352. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
24 · अन-नूर
يَٓا اَيُّهَا الَّذ۪ينَ اٰمَنُوا لَا تَتَّبِعُوا خُطُوَاتِ الشَّيْطَانِۜ وَمَنْ يَتَّبِعْ خُطُوَاتِ الشَّيْطَانِ فَاِنَّهُ يَاْمُرُ بِالْفَحْشَٓاءِ وَالْمُنْكَرِۜ وَلَوْلَا فَضْلُ اللّٰهِ عَلَيْكُمْ وَرَحْمَتُهُ مَا زَكٰى مِنْكُمْ مِنْ اَحَدٍ اَبَدًاۙ وَلٰكِنَّ اللّٰهَ يُزَكّ۪ي مَنْ يَشَٓاءُۜ وَاللّٰهُ سَم۪يعٌ عَل۪يمٌ21
ऐ ईमान लानेवालो! शैतान के पद-चिन्हों पर न चलो। जो कोई शैतान के पद-चिन्हों पर चलेगा तो वह तो उसे अश्लीलता औऱ बुराई का आदेश देगा। और यदि अल्लाह का उदार अनुग्रह और उसकी दयालुता तुमपर न होती तो तुममें से कोई भी आत्म-विश्वास को प्राप्त न कर सकता। किन्तु अल्लाह जिसे चाहता है, सँवारता-निखारता है। अल्लाह तो सब कुछ सुनता, जानता है
وَلَا يَاْتَلِ اُو۬لُوا الْفَضْلِ مِنْكُمْ وَالسَّعَةِ اَنْ يُؤْتُٓوا اُو۬لِي الْقُرْبٰى وَالْمَسَاك۪ينَ وَالْمُهَاجِر۪ينَ ف۪ي سَب۪يلِ اللّٰهِۖ وَلْيَعْفُوا وَلْيَصْفَحُواۜ اَلَا تُحِبُّونَ اَنْ يَغْفِرَ اللّٰهُ لَكُمْۜ وَاللّٰهُ غَفُورٌ رَح۪يمٌ22
तुममें जो बड़ाईवाले और सामर्थ्यवान है, वे नातेदारों, मुहताजों और अल्लाह की राह में घरबार छोड़नेवालों को देने से बाज़ रहने की क़सम न खा बैठें। उन्हें चाहिए कि क्षमा कर दें और उनसे दरगुज़र करें। क्या तुम यह नहीं चाहते कि अल्लाह तुम्हें क्षमा करें? अल्लाह बहुत क्षमाशील,अत्यन्त दयावान है
اِنَّ الَّذ۪ينَ يَرْمُونَ الْمُحْصَنَاتِ الْغَافِلَاتِ الْمُؤْمِنَاتِ لُعِنُوا فِي الدُّنْيَا وَالْاٰخِرَةِۖ وَلَهُمْ عَذَابٌ عَظ۪يمٌۙ23
निस्संदेह जो लोग शरीफ़, पाकदामन, भोली-भाली बेख़बर ईमानवाली स्त्रियों पर तोहमत लगाते है उनपर दुनिया और आख़िरत में फिटकार है। और उनके लिए एक बड़ी यातना है
يَوْمَ تَشْهَدُ عَلَيْهِمْ اَلْسِنَتُهُمْ وَاَيْد۪يهِمْ وَاَرْجُلُهُمْ بِمَا كَانُوا يَعْمَلُونَ24
जिस दिन कि उनकी ज़बानें और उनके हाथ और उनके पाँव उनके विरुद्ध उसकी गवाही देंगे, जो कुछ वे करते रहे थे,
يَوْمَئِذٍ يُوَفّ۪يهِمُ اللّٰهُ د۪ينَهُمُ الْحَقَّ وَيَعْلَمُونَ اَنَّ اللّٰهَ هُوَ الْحَقُّ الْمُب۪ينُ25
उस दिन अल्लाह उन्हें उनका ठीक बदला पूरी तरह दे देगा जिसके वे पात्र है। और वे जान लेंगे कि निस्संदेह अल्लाह ही सत्य है खुला हुआ, प्रकट कर देनेवाला
اَلْخَب۪يثَاتُ لِلْخَب۪يث۪ينَ وَالْخَب۪يثُونَ لِلْخَب۪يثَاتِۚ وَالطَّيِّبَاتُ لِلطَّيِّب۪ينَ وَالطَّيِّبُونَ لِلطَّيِّبَاتِۚ اُو۬لٰٓئِكَ مُبَرَّؤُ۫نَ مِمَّا يَقُولُونَۜ لَهُمْ مَغْفِرَةٌ وَرِزْقٌ كَر۪يمٌ۟26
गन्दी चीज़े गन्दें लोगों के लिए है और गन्दे लोग गन्दी चीज़ों के लिए, और अच्छी चीज़ें अच्छे लोगों के लिए है और अच्छे लोग अच्छी चीज़ों के लिए। वे लोग उन बातों से बरी है, जो वे कह रहे है। उनके लिए क्षमा और सम्मानित आजीविका है
يَٓا اَيُّهَا الَّذ۪ينَ اٰمَنُوا لَا تَدْخُلُوا بُيُوتًا غَيْرَ بُيُوتِكُمْ حَتّٰى تَسْتَاْنِسُوا وَتُسَلِّمُوا عَلٰٓى اَهْلِهَاۜ ذٰلِكُمْ خَيْرٌ لَكُمْ لَعَلَّكُمْ تَذَكَّرُونَ27
ऐ ईमान लानेवालो! अपने घरों के सिवा दूसरे घऱों में प्रवेश करो, जब तक कि रज़ामन्दी हासिल न कर लो और उन घरवालों को सलाम न कर लो। यही तुम्हारे लिए उत्तम है, कदाचित तुम ध्यान रखो