359. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
24 · अन-नूर25 · अल-फुरकान
اِنَّمَا الْمُؤْمِنُونَ الَّذ۪ينَ اٰمَنُوا بِاللّٰهِ وَرَسُولِه۪ وَاِذَا كَانُوا مَعَهُ عَلٰٓى اَمْرٍ جَامِعٍ لَمْ يَذْهَبُوا حَتّٰى يَسْتَاْذِنُوهُۜ اِنَّ الَّذ۪ينَ يَسْتَاْذِنُونَكَ اُو۬لٰٓئِكَ الَّذ۪ينَ يُؤْمِنُونَ بِاللّٰهِ وَرَسُولِه۪ۚ فَاِذَا اسْتَاْذَنُوكَ لِبَعْضِ شَاْنِهِمْ فَاْذَنْ لِمَنْ شِئْتَ مِنْهُمْ وَاسْتَغْفِرْ لَهُمُ اللّٰهَۜ اِنَّ اللّٰهَ غَفُورٌ رَح۪يمٌ62
मोमिन तो बस वही है जो अल्लाह और उसके रसूल पर पक्का ईमान रखते है। और जब किसी सामूहिक मामले के लिए उसके साथ हो तो चले न जाएँ जब तक कि उससे अनुमति न प्राप्त कर लें। (ऐ नबी!) जो लोग (आवश्यकता पड़ने पर) तुमसे अनुमति ले लेते है, वही लोग अल्लाह और रसूल पर ईमान रखते है, तो जब वे किसी काम के लिए अनुमति चाहें तो उनमें से जिसको चाहो अनुमति दे दिया करो, और उन लोगों के लिए अल्लाह से क्षमा की प्रार्थना किया करो। निस्संदेह अल्लाह बहुत क्षमाशील, अत्यन्त दयावान है
لَا تَجْعَلُوا دُعَٓاءَ الرَّسُولِ بَيْنَكُمْ كَدُعَٓاءِ بَعْضِكُمْ بَعْضًاۜ قَدْ يَعْلَمُ اللّٰهُ الَّذ۪ينَ يَتَسَلَّلُونَ مِنْكُمْ لِوَاذًاۚ فَلْيَحْذَرِ الَّذ۪ينَ يُخَالِفُونَ عَنْ اَمْرِه۪ٓ اَنْ تُص۪يبَهُمْ فِتْنَةٌ اَوْ يُص۪يبَهُمْ عَذَابٌ اَل۪يمٌ63
अपने बीच रसूल के बुलाने को तुम आपस में एक-दूसरे जैसा बुलाना न समझना। अल्लाह उन लोगों को भली-भाँति जानता है जो तुममें से ऐसे है कि (एक-दूसरे की) आड़ लेकर चुपके से खिसक जाते है। अतः उनको, जो उसके आदेश की अवहेलना करते है, डरना चाहिए कि कही ऐसा न हो कि उनपर कोई आज़माइश आ पड़े या उनपर कोई दुखद यातना आ जाए
اَلَٓا اِنَّ لِلّٰهِ مَا فِي السَّمٰوَاتِ وَالْاَرْضِۜ قَدْ يَعْلَمُ مَٓا اَنْتُمْ عَلَيْهِۜ وَيَوْمَ يُرْجَعُونَ اِلَيْهِ فَيُنَبِّئُهُمْ بِمَا عَمِلُواۜ وَاللّٰهُ بِكُلِّ شَيْءٍ عَل۪يمٌ64
सुन लो! आकाशों और धरती में जो कुछ भी है, अल्लाह का है। वह जानता है तुम जिस (नीति) पर हो। और जिस दिन वे उसकी ओर पलटेंगे, तो जो कुछ उन्होंने किया होगा, वह उन्हें बता देगा। अल्लाह तो हर चीज़ को जानता है
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِيمِ
تَبَارَكَ الَّذ۪ي نَزَّلَ الْفُرْقَانَ عَلٰى عَبْدِه۪ لِيَكُونَ لِلْعَالَم۪ينَ نَذ۪يرًاۙ1
बड़ी बरकतवाला है वह जिसने यह फ़ुरक़ान अपने बन्दे पर अवतरित किया, ताकि वह सारे संसार के लिए सावधान करनेवाला हो
اَلَّذ۪ي لَهُ مُلْكُ السَّمٰوَاتِ وَالْاَرْضِ وَلَمْ يَتَّخِذْ وَلَدًا وَلَمْ يَكُنْ لَهُ شَر۪يكٌ فِي الْمُلْكِ وَخَلَقَ كُلَّ شَيْءٍ فَقَدَّرَهُ تَقْد۪يرًا2
वह जिसका राज्य है आकाशों और धरती पर, और उसने न तो किसी को अपना बेटा बनाया और न राज्य में उसका कोई साझी है। उसने हर चीज़ को पैदा किया; फिर उसे ठीक अन्दाजें पर रखा