358. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
24 · अन-नूर
وَاِذَا بَلَغَ الْاَطْفَالُ مِنْكُمُ الْحُلُمَ فَلْيَسْتَاْذِنُوا كَمَا اسْتَاْذَنَ الَّذ۪ينَ مِنْ قَبْلِهِمْۜ كَذٰلِكَ يُبَيِّنُ اللّٰهُ لَكُمْ اٰيَاتِه۪ۜ وَاللّٰهُ عَل۪يمٌ حَك۪يمٌ59
और जब तुममें से बच्चे युवावस्था को पहुँच जाएँ तो उन्हें चाहिए कि अनुमति ले लिया करें जैसे उनसे पहले लोग अनुमति लेते रहे है। इस प्रकार अल्लाह तुम्हारे लिए अपनी आयतों को स्पष्ट करता है। अल्लाह भली-भाँति जाननेवाला, तत्वदर्शी है
وَالْقَوَاعِدُ مِنَ النِّسَٓاءِ الّٰت۪ي لَا يَرْجُونَ نِكَاحًا فَلَيْسَ عَلَيْهِنَّ جُنَاحٌ اَنْ يَضَعْنَ ثِيَابَهُنَّ غَيْرَ مُتَبَرِّجَاتٍ بِز۪ينَةٍۜ وَاَنْ يَسْتَعْفِفْنَ خَيْرٌ لَهُنَّۜ وَاللّٰهُ سَم۪يعٌ عَل۪يمٌ60
जो स्त्रियाँ युवावस्था से गुज़रकर बैठ चुकी हों, जिन्हें विवाह की आशा न रह गई हो, उनपर कोई दोष नहीं कि वे अपने कपड़े (चादरें) उतारकर रख दें जबकि वे शृंगार का प्रदर्शन करनेवाली न हों। फिर भी वे इससे बचें तो उनके लिए अधिक अच्छा है। अल्लाह भली-भाँति सुनता, जानता है
لَيْسَ عَلَى الْاَعْمٰى حَرَجٌ وَلَا عَلَى الْاَعْرَجِ حَرَجٌ وَلَا عَلَى الْمَر۪يضِ حَرَجٌ وَلَا عَلٰٓى اَنْفُسِكُمْ اَنْ تَاْكُلُوا مِنْ بُيُوتِكُمْ اَوْ بُيُوتِ اٰبَٓائِكُمْ اَوْ بُيُوتِ اُمَّهَاتِكُمْ اَوْ بُيُوتِ اِخْوَانِكُمْ اَوْ بُيُوتِ اَخَوَاتِكُمْ اَوْ بُيُوتِ اَعْمَامِكُمْ اَوْ بُيُوتِ عَمَّاتِكُمْ اَوْ بُيُوتِ اَخْوَالِكُمْ اَوْ بُيُوتِ خَالَاتِكُمْ اَوْ مَا مَلَكْتُمْ مَفَاتِحَهُٓ اَوْ صَد۪يقِكُمْۜ لَيْسَ عَلَيْكُمْ جُنَاحٌ اَنْ تَاْكُلُوا جَم۪يعًا اَوْ اَشْتَاتًاۜ فَاِذَا دَخَلْتُمْ بُيُوتًا فَسَلِّمُوا عَلٰٓى اَنْفُسِكُمْ تَحِيَّةً مِنْ عِنْدِ اللّٰهِ مُبَارَكَةً طَيِّبَةًۜ كَذٰلِكَ يُبَيِّنُ اللّٰهُ لَكُمُ الْاٰيَاتِ لَعَلَّكُمْ تَعْقِلُونَ۟61
न अंधे के लिए कोई हरज है, न लँगड़े के लिए कोई हरज है और न रोगी के लिए कोई हरज है और न तुम्हारे अपने लिए इस बात में कि तुम अपने घरों में खाओ या अपने बापों के घरों से या अपनी माँओ के घरों से या अपने भाइयों के घरों से या अपनी बहनों के घरों से या अपने चाचाओं के घरों से या अपनी फूफियों (बुआओं) के घरों से या अपनी ख़ालाओं के घरों से या जिसकी कुंजियों के मालिक हुए हो या अपने मित्र के यहाँ। इसमें तुम्हारे लिए कोई हरज नहीं कि तुम मिलकर खाओ या अलग-अलग। हाँ, अलबत्ता जब घरों में जाया करो तो अपने लोगों को सलाम किया करो, अभिवादन अल्लाह की ओर से नियत किया हुए, बरकतवाला और अत्याधिक पाक। इस प्रकार अल्लाह तुम्हारे लिए अपनी आयतों को स्पष्ट करता है, ताकि तुम बुद्धि से काम लो