा तौबा क़बूल करनेवाला,अत्यन्त तत्वदर्शी है