355. पृष्ठ - कुरान पढ़ें

355. पृष्ठ
24 · अन-नूर
رِجَالٌۙ لَا تُلْه۪يهِمْ تِجَارَةٌ وَلَا بَيْعٌ عَنْ ذِكْرِ اللّٰهِ وَاِقَامِ الصَّلٰوةِ وَا۪يتَٓاءِ الزَّكٰوةِۙ يَخَافُونَ يَوْمًا تَتَقَلَّبُ ف۪يهِ الْقُلُوبُ وَالْاَبْصَارُۙ37
उनमें ऐसे लोग प्रभात काल और संध्या समय उसकी तसबीह करते है जिन्हें अल्लाह की याद और नमाज क़ायम करने और ज़कात देने से न तो व्यापार ग़ाफ़िल करता है और न क्रय-विक्रय। वे उस दिन से डरते रहते है जिसमें दिल और आँखें विकल हो जाएँगी
لِيَجْزِيَهُمُ اللّٰهُ اَحْسَنَ مَا عَمِلُوا وَيَز۪يدَهُمْ مِنْ فَضْلِه۪ۜ وَاللّٰهُ يَرْزُقُ مَنْ يَشَٓاءُ بِغَيْرِ حِسَابٍ38
ताकि अल्लाह उन्हें बदला प्रदान करे। उनके अच्छे से अच्छे कामों का, और अपने उदार अनुग्रह से उन्हें और अधिक प्रदान करें। अल्लाह जिसे चाहता है बेहिसाब देता है
وَالَّذ۪ينَ كَفَرُٓوا اَعْمَالُهُمْ كَسَرَابٍ بِق۪يعَةٍ يَحْسَبُهُ الظَّمْاٰنُ مَٓاءًۜ حَتّٰٓى اِذَا جَٓاءَهُ لَمْ يَجِدْهُ شَيْـًٔا وَوَجَدَ اللّٰهَ عِنْدَهُ فَوَفّٰيهُ حِسَابَهُۜ وَاللّٰهُ سَر۪يعُ الْحِسَابِۙ39
रहे वे लोग जिन्होंने इनकार किया उनके कर्म चटियल मैदान में मरीचिका की तरह है कि प्यासा उसे पानी समझता है, यहाँ तक कि जब वह उसके पास पहुँचा तो उसे कुछ भी न पाया। अलबत्ता अल्लाह ही को उसके पास पाया, जिसने उसका हिसाब पूरा-पूरा चुका दिया। और अल्लाह बहुत जल्द हिसाब करता है
اَوْ كَظُلُمَاتٍ ف۪ي بَحْرٍ لُجِّيٍّ يَغْشٰيهُ مَوْجٌ مِنْ فَوْقِه۪ مَوْجٌ مِنْ فَوْقِه۪ سَحَابٌۜ ظُلُمَاتٌ بَعْضُهَا فَوْقَ بَعْضٍۜ اِذَٓا اَخْرَجَ يَدَهُ لَمْ يَكَدْ يَرٰيهَاۜ وَمَنْ لَمْ يَجْعَلِ اللّٰهُ لَهُ نُورًا فَمَا لَهُ مِنْ نُورٍ۟40
या फिर जैसे एक गहरे समुद्र में अँधेरे, लहर के ऊपर लहर छा रही हैं; उसके ऊपर बादल है, अँधेरे है एक पर एक। जब वह अपना हाथ निकाले तो उसे वह सुझाई देता प्रतीत न हो। जिसे अल्लाह ही प्रकाश न दे फिर उसके लिए कोई प्रकाश नहीं
اَلَمْ تَرَ اَنَّ اللّٰهَ يُسَبِّحُ لَهُ مَنْ فِي السَّمٰوَاتِ وَالْاَرْضِ وَالطَّيْرُ صَٓافَّاتٍۜ كُلٌّ قَدْ عَلِمَ صَلَاتَهُ وَتَسْب۪يحَهُۜ وَاللّٰهُ عَل۪يمٌ بِمَا يَفْعَلُونَ41
क्या तुमने नहीं देखा कि जो कोई भी आकाशों और धरती में है, अल्लाह की तसबीह (गुणगान) कर रहा है और पंख पसारे हुए पक्षी भी? हर एक अपनी नमाज़ और तसबीह से परिचित है। अल्लाह भली-भाँति जाना है जो कुछ वे करते है
وَلِلّٰهِ مُلْكُ السَّمٰوَاتِ وَالْاَرْضِۚ وَاِلَى اللّٰهِ الْمَص۪يرُ42
अल्लाह ही के लिए है आकाशों और धरती का राज्य। और अल्लाह ही की ओर लौटकर जाना है
اَلَمْ تَرَ اَنَّ اللّٰهَ يُزْج۪ي سَحَابًا ثُمَّ يُؤَلِّفُ بَيْنَهُ ثُمَّ يَجْعَلُهُ رُكَامًا فَتَرَى الْوَدْقَ يَخْرُجُ مِنْ خِلَالِه۪ۚ وَيُنَزِّلُ مِنَ السَّمَٓاءِ مِنْ جِبَالٍ ف۪يهَا مِنْ بَرَدٍ فَيُص۪يبُ بِه۪ مَنْ يَشَٓاءُ وَيَصْرِفُهُ عَنْ مَنْ يَشَٓاءُۜ يَكَادُ سَنَا بَرْقِه۪ يَذْهَبُ بِالْاَبْصَارِۜ43
क्या तुमने देखा नहीं कि अल्लाह बादल को चलाता है। फिर उनको परस्पर मिलाता है। फिर उसे तह पर तह कर देता है। फिर तुम देखते हो कि उसके बीच से मेह बरसता है? और आकाश से- उसमें जो पहाड़ है (बादल जो पहाड़ जैसे प्रतीत होते है उनसे) - ओले बरसाता है। फिर जिस पर चाहता है, उसे हटा देता है। ऐसा प्रतीत होता है कि बिजली की चमक निगाहों को उचक ले जाएगी