353. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
24 · अन-नूर
فَاِنْ لَمْ تَجِدُوا ف۪يهَٓا اَحَدًا فَلَا تَدْخُلُوهَا حَتّٰى يُؤْذَنَ لَكُمْۚ وَاِنْ ق۪يلَ لَكُمُ ارْجِعُوا فَارْجِعُوا هُوَ اَزْكٰى لَكُمْۜ وَاللّٰهُ بِمَا تَعْمَلُونَ عَل۪يمٌ28
फिर यदि उनमें किसी को न पाओ, तो उनमें प्रवेश न करो जब तक कि तुम्हें अनुमति प्राप्त न हो। और यदि तुमसे कहा जाए कि वापस हो जाओ तो वापस हो जाओ, यही तुम्हारे लिए अधिक अच्छी बात है। अल्लाह भली-भाँति जानता है जो कुछ तुम करते हो
لَيْسَ عَلَيْكُمْ جُنَاحٌ اَنْ تَدْخُلُوا بُيُوتًا غَيْرَ مَسْكُونَةٍ ف۪يهَا مَتَاعٌ لَكُمْۜ وَاللّٰهُ يَعْلَمُ مَا تُبْدُونَ وَمَا تَكْتُمُونَ29
इसमें तुम्हारे लिए कोई दोष नहीं है कि तुम ऐसे घरों में प्रवेश करो जिनमें कोई न रहता हो, जिनमें तुम्हारे फ़ायदे की कोई चीज़ हो। और अल्लाह जानता है जो कुछ तुम प्रकट करते हो और जो कुछ छिपाते हो
قُلْ لِلْمُؤْمِن۪ينَ يَغُضُّوا مِنْ اَبْصَارِهِمْ وَيَحْفَظُوا فُرُوجَهُمْۜ ذٰلِكَ اَزْكٰى لَهُمْۜ اِنَّ اللّٰهَ خَب۪يرٌ بِمَا يَصْنَعُونَ30
ईमानवाले पुरुषों से कह दो कि अपनी निगाहें बचाकर रखें और अपने गुप्तांगों की रक्षा करें। यही उनके लिए अधिक अच्छी बात है। अल्लाह को उसकी पूरी ख़बर रहती है, जो कुछ वे किया करते है
وَقُلْ لِلْمُؤْمِنَاتِ يَغْضُضْنَ مِنْ اَبْصَارِهِنَّ وَيَحْفَظْنَ فُرُوجَهُنَّ وَلَا يُبْد۪ينَ ز۪ينَتَهُنَّ اِلَّا مَا ظَهَرَ مِنْهَا وَلْيَضْرِبْنَ بِخُمُرِهِنَّ عَلٰى جُيُوبِهِنَّۖ وَلَا يُبْد۪ينَ ز۪ينَتَهُنَّ اِلَّا لِبُعُولَتِهِنَّ اَوْ اٰبَٓائِهِنَّ اَوْ اٰبَٓاءِ بُعُولَتِهِنَّ اَوْ اَبْنَٓائِهِنَّ اَوْ اَبْنَٓاءِ بُعُولَتِهِنَّ اَوْ اِخْوَانِهِنَّ اَوْ بَن۪ٓي اِخْوَانِهِنَّ اَوْ بَن۪ٓي اَخَوَاتِهِنَّ اَوْ نِسَٓائِهِنَّ اَوْ مَا مَلَكَتْ اَيْمَانُهُنَّ اَوِ التَّابِع۪ينَ غَيْرِ اُو۬لِي الْاِرْبَةِ مِنَ الرِّجَالِ اَوِ الطِّفْلِ الَّذ۪ينَ لَمْ يَظْهَرُوا عَلٰى عَوْرَاتِ النِّسَٓاءِۖ وَلَا يَضْرِبْنَ بِاَرْجُلِهِنَّ لِيُعْلَمَ مَا يُخْف۪ينَ مِنْ ز۪ينَتِهِنَّۜ وَتُوبُٓوا اِلَى اللّٰهِ جَم۪يعًا اَيُّهَ الْمُؤْمِنُونَ لَعَلَّكُمْ تُفْلِحُونَ31
और ईमानवाली स्त्रियों से कह दो कि वे भी अपनी निगाहें बचाकर रखें और अपने गुप्तांगों की रक्षा करें। और अपने शृंगार प्रकट न करें, सिवाय उसके जो उनमें खुला रहता है। और अपने सीनों (वक्षस्थल) पर अपने दुपट्टे डाल रहें और अपना शृंगार किसी पर ज़ाहिर न करें सिवाय अपने पतियों के या अपने बापों के या अपने पतियों के बापों के या अपने बेटों के या अपने पतियों के बेटों के या अपने भाइयों के या अपने भतीजों के या अपने भांजों के या मेल-जोल की स्त्रियों के या जो उनकी अपनी मिल्कियत में हो उनके, या उन अधीनस्थ पुरुषों के जो उस अवस्था को पार कर चुके हों जिससें स्त्री की ज़रूरत होती है, या उन बच्चों के जो स्त्रियों के परदे की बातों से परिचित न हों। और स्त्रियाँ अपने पाँव धरती पर मारकर न चलें कि अपना जो शृंगार छिपा रखा हो, वह मालूम हो जाए। ऐ ईमानवालो! तुम सब मिलकर अल्लाह से तौबा करो, ताकि तुम्हें सफलता प्राप्त हो