360. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
25 · अल-फुरकान
وَاتَّخَذُوا مِنْ دُونِه۪ٓ اٰلِهَةً لَا يَخْلُقُونَ شَيْـًٔا وَهُمْ يُخْلَقُونَ وَلَا يَمْلِكُونَ لِاَنْفُسِهِمْ ضَرًّا وَلَا نَفْعًا وَلَا يَمْلِكُونَ مَوْتًا وَلَا حَيٰوةً وَلَا نُشُورًا3
फिर भी उन्होंने उससे हटकर ऐसे इष्ट -पूज्य बना लिए जो किसी चीज़ को पैदा नहीं करते, बल्कि वे स्वयं पैदा किए जाते है। उन्हें न तो अपनी हानि का अधिकार प्राप्त है और न लाभ का। और न उन्हें मृत्यु का अधिकार प्राप्त है और न जीवन का और न दोबारा जीवित होकर उठने का
وَقَالَ الَّذ۪ينَ كَفَرُٓوا اِنْ هٰذَٓا اِلَّٓا اِفْكٌۨ افْتَرٰيهُ وَاَعَانَهُ عَلَيْهِ قَوْمٌ اٰخَرُونَۚۛ فَقَدْ جَٓاؤُ۫ ظُلْمًا وَزُورًاۚۛ4
जिन लोगों ने इनकार किया उनका कहना है, "यह तो बस मनघड़ंत है जो उसने स्वयं ही घड़ लिया है। और कुछ दूसरे लोगों ने इस काम में उसकी सहायता की है।" वे तो ज़ुल्म और झूठ ही के ध्येय से आए
وَقَالُٓوا اَسَاط۪يرُ الْاَوَّل۪ينَ اكْتَتَبَهَا فَهِيَ تُمْلٰى عَلَيْهِ بُكْرَةً وَاَص۪يلًا5
कहते है, "ये अगलों की कहानियाँ है, जिनको उसने लिख लिया है तो वही उसके पास प्रभात काल और सन्ध्या समय लिखाई जाती है।"
قُلْ اَنْزَلَهُ الَّذ۪ي يَعْلَمُ السِّرَّ فِي السَّمٰوَاتِ وَالْاَرْضِۜ اِنَّهُ كَانَ غَفُورًا رَح۪يمًا6
कहो, "उसे अवतरित किया है उसने, जो आकाशों और धरती के रहस्य जानता है। निश्चय ही वह बहुत क्षमाशील, अत्यन्त दयावान है।"
وَقَالُوا مَا لِهٰذَا الرَّسُولِ يَاْكُلُ الطَّعَامَ وَيَمْش۪ي فِي الْاَسْوَاقِۜ لَوْلَٓا اُنْزِلَ اِلَيْهِ مَلَكٌ فَيَكُونَ مَعَهُ نَذ۪يرًاۙ7
उनका यह भी कहना है, "इस रसूल को क्या हुआ कि यह खाना खाता है और बाज़ारों में चलता-फिरता है? क्यों न इसकी ओर कोई फ़रिश्ता उतरा कि वह इसके साथ रहकर सावधान करता?
اَوْ يُلْقٰٓى اِلَيْهِ كَنْزٌ اَوْ تَكُونُ لَهُ جَنَّةٌ يَاْكُلُ مِنْهَاۜ وَقَالَ الظَّالِمُونَ اِنْ تَتَّبِعُونَ اِلَّا رَجُلًا مَسْحُورًا8
या इसकी ओर कोई ख़ज़ाना ही डाल दिया जाता या इसके पास कोई बाग़ होता, जिससे यह खाता।" और इन ज़ालिमों का कहना है, "तुम लोग तो बस एक ऐसे व्यक्ति के पीछे चल रहे हो जो जादू का मारा हुआ है!"
اُنْظُرْ كَيْفَ ضَرَبُوا لَكَ الْاَمْثَالَ فَضَلُّوا فَلَا يَسْتَط۪يعُونَ سَب۪يلًا۟9
देखों, उन्होंने तुमपर कैसी-कैसी फब्तियाँ कसीं। तो वे बहक गए है। अब उनमें इसकी सामर्थ्य नहीं कि कोई मार्ग पा सकें!
تَبَارَكَ الَّذ۪ٓي اِنْ شَٓاءَ جَعَلَ لَكَ خَيْرًا مِنْ ذٰلِكَ جَنَّاتٍ تَجْر۪ي مِنْ تَحْتِهَا الْاَنْهَارُۙ وَيَجْعَلْ لَكَ قُصُورًا10
बरकतवाला है वह जो यदि चाहे तो तुम्हारे लिए इससे भी उत्तम प्रदान करे, बहत-से बाग़ जिनके नीचे नहरें बह रही हों, और तुम्हारे लिए बहुत-से महल तैया कर दे
بَلْ كَذَّبُوا بِالسَّاعَةِ وَاَعْتَدْنَا لِمَنْ كَذَّبَ بِالسَّاعَةِ سَع۪يرًاۚ11
नहीं, बल्कि बात यह है कि वे लोग क़ियामत की घड़ी को झुठला चुके है। और जो उस घड़ी को झुठला दे, उसके लिए दहकती आग तैयार कर रखी है