354. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
24 · अन-नूर
وَاَنْكِحُوا الْاَيَامٰى مِنْكُمْ وَالصَّالِح۪ينَ مِنْ عِبَادِكُمْ وَاِمَٓائِكُمْۜ اِنْ يَكُونُوا فُقَرَٓاءَ يُغْنِهِمُ اللّٰهُ مِنْ فَضْلِه۪ۜ وَاللّٰهُ وَاسِعٌ عَل۪يمٌ32
तुममें जो बेजोड़े के हों और तुम्हारे ग़ुलामों और तुम्हारी लौंडियों मे जो नेक और योग्य हों, उनका विवाह कर दो। यदि वे ग़रीब होंगे तो अल्लाह अपने उदार अनुग्रह से उन्हें समृद्ध कर देगा। अल्लाह बड़ी समाईवाला, सर्वज्ञ है
وَلْيَسْتَعْفِفِ الَّذ۪ينَ لَا يَجِدُونَ نِكَاحًا حَتّٰى يُغْنِيَهُمُ اللّٰهُ مِنْ فَضْلِه۪ۜ وَالَّذ۪ينَ يَبْتَغُونَ الْكِتَابَ مِمَّا مَلَكَتْ اَيْمَانُكُمْ فَكَاتِبُوهُمْ اِنْ عَلِمْتُمْ ف۪يهِمْ خَيْرًاۗ وَاٰتُوهُمْ مِنْ مَالِ اللّٰهِ الَّذ۪ٓي اٰتٰيكُمْۜ وَلَا تُكْرِهُوا فَتَيَاتِكُمْ عَلَى الْبِغَٓاءِ اِنْ اَرَدْنَ تَحَصُّنًا لِتَبْتَغُوا عَرَضَ الْحَيٰوةِ الدُّنْيَاۜ وَمَنْ يُكْرِهْهُنَّ فَاِنَّ اللّٰهَ مِنْ بَعْدِ اِكْرَاهِهِنَّ غَفُورٌ رَح۪يمٌ33
और जो विवाह का अवसर न पा रहे हो उन्हें चाहिए कि पाकदामनी अपनाए रहें, यहाँ तक कि अल्लाह अपने उदार अनुग्रह से उन्हें समृद्ध कर दे। और जिन लोगों पर तुम्हें स्वामित्व का अधिकार प्राप्त हो उनमें से जो लोग लिखा-पढ़ी के इच्छुक हो उनसे लिखा-पढ़ी कर लो, यदि तुम्हें मालूम हो कि उनमें भलाई है। और उन्हें अल्लाह के माल में से दो, जो उसने तुम्हें प्रदान किया है। और अपनी लौंडियों को सांसारिक जीवन-सामग्री की चाह में व्यविचार के लिए बाध्य न करो, जबकि वे पाकदामन रहना भी चाहती हों। औऱ इसके लिए जो कोई उन्हें बाध्य करेगा, तो निश्चय ही अल्लाह उनके बाध्य किए जाने के पश्चात अत्यन्त क्षमाशील, दयावान है
وَلَقَدْ اَنْزَلْنَٓا اِلَيْكُمْ اٰيَاتٍ مُبَيِّنَاتٍ وَمَثَلًا مِنَ الَّذ۪ينَ خَلَوْا مِنْ قَبْلِكُمْ وَمَوْعِظَةً لِلْمُتَّق۪ينَ۟34
हमने तुम्हारी ओर खुली हुई आयतें उतार दी है और उन लोगों की मिशालें भी पेश कर दी हैं, जो तुमसे पहले गुज़रे है, और डर रखनेवालों के लिए नसीहत भी
اَللّٰهُ نُورُ السَّمٰوَاتِ وَالْاَرْضِۜ مَثَلُ نُورِه۪ كَمِشْكٰوةٍ ف۪يهَا مِصْبَاحٌۜ اَلْمِصْبَاحُ ف۪ي زُجَاجَةٍۜ اَلزُّجَاجَةُ كَاَنَّهَا كَوْكَبٌ دُرِّيٌّ يُوقَدُ مِنْ شَجَرَةٍ مُبَارَكَةٍ زَيْتُونَةٍ لَا شَرْقِيَّةٍ وَلَا غَرْبِيَّةٍۙ يَكَادُ زَيْتُهَا يُض۪ٓيءُ وَلَوْ لَمْ تَمْسَسْهُ نَارٌۜ نُورٌ عَلٰى نُورٍۜ يَهْدِي اللّٰهُ لِنُورِه۪ مَنْ يَشَٓاءُۜ وَيَضْرِبُ اللّٰهُ الْاَمْثَالَ لِلنَّاسِۜ وَاللّٰهُ بِكُلِّ شَيْءٍ عَل۪يمٌۙ35
अल्लाह आकाशों और धरती का प्रकाश है। (मोमिनों के दिल में) उसके प्रकाश की मिसाल ऐसी है जैसे एक ताक़ है, जिसमें एक चिराग़ है - वह चिराग़ एक फ़ानूस में है। वह फ़ानूस ऐसा है मानो चमकता हुआ कोई तारा है। - वह चिराग़ ज़ैतून के एक बरकतवाले वृक्ष के तेल से जलाया जाता है, जो न पूर्वी है न पश्चिमी। उसका तेल आप है आप भड़का पड़ता है, यद्यपि आग उसे न भी छुए। प्रकाश पर प्रकाश! - अल्लाह जिसे चाहता है अपने प्रकाश के प्राप्त होने का मार्ग दिखा देता है। अल्लाह लोगों के लिए मिशालें प्रस्तुत करता है। अल्लाह तो हर चीज़ जानता है।
ف۪ي بُيُوتٍ اَذِنَ اللّٰهُ اَنْ تُرْفَعَ وَيُذْكَرَ ف۪يهَا اسْمُهُۙ يُسَبِّحُ لَهُ ف۪يهَا بِالْغُدُوِّ وَالْاٰصَالِۙ36
उन घरों में जिनको ऊँचा करने और जिनमें अपने नाम के याद करने का अल्लाह ने हुक्म दिया है,